आँध्रप्रदेश के चित्तूर जिले में प्रीमियम आम की किस्मों को सीजन की अच्छी शुरुआत मिली है। बेनिशा आम को बाजार में शानदार कीमत मिल रही है, जिससे किसानों को राहत मिली है। हालांकि टोटापुरी आम और प्रोसेसिंग इंडस्ट्री की खरीद को लेकर चिंता बनी हुई है।
चित्तूर: प्रदेश के पूर्ववर्ती चित्तूर जिले में इस साल आम के सीजन की शुरुआत उत्साहजनक रही है। खासकर प्रीमियम आम की किस्मों को बाजार में अच्छी कीमत मिलने से किसानों और व्यापारियों में उम्मीद जगी है। शुरुआती चरण में बेनिशा (Benisha) जैसी प्रीमियम किस्मों की मांग तेज रही, जिससे आम उत्पादकों को राहत मिली है।
हालांकि, विशेषज्ञों और किसानों का कहना है कि जैसे-जैसे बाजार में आम की आवक बढ़ेगी, कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। विशेष रूप से टोटापुरी (Totapuri) किस्म को लेकर किसानों में चिंता बनी हुई है, क्योंकि यह मुख्य रूप से आम पल्प उद्योग पर निर्भर करती है।
बेनिशा आम को मिल रही रिकॉर्ड कीमत
चित्तूर और तिरुपति क्षेत्र में बेनिशा आम की शुरुआती खेप ने बाजार में शानदार प्रदर्शन किया है। व्यापारियों के अनुसार:
- तिरुपति में बेनिशा आम लगभग 42,000 रुपए प्रति टन तक बिक रहा है
- पुत्तूर बाजार में इसकी कीमत 30,000 से 40,000 रुपए प्रति टन के बीच रही
- कवर किए गए बेनिशा फल की कीमत 60,000 रुपए प्रति टन तक पहुंच गई
इस मजबूत शुरुआत ने किसानों को राहत दी है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में मौसम और बाजार की अनिश्चितताओं ने आम उत्पादकों को भारी नुकसान पहुंचाया था

कम उत्पादन के बावजूद मजबूत मांग
इस साल जिले में आम का कुल उत्पादन सामान्य से काफी कम बताया जा रहा है। किसानों का कहना है कि अभी तक बाजार में सामान्य उत्पादन का केवल 30 प्रतिशत ही पहुंचा है।
हालांकि उत्पादन कम है, लेकिन शुरुआती मांग अधिक होने के कारण कीमतें मजबूत बनी हुई हैं। इससे किसानों को बेहतर आय मिलने की उम्मीद जगी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सीमित आपूर्ति और प्रीमियम गुणवत्ता के कारण शुरुआती बाजार में कीमतें ऊंची बनी हुई हैं।
मौसम बेहतर रहा, फिर भी उत्पादन कम
पिछले दो वर्षों में मार्च और अप्रैल के दौरान असमय बारिश और ओलावृष्टि ने चित्तूर क्षेत्र के आम बागानों को भारी नुकसान पहुंचाया था। लेकिन इस बार मौसम अपेक्षाकृत शुष्क और स्थिर रहा।
इसके बावजूद किसान उम्मीद के मुताबिक उत्पादन नहीं मिलने से चिंतित हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि:
फूल आने के समय तापमान में बदलाव
जल संकट
- और मिट्टी की गुणवत्ता संबंधी समस्याएं
- इन कारणों से उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
- पुत्तूर और तिरुचानूर मंडियों में बढ़ी गतिविधि
पुत्तूर और तिरुचानूर बाजार यार्ड में इस समय व्यापारिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। व्यापारी नियमित रूप से देश के विभिन्न हिस्सों में आम की सप्लाई कर रहे हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक:
- प्रतिदिन लगभग 10 ट्रक आम विभिन्न बाजारों में भेजे जा रहे हैं
- दक्षिण भारत के अलावा उत्तर भारत और महानगरों में भी मांग बढ़ रही है
- प्रीमियम क्वालिटी आमों की ऑनलाइन और थोक बाजारों में अच्छी मांग देखी जा रही है
टोटापुरी आम को लेकर चिंता बरकरार
जहां प्रीमियम किस्मों को अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है, वहीं टोटापुरी आम उत्पादकों की चिंता अभी खत्म नहीं हुई है।
- टोटापुरी आम मुख्य रूप से:
- आम पल्प फैक्ट्रियों
- जूस इंडस्ट्री
- और प्रोसेसिंग यूनिट्स
- में इस्तेमाल किया जाता है।
फिलहाल इसकी कीमत 15,000 से 22,000 रुपए प्रति टन के बीच चल रही है, लेकिन किसानों को डर है कि जैसे-जैसे बाजार में आवक बढ़ेगी, कीमतों में भारी गिरावट आ सकती है।
प्रोसेसिंग फैक्ट्रियों की भूमिका अहम
किसानों की सबसे बड़ी चिंता आम पल्प प्रोसेसिंग यूनिट्स को लेकर है। पिछले सीजन में कई प्रोसेसिंग फैक्ट्रियों ने समय पर खरीद शुरू नहीं की थी, जिसके कारण किसानों को मजबूरी में बेहद कम कीमतों पर आम बेचना पड़ा था।
कई किसानों को भारी आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ा था।
इस बार भी यदि फैक्ट्रियां समय पर संचालन शुरू नहीं करतीं, तो टोटापुरी उत्पादकों के सामने फिर संकट खड़ा हो सकता है।
निर्यात और वैश्विक बाजार की संभावना
भारत दुनिया के सबसे बड़े आम उत्पादक देशों में शामिल है और आंध्र प्रदेश का चित्तूर क्षेत्र आम उत्पादन के लिए प्रसिद्ध माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि:
- प्रीमियम किस्मों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी मांग है
- गुणवत्ता और पैकेजिंग बेहतर होने पर निर्यात बढ़ सकता है
- डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म किसानों के लिए नए अवसर खोल सकते हैं
विशेष रूप से बेनिशा जैसी प्रीमियम किस्में खाड़ी देशों, यूरोप और दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों में लोकप्रिय हो सकती हैं।
किसानों की सरकार से मांग
- किसान संगठनों ने सरकार से मांग की है कि:
- प्रोसेसिंग यूनिट्स समय पर शुरू कराई जाएं
- न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसी व्यवस्था पर विचार किया जाए
- निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विशेष सहायता दी जाए
- कोल्ड स्टोरेज और लॉजिस्टिक सुविधाएं मजबूत की जाएं
उनका कहना है कि यदि बाजार और प्रोसेसिंग सेक्टर स्थिर रहे, तो इस साल किसानों को बेहतर लाभ मिल सकता है।









