नालंदा के मां आशापुरी दरबार के गर्भगृह में महिलाओं के प्रवेश पर रोक, 350 साल पुराना है शक्तिपीठ

चैत्र नवरात्रि की शुरुआत के साथ नालंदा के मां आशापुरी मंदिर में विशेष नियम लागू। गर्भगृह में महिलाओं के प्रवेश पर परंपरागत रोक, जानें पूरी व्यवस्था।
नालंदा के मां आशापुरी दरबार के गर्भगृह में महिलाओं के प्रवेश पर रोक, 350 साल पुराना है शक्तिपीठ
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आज से पूरे देश में चैत्र नवरात्रि की पावन शुरुआत हो गई है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। बिहार के नालंदा जिले में भी नवरात्रि को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है, खासकर प्रसिद्ध मां आशापुरी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।

नालंदा स्थित मां आशापुरी दरबार को एक प्राचीन शक्तिपीठ के रूप में माना जाता है, जिसकी स्थापना करीब 350 साल पहले हुई थी। इस मंदिर की अपनी विशिष्ट परंपराएं हैं, जो आज भी सख्ती से निभाई जाती हैं। इन्हीं परंपराओं में एक प्रमुख नियम यह है कि मंदिर के गर्भगृह (मुख्य पूजा स्थल) में महिलाओं के प्रवेश पर रोक है।

मंदिर प्रबंधन और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसे धार्मिक आस्था से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि महिलाएं मंदिर परिसर में आकर पूजा-अर्चना कर सकती हैं, लेकिन गर्भगृह के अंदर प्रवेश की अनुमति केवल पुरुष पुजारियों और सीमित लोगों को ही दी जाती है।

नवरात्रि के मौके पर यहां विशेष पूजा, हवन और आरती का आयोजन किया जा रहा है। सुबह से ही श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए कतारों में खड़े नजर आ रहे हैं। प्रशासन द्वारा भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

मंदिर परिसर में साफ-सफाई, पेयजल और प्रकाश की बेहतर व्यवस्था की गई है। साथ ही पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है और प्रमुख स्थानों पर निगरानी रखी जा रही है। नवरात्रि के दौरान यहां दूर-दराज से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, जिसे देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।

धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के बीच यह मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का भी अहम हिस्सा है। नवरात्रि के इस पावन अवसर पर मां आशापुरी दरबार में उमड़ रही श्रद्धा और भक्ति, लोगों की गहरी आस्था को दर्शाती है।

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