चूरू अस्पताल विवाद: इलाज में लापरवाही के आरोप के बाद परिजनों का विरोध, शव रखकर किया प्रदर्शन

राजस्थान: चूरू के राजलदेसर अस्पताल में मरीज की मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया। डीप-फ्रीजर में शव रखकