Lok Sabha Election 2029: Gen Z की होगी बड़ी भूमिका, मोदी-राहुल समेत सभी दलों की नजर युवा वोटरों पर

Lok Sabha Election 2029: 2029 के लोकसभा चुनाव में Gen Z मतदाता अहम भूमिका निभा सकते हैं। युवा वोटरों की बढ़ती संख्या और उनकी प्राथमिकताओं को देखते हुए

नीट पेपर लीक-2026 को लेकर जंतर-मंतर पर हुए छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों ने देश की राजनीति में एक बड़े बदलाव की ओर इशारा किया है। इस आंदोलन के बाद युवाओं, खासकर जेनरेशन Z (Gen Z) की राजनीतिक भूमिका और प्रभाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

नई दिल्ली: भारत की राजनीति में युवा मतदाताओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है और 2029 के आम चुनावों से पहले Gen Z (जेनरेशन Z) को एक प्रभावशाली राजनीतिक समूह के रूप में देखा जा रहा है। शिक्षा, रोजगार, डिजिटल अधिकार और पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर युवाओं की बढ़ती सक्रियता ने राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति पर नए सिरे से विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।

हालिया वर्षों में छात्र आंदोलनों और सोशल मीडिया आधारित अभियानों ने दिखाया है कि युवा वर्ग अब केवल मतदाता नहीं, बल्कि राजनीतिक विमर्श को प्रभावित करने वाली बड़ी ताकत बन चुका है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य प्रमुख राजनीतिक दलों की नजर इस उभरते वोट बैंक पर है।

NEET-UG विवाद और युवाओं की राजनीतिक सक्रियता

NEET-UG पेपर लीक विवाद को लेकर हुए छात्र विरोध-प्रदर्शनों ने शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और सरकारी जवाबदेही जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया। जंतर-मंतर जैसे स्थानों पर हुए प्रदर्शनों ने यह संकेत दिया कि डिजिटल युग में युवा अपनी बात तेजी से राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा सकते हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन अभियान और सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन अब युवाओं की राजनीतिक भागीदारी के नए माध्यम बन रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह केवल किसी एक मुद्दे तक सीमित आंदोलन नहीं है, बल्कि युवा पीढ़ी की बदलती राजनीतिक सोच और अपेक्षाओं को दर्शाता है।

2029 तक सबसे बड़ा वयस्क समूह बन सकती है Gen Z

संयुक्त राष्ट्र के वर्ल्ड पॉपुलेशन प्रॉस्पेक्ट्स 2024 जैसे जनसांख्यिकीय आंकड़ों के आधार पर किए गए अनुमान बताते हैं कि 2029 तक Gen Z भारत की सबसे बड़ी वयस्क पीढ़ियों में शामिल हो सकती है। Gen Z में आमतौर पर 1997 से 2012 के बीच जन्म लेने वाले लोग शामिल माने जाते हैं। अनुमान के मुताबिक, 2029 तक भारत में इस पीढ़ी की संख्या लगभग 38 करोड़ (380 मिलियन) तक पहुंच सकती है। 

इनमें करीब 19.9 करोड़ पुरुष और 18.1 करोड़ महिलाएं शामिल हो सकते हैं। यह संख्या उन्हें देश की सबसे बड़ी वयस्क पीढ़ी बना सकती है और वे चुनावी राजनीति में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

राजनीतिक दलों के लिए युवाओं को साधना बड़ी चुनौती

भारत की प्रमुख राजनीतिक पार्टियां अब युवाओं तक पहुंच बनाने पर विशेष ध्यान दे रही हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया कैंपेन और युवा केंद्रित नीतियों के जरिए पार्टियां Gen Z से जुड़ने की कोशिश कर रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर युवाओं के बीच अपनी पहुंच मजबूत कर रहे हैं। वहीं, राहुल गांधी, अखिलेश यादव, मायावती और अन्य विपक्षी नेता भी युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दे रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले चुनावों में केवल पारंपरिक जातीय और क्षेत्रीय समीकरण ही निर्णायक नहीं होंगे, बल्कि युवा मतदाताओं की प्राथमिकताएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

2029 चुनाव में कौन से मुद्दे बन सकते हैं अहम?

Gen Z के लिए कई ऐसे मुद्दे हैं जो आने वाले चुनावों में राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकते हैं। इनमें शामिल हैं:

  • रोजगार और नए अवसर
  • शिक्षा व्यवस्था में सुधार
  • प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता
  • महंगाई और जीवन यापन की लागत
  • डिजिटल अधिकार और इंटरनेट स्वतंत्रता
  • जलवायु परिवर्तन
  • बेहतर शासन व्यवस्था

युवा मतदाता अब केवल घोषणाओं से प्रभावित नहीं होते, बल्कि वे नीतियों के वास्तविक प्रभाव और उनके क्रियान्वयन पर भी ध्यान देते हैं।

Generation Alpha भी होगी बड़ी आबादी

Gen Z के बाद Generation Alpha भारत की अगली बड़ी पीढ़ी होगी। हालांकि 2029 के लोकसभा चुनावों में यह समूह मतदान करने की उम्र में नहीं होगा, लेकिन इसकी संख्या काफी बड़ी होगी। अनुमानों के अनुसार, Generation Alpha की आबादी 41 करोड़ से अधिक हो सकती है, जिससे यह भारत की सबसे बड़ी पीढ़ी बन सकती है। आने वाले दशकों में यह समूह देश की सामाजिक और राजनीतिक दिशा को प्रभावित करेगा।

हालांकि Gen Z की संख्या बढ़ रही है, लेकिन कुल मतदाता आबादी में युवाओं की हिस्सेदारी धीरे-धीरे बदल रही है। भारत में जनसंख्या संरचना में बदलाव के कारण युवा मतदाताओं का अनुपात आने वाले वर्षों में कम हो सकता है। आंकड़ों के अनुसार, 18 से 29 वर्ष के मतदाताओं की हिस्सेदारी 1988 में लगभग 38 प्रतिशत से अधिक थी, जो 2024 तक घटकर करीब 30 प्रतिशत के आसपास पहुंच गई। अनुमान है कि 2029 तक यह अनुपात और कम हो सकता है।

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