CBSE का नया फॉर्मूला: 30 घंटे की पढ़ाई पर मिलेगा एक क्रेडिट, स्किल्स और स्पोर्ट्स के भी जुड़ेंगे अंक

CBSE ने नया क्रेडिट सिस्टम लागू करने की तैयारी की है। 30 घंटे की पढ़ाई पर एक क्रेडिट मिलेगा, जबकि स्किल एजुकेशन, खेल और अन्य गतिविधियों के अंक भी शामिल होंगे।
CBSE का नया फॉर्मूला: 30 घंटे की पढ़ाई पर मिलेगा एक क्रेडिट, स्किल्स और स्पोर्ट्स के भी जुड़ेंगे अंक
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Central Board of Secondary Education) ने छात्रों की पढ़ाई को अधिक व्यावहारिक, लचीला और समग्र बनाने की दिशा में नया क्रेडिट आधारित मूल्यांकन मॉडल अपनाने की तैयारी की है। नए प्रस्तावित ढांचे के तहत 30 घंटे की पढ़ाई पूरी करने पर एक क्रेडिट दिया जाएगा। इसके साथ ही केवल पारंपरिक विषयों के अंक ही नहीं, बल्कि स्किल एजुकेशन, खेलकूद, कला, व्यावसायिक शिक्षा और अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को भी छात्र के समग्र मूल्यांकन का हिस्सा बनाया जाएगा।

यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप माना जा रहा है, जिसमें छात्रों के सर्वांगीण विकास पर विशेष जोर दिया गया है। नए सिस्टम का मकसद रटने की बजाय सीखने की गुणवत्ता, व्यावहारिक ज्ञान और बहुआयामी प्रतिभा को प्रोत्साहित करना है।

नई व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक विषय या गतिविधि के लिए निर्धारित अध्ययन अवधि के आधार पर क्रेडिट तय किए जाएंगे। यदि कोई छात्र किसी विषय या कौशल आधारित पाठ्यक्रम में 30 घंटे का निर्धारित अध्ययन पूरा करता है, तो उसे एक अकादमिक क्रेडिट मिलेगा। इसी प्रकार अधिक अध्ययन घंटों के साथ क्रेडिट भी बढ़ते जाएंगे।

इस प्रणाली में स्किल डेवलपमेंट को विशेष महत्व दिया गया है। कंप्यूटर शिक्षा, कोडिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उद्यमिता, वित्तीय साक्षरता, कृषि, डिजाइन, हस्तशिल्प और अन्य व्यावसायिक विषयों में भागीदारी भी छात्र के रिकॉर्ड में दर्ज होगी। इससे विद्यार्थियों को केवल परीक्षा आधारित मूल्यांकन पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

खेलकूद और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को भी इस नई व्यवस्था में अहम स्थान मिलेगा। स्कूल स्तर पर आयोजित खेल प्रतियोगिताएं, योग, संगीत, नृत्य, नाटक, सामुदायिक सेवा और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी का भी मूल्यांकन किया जाएगा। इसका उद्देश्य छात्रों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास को बढ़ावा देना है।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रणाली छात्रों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार विषय चुनने की अधिक स्वतंत्रता दे सकती है। साथ ही इससे परीक्षा का दबाव कम करने और कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

स्कूलों को भी इस नई व्यवस्था के अनुरूप रिकॉर्ड प्रबंधन, मूल्यांकन प्रक्रिया और शिक्षण पद्धति में आवश्यक बदलाव करने होंगे। शिक्षकों को क्रेडिट आधारित प्रणाली के अनुसार प्रशिक्षण दिया जा सकता है, ताकि मूल्यांकन अधिक पारदर्शी और प्रभावी ढंग से किया जा सके।

नई व्यवस्था का एक प्रमुख उद्देश्य यह भी है कि छात्रों की उपलब्धियों का आकलन केवल लिखित परीक्षा से नहीं, बल्कि उनके समग्र प्रदर्शन के आधार पर किया जाए। इससे उच्च शिक्षा और रोजगार के लिए छात्रों की वास्तविक क्षमता का बेहतर मूल्यांकन संभव हो सकेगा।

फिलहाल CBSE इस क्रेडिट आधारित प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की दिशा में काम कर रहा है। इसके लागू होने के बाद छात्रों की पढ़ाई, मूल्यांकन और अकादमिक रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं। नई व्यवस्था से शिक्षा को अधिक लचीला, कौशल आधारित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने की उम्मीद जताई जा रही है

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