चतरा में फर्जी नारकोटिक्स अफसर बनकर 31.90 लाख की लूट बस से उतारकर जंगल ले गए

चतरा में फर्जी नारकोटिक्स अधिकारी बनकर बस से यात्री को उतारकर 31.90 लाख लूटे गए। पुलिस ने पांच आरोपितों को गिरफ्तार कर थार और 70 हजार रुपये बरामद किए।
चतरा में फर्जी नारकोटिक्स अफसर बनकर 31.90 लाख की लूट बस से उतारकर जंगल ले गए
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झारखंड के चतरा जिले में खुद को नारकोटिक्स विभाग का अधिकारी बताकर यात्री बस से एक व्यक्ति को उतारने और उससे 31 लाख 90 हजार रुपये लूटने के मामले का पुलिस ने खुलासा किया है। यह वारदात सात सितंबर को वशिष्टनगर थाना क्षेत्र में चतरा-गया मुख्य मार्ग पर तड़बनवा के पास हुई थी। पुलिस ने मामले में पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों के पास से वारदात में इस्तेमाल की गई काले रंग की थार गाड़ी और 70 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, लूटी गई बाकी रकम की बरामदगी के प्रयास किए जा रहे हैं और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

पुलिस के मुताबिक, पत्थलगडा थाना क्षेत्र के बरवाडीह निवासी ललन कुमार करीब 32 लाख रुपये लेकर गया जा रहे थे। उनका उद्देश्य गया में जमीन खरीदना बताया गया है। वह रुपये से भरा बैग लेकर यात्री बस से सफर कर रहे थे। इसी दौरान तड़बनवा के पास आरोपितों ने बस को रुकवाया और खुद को नारकोटिक्स विभाग का अधिकारी बताकर कार्रवाई का भय दिखाया। इसके बाद ललन कुमार को उनके बैग समेत बस से नीचे उतार लिया गया।

पुलिस की जांच के अनुसार, बस से उतारने के बाद आरोपितों ने ललन कुमार को अपनी काली थार गाड़ी में बैठाया। इसके बाद उन्हें जंगल की ओर ले जाया गया। सुनसान स्थान पर ले जाने के बाद रुपये से भरा बैग कथित तौर पर छीन लिया गया और आरोपित वहां से फरार हो गए। घटना के बाद पीड़ित ने पुलिस को मामले की जानकारी दी। बड़ी रकम की लूट और फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर वारदात किए जाने के कारण पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए चतरा एसपी अनिमेष नैथानी के निर्देश पर विशेष जांच टीम यानी एसआईटी का गठन किया गया। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और स्थानीय स्तर पर जुटाई गई जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ाई। पुलिस को आरोपितों की गतिविधियों से जुड़े सुराग मिलने के बाद अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी शुरू की गई। इसी कार्रवाई के दौरान दो आरोपितों को कटैया जंगल से पकड़ा गया।

पुलिस के अनुसार, कटैया जंगल से रंगु कुमार और अभिषेक कुमार को गिरफ्तार किया गया। दोनों से पूछताछ के दौरान पुलिस को मामले में शामिल अन्य लोगों के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद जांच टीम ने कंगुरूवा जंगल में छापेमारी की। वहां से प्रिंस कुमार यादव, अविनाश कुमार और बजरंगी कुमार उर्फ रंगा को गिरफ्तार किया गया। इस तरह मामले में कुल पांच आरोपितों की गिरफ्तारी हुई।

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपितों के पास से नकदी भी बरामद की। रंगु कुमार के पास से 30 हजार रुपये, अभिषेक कुमार के पास से 20 हजार रुपये और प्रिंस कुमार के पास से 20 हजार रुपये बरामद किए गए। इस तरह पुलिस ने कुल 70 हजार रुपये बरामद किए हैं। इसके अलावा जिस काले रंग की थार का इस्तेमाल वारदात में किया गया था, उसे भी पुलिस ने जब्त कर लिया है।

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपित अलग-अलग इलाकों के रहने वाले हैं। इनमें गया जिले के धनगाई और बाराचट्टी क्षेत्र के आरोपित शामिल हैं, जबकि एक आरोपित हजारीबाग जिले के चौपारण क्षेत्र का रहने वाला बताया गया है। अलग-अलग जिलों से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस वारदात के पीछे कोई बड़ा गिरोह काम कर रहा था या आरोपितों ने स्थानीय स्तर पर योजना बनाकर घटना को अंजाम दिया।

इस वारदात में सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई कि आरोपितों ने कथित तौर पर सरकारी अधिकारी होने का झांसा दिया। नारकोटिक्स विभाग का नाम लेकर बस रुकवाना और यात्री को जांच के नाम पर नीचे उतारना इस पूरी साजिश का हिस्सा बताया जा रहा है। सरकारी अधिकारी की पहचान का फायदा उठाकर पीड़ित को डराने और उसे बस से अलग करने के बाद सुनसान इलाके में ले जाना पुलिस की जांच में सामने आया है।

बस से किसी यात्री को बीच रास्ते में इस तरह उतारना सामान्य स्थिति नहीं थी, लेकिन कथित तौर पर नारकोटिक्स अधिकारी होने की बात कहे जाने के कारण यह कार्रवाई वास्तविक सरकारी जांच जैसी प्रतीत हुई। इसके बाद पीड़ित को थार में बैठाकर जंगल की ओर ले जाया गया। पुलिस अब यह भी जांच कर सकती है कि आरोपितों ने खुद को अधिकारी बताने के लिए किसी तरह की पहचान, दस्तावेज या अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया था या नहीं।

