Central Vista Library Plan: सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को नोटिस, लाइब्रेरी की जगह और किताबों के कलेक्शन पर मांगा जवाब

Central Vista Library Plan को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से विस्तृत जवाब मांगा है। कोर्ट ने लाइब्रेरी के लिए तय जगह और 8.5 लाख किताबों समेत RK पुरम में

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत प्रस्तावित लाइब्रेरी की व्यवस्थाओं पर विस्तृत जवाब मांगा है। अदालत ने खास तौर पर मौजूदा किताबों के कलेक्शन के लिए तय की गई जगह से जुड़ी जानकारी देने को कहा है।

नई दिल्ली: सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत प्रस्तावित लाइब्रेरी की योजना और वहां मौजूदा किताबों के विशाल संग्रह को रखने के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली जगह को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने केंद्र को नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह के भीतर इस संबंध में विस्तृत जानकारी देने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने खास तौर पर इस बात पर चिंता जताई कि मौजूदा पुस्तक संग्रह लंबे समय से उचित व्यवस्था के अभाव में रखा हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच और अदालत की सहायता के लिए वरिष्ठ वकील हरि प्रिया पद्मनाभन को भी नियुक्त किया है। अदालत का जोर यह समझने पर है कि प्रस्तावित नई लाइब्रेरी में मौजूदा संग्रह को रखने और उसके उचित उपयोग के लिए पर्याप्त जगह तथा जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होंगी या नहीं।

आरके पुरम में लंबे समय से बंद पड़े हैं लाखों किताबें

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के आरके पुरम में रखे पुस्तक संग्रह का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। अदालत के अनुसार वहां करीब दो लाख किताबें कार्टन में पैक करके रखी गई हैं और लंबे समय से उनका इस्तेमाल नहीं हो पाया है। कोर्ट ने कहा कि इन किताबों को वर्ष 2011 से खोला तक नहीं गया है।अदालत की चिंता केवल किताबों के भंडारण तक सीमित नहीं है। 

इतने बड़े संग्रह का लंबे समय तक बंद और अनुपयोगी स्थिति में रहना संरक्षण, पहुंच और सार्वजनिक उपयोग से जुड़े कई सवाल खड़े करता है। इसी वजह से कोर्ट ने प्रस्तावित लाइब्रेरी में पुस्तक संग्रह के लिए पर्याप्त और व्यावहारिक व्यवस्था को लेकर जानकारी मांगी है।

प्रस्तावित लाइब्रेरी में कितनी होगी जगह?

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि मौजूदा पुस्तक संग्रह का वास्तविक आकार कितना है और नई लाइब्रेरी सुविधा में इसे रखने के लिए कितनी जगह प्रस्तावित की गई है। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि क्या नई व्यवस्था में केवल किताबों को रखने की जगह होगी या उनके व्यवस्थित संरक्षण, वर्गीकरण और पाठकों के इस्तेमाल के लिए भी पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी अदालत के समक्ष पेश हुईं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उनसे सीधे यह जानकारी मांगी कि प्रस्तावित बुनियादी ढांचे में लाइब्रेरी और उसके पुस्तक संग्रह के लिए पर्याप्त स्थान सुनिश्चित किया गया है या नहीं।

कॉन्फ्रेंस रूम और अन्य सुविधाओं पर भी सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल विस्टा के तहत प्रस्तावित अन्य सुविधाओं का भी जिक्र किया। अदालत ने जानना चाहा कि कॉन्फ्रेंस रूम और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए निर्धारित जगह का असर लाइब्रेरी और उसके पुस्तक संग्रह के लिए उपलब्ध स्थान पर तो नहीं पड़ेगा। कोर्ट का सवाल यह संकेत देता है कि नई लाइब्रेरी की योजना को केवल भवन निर्माण के नजरिए से नहीं देखा जा रहा, बल्कि उसमें मौजूद पुस्तक संग्रह की जरूरतों को भी समान महत्व देना जरूरी है। अदालत यह सुनिश्चित करना चाहती है कि पुस्तकालय के लिए निर्धारित जगह वास्तविक जरूरतों के अनुरूप हो।

केंद्र को तीन सप्ताह में देना होगा विस्तृत जवाब

सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद अब केंद्र सरकार को तीन सप्ताह के भीतर अदालत के समक्ष विस्तृत जवाब दाखिल करना होगा। जवाब में लाइब्रेरी के प्रस्तावित ढांचे, पुस्तक संग्रह की मात्रा और उसके लिए उपलब्ध कराई जाने वाली जगह से संबंधित जानकारी महत्वपूर्ण होगी। यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत विभिन्न सरकारी और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए नए बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है। ऐसे में लाइब्रेरी के मौजूदा संग्रह को सुरक्षित, व्यवस्थित और उपयोग योग्य बनाए रखना भी इस योजना से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों में शामिल हो गया है।

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