कनाडा में PGWP विवाद गहराया: वर्क परमिट रिजेक्शन के खिलाफ भारतीय छात्रों का प्रदर्शन, डिपोर्टेशन का बढ़ा खतरा

कनाडा के कैलगरी में PGWP आवेदन खारिज होने के बाद भारतीय छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वर्क परमिट विवाद, डिपोर्टेशन का खतरा और कानूनी लड़ाई तेज हो गई है।

कनाडा के कैलगरी में पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) आवेदन खारिज होने के बाद भारतीय छात्रों का प्रदर्शन जारी है। छात्रों का आरोप है कि पढ़ाई पूरी करने के बावजूद उन्हें काम करने का अधिकार नहीं मिल रहा, जिससे डिपोर्टेशन और आर्थिक संकट का खतरा बढ़ गया है।

टोरंटो: कनाडा में पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) को लेकर नया विवाद सामने आया है। अल्बर्टा प्रांत के कैलगरी शहर में करीब 1,000 भारतीय छात्र पिछले तीन सप्ताह से प्रदर्शन कर रहे हैं। इनमें लगभग 500 छात्र पंजाब से हैं। छात्रों का आरोप है कि उन्होंने लाखों रुपये खर्च कर पढ़ाई पूरी की, लेकिन अब उनके वर्क परमिट आवेदन यह कहकर खारिज किए जा रहे हैं कि उनका कोर्स मान्य नहीं है। इससे सैकड़ों छात्रों पर कनाडा छोड़ने का खतरा मंडरा रहा है। 29 जुलाई से कुछ छात्रों ने भूख हड़ताल भी शुरू कर दी है। खराब मौसम, बारिश और तेज धूप के बावजूद प्रदर्शन जारी है। छात्रों का कहना है कि वे केवल अपने भविष्य और कानूनी अधिकारों की रक्षा की मांग कर रहे हैं।

छात्रों का आरोप—नियम बदलने से भविष्य संकट में

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि जब उन्होंने कॉलेज में प्रवेश लिया था, तब उन्हें बताया गया था कि उनका कोर्स पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट के लिए पात्र है। इसी भरोसे पर उन्होंने भारी फीस जमा की और पढ़ाई पूरी की। हालांकि, पढ़ाई समाप्त होने के बाद कई छात्रों को इमिग्रेशन, रिफ्यूजी एंड सिटिजनशिप कनाडा (IRCC) से आवेदन अस्वीकृत होने के पत्र मिले। इनमें कहा गया कि संबंधित कार्यक्रम या कोर्स PGWP के लिए पात्र नहीं है। छात्रों का आरोप है कि दाखिले के समय जो नियम लागू थे, उन्हें बाद में बदल दिया गया और इसका खामियाजा अब छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।

लाखों रुपये खर्च, फिर भी नहीं मिला काम करने का अधिकार

प्रभावित छात्रों के अनुसार, उन्होंने औसतन 32,000 कनाडाई डॉलर, यानी लगभग 20 लाख रुपये तक की फीस देकर पढ़ाई पूरी की। कई परिवारों ने जमीन बेचकर या कर्ज लेकर बच्चों को कनाडा भेजा था। छात्रों का कहना है कि उनके साथ पढ़ने वाले कई अन्य विद्यार्थियों को तीन-तीन साल का वर्क परमिट मिल गया, जबकि उनकी फाइलें बाद में यह कहते हुए खारिज कर दी गईं कि उनका कोर्स अब मान्य नहीं है। इससे उनके सामने आर्थिक और मानसिक दोनों तरह का संकट खड़ा हो गया है।

मानसिक तनाव और डिपोर्टेशन का डर

वर्क परमिट अस्वीकृत होने के बाद कई छात्रों का कानूनी दर्जा प्रभावित हुआ है। उनका कहना है कि पढ़ाई पूरी होने के बाद हेल्थ कार्ड समाप्त हो गए हैं, कई मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस भी अमान्य हो चुके हैं और नौकरी करने का अधिकार भी खत्म हो गया है। छात्रों के मुताबिक, कई युवा मानसिक तनाव और अवसाद का सामना कर रहे हैं। कुछ अपने परिवारों को वास्तविक स्थिति बताने से भी डर रहे हैं क्योंकि उनके माता-पिता ने उन्हें विदेश भेजने के लिए भारी आर्थिक जोखिम उठाया था।

अल्बर्टा सरकार का रुख

अल्बर्टा की प्रीमियर डेनियल स्मिथ ने कहा कि वह संबंधित शिक्षण संस्थान को सीधे तौर पर फर्जी नहीं कहेंगी, लेकिन संभव है कि कुछ संस्थानों ने स्थायी निवास (PR) और भविष्य के अवसरों को लेकर छात्रों के सामने बढ़ा-चढ़ाकर दावे किए हों। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लोगों के पास वैध स्टूडेंट स्टेटस, वर्क परमिट या स्थायी निवास का अधिकार नहीं होगा, उन्हें कनाडा के आव्रजन कानूनों का पालन करना होगा। यह बयान प्रभावित छात्रों की चिंता और बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

गुरुद्वारा कमेटी ने बढ़ाया मदद का हाथ

कैलगरी के स्थानीय गुरुद्वारा साहिब ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों को भोजन, रहने की सुविधा और अन्य आवश्यक सहायता देने की घोषणा की है। गुरुद्वारा प्रबंधन ने छात्रों से अपील की है कि वे निराश होकर कोई गलत कदम न उठाएं और जरूरत पड़ने पर बेझिझक मदद लें। प्रबंधन ने यह भी कहा कि समुदाय कठिन समय में छात्रों के साथ खड़ा है और उन्हें अकेला महसूस करने की जरूरत नहीं है।

कानूनी विशेषज्ञों ने सुझाया कोर्ट का रास्ता

आव्रजन मामलों के विशेषज्ञों ने छात्रों को सलाह दी है कि वे दोबारा PGWP के लिए आवेदन करने के बजाय पहले अपने मामले की समीक्षा (Reconsideration) के लिए संबंधित विभाग को अनुरोध भेजें। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आवेदन अस्वीकार हुआ है, तो निर्धारित समय सीमा के भीतर फेडरल कोर्ट में कानूनी चुनौती देना बेहतर विकल्प हो सकता है। साथ ही, कई छात्रों को सलाह दी गई है कि वे 90 दिनों के भीतर किसी मान्यता प्राप्त सार्वजनिक कॉलेज में नया कोर्स लेकर अपना छात्र दर्जा बनाए रखने की कोशिश करें।

पंजाब के छात्रों पर सबसे अधिक असर

कनाडा जाने वाले भारतीय छात्रों में पंजाब की हिस्सेदारी सबसे अधिक मानी जाती है। इस विवाद से प्रभावित छात्रों में भी बड़ी संख्या पंजाब के जालंधर, लुधियाना और अमृतसर जैसे शहरों से बताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि विदेश शिक्षा के लिए कई परिवारों ने बड़ी आर्थिक जिम्मेदारी उठाई थी। ऐसे में वर्क परमिट न मिलने से न केवल छात्रों का करियर प्रभावित हो रहा है, बल्कि उनके परिवार भी गंभीर आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं।

आगे क्या?

कनाडा में PGWP विवाद अब केवल आव्रजन नीति का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय छात्रों के अधिकारों, शिक्षा संस्थानों की पारदर्शिता और आव्रजन नियमों की स्पष्टता पर भी सवाल खड़े कर रहा है। छात्र चाहते हैं कि उनके मामलों की निष्पक्ष समीक्षा की जाए और जिन नियमों के आधार पर उन्होंने प्रवेश लिया था, उन्हीं के अनुसार निर्णय लिया जाए। आने वाले दिनों में कानूनी प्रक्रिया और सरकारी रुख इस पूरे मामले की दिशा तय करेंगे।

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