घटना के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती लूटी गई रकम को बरामद करना थी। पीड़ित के पास करीब 32 लाख रुपये होने की जानकारी थी और पुलिस ने अब तक 70 हजार रुपये बरामद किए हैं। ऐसे में बड़ी रकम अभी बरामद होना बाकी है। पुलिस गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि लूट की रकम किस-किस के बीच बांटी गई और बाकी पैसा कहां रखा गया है।

जांच के दौरान पुलिस तकनीकी साक्ष्यों का भी इस्तेमाल कर रही है। एसआईटी ने स्थानीय सूचना के साथ तकनीकी इनपुट को जोड़कर आरोपितों तक पहुंच बनाई। पहले दो आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद उनसे मिली जानकारी के आधार पर तीन अन्य लोगों तक पहुंचने की बात पुलिस ने कही है। इससे संकेत मिलता है कि पूछताछ के दौरान पुलिस को वारदात की योजना और आरोपितों के नेटवर्क से जुड़े अहम सुराग मिले।

चतरा-गया मार्ग पर हुई इस वारदात ने यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। बस को रास्ते में रोककर किसी यात्री को सरकारी अधिकारी बनकर नीचे उतारना और फिर जंगल की ओर ले जाना गंभीर मामला है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपितों ने बस की गतिविधियों की पहले से जानकारी जुटाई थी या मौके का फायदा उठाकर वारदात की। इस बिंदु पर जांच आगे बढ़ने के बाद ही पूरी तस्वीर सामने आएगी।

पुलिस की कार्रवाई में वशिष्टनगर थाना प्रभारी अमित कुमार सिंह, प्रतापपुर थाना प्रभारी आलोक रंजन और इटखोरी थाना प्रभारी अभिषेक कुमार समेत अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे। अलग-अलग थाना क्षेत्रों की पुलिस को जांच में शामिल किए जाने से पता चलता है कि आरोपितों की तलाश के लिए कई स्थानों पर कार्रवाई की गई।

मामले में गिरफ्तार किए गए पांचों आरोपितों से पूछताछ के आधार पर पुलिस अन्य संभावित साथियों की तलाश भी कर रही है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस लूट की बाकी रकम बरामद करने और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। यानी अभी इस मामले में पुलिस की कार्रवाई पूरी नहीं मानी जा रही है।

ललन कुमार के लिए यह घटना उस समय हुई जब वह जमीन खरीदने के लिए बड़ी रकम लेकर गया जा रहे थे। इतनी बड़ी रकम के साथ यात्रा करते समय रास्ते में उन्हें कथित तौर पर सरकारी कार्रवाई का डर दिखाया गया। इसके बाद उन्हें बस से अलग कर दिया गया और जंगल में ले जाकर पैसे छीन लिए गए। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपितों को रकम के बारे में पहले से जानकारी थी या नहीं।

अगर पुलिस जांच में यह सामने आता है कि आरोपितों को पहले से पता था कि ललन कुमार के पास इतनी बड़ी रकम है, तो पुलिस के लिए यह जानना भी महत्वपूर्ण होगा कि उन्हें यह जानकारी कहां से मिली। इसी तरह बस के रूट, पीड़ित की यात्रा और उसके पास मौजूद रकम के बारे में आरोपितों को कैसे जानकारी हुई, यह भी जांच का हिस्सा बन सकता है।

फर्जी अधिकारी बनकर अपराध करने की घटनाओं में लोगों को सरकारी विभागों के नाम का डर दिखाकर भरोसे में लेने की कोशिश की जाती है। इस मामले में भी नारकोटिक्स विभाग का नाम इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस की जांच में यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि आरोपितों ने इस पहचान का इस्तेमाल सिर्फ इसी वारदात के लिए किया था या पहले भी इसी तरीके से किसी अन्य व्यक्ति को निशाना बनाया गया था।

फिलहाल पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया है और वारदात में इस्तेमाल थार को जब्त कर लिया गया है। 70 हजार रुपये की नकदी भी बरामद हुई है। बाकी रकम की तलाश जारी है। गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के आधार पर पुलिस को उम्मीद है कि लूट की रकम और मामले में शामिल अन्य लोगों के बारे में और जानकारी मिल सकती है।

पुलिस के अनुसार मामले की जांच तकनीकी साक्ष्यों और स्थानीय सूचना के आधार पर आगे बढ़ाई गई। जंगलों में अलग-अलग जगहों पर छापेमारी के बाद आरोपितों को पकड़ा गया। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि लूट की रकम का कितना हिस्सा आरोपितों के पास है और कितना किसी अन्य व्यक्ति के पास पहुंचाया गया।

इस घटना ने चतरा-गया मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चर्चा बढ़ा दी है। यात्रियों को रास्ते में रोककर सरकारी अधिकारी बनकर जांच करने का दावा करना अपने आप में गंभीर परिस्थिति है। पुलिस की जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि इस गिरोह ने वारदात के लिए किस तरह की योजना बनाई थी और क्या इसके पीछे कोई अन्य व्यक्ति भी था।

फिलहाल पांचों आरोपित पुलिस की गिरफ्त में हैं। पुलिस ने उनके पास से 70 हजार रुपये और वारदात में इस्तेमाल काली थार बरामद की है। लूटी गई 31 लाख 90 हजार रुपये की पूरी रकम में से अभी बड़ी राशि की बरामदगी बाकी है। पुलिस बाकी रकम की तलाश के साथ-साथ अन्य संभावित आरोपितों की भूमिका की जांच कर रही है।

इस पूरे मामले में पुलिस की जांच का अगला फोकस लूट की शेष रकम, वारदात की पूरी साजिश और आरोपितों के संभावित नेटवर्क पर रहेगा। गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है। अभी तक सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, लेकिन मामले में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

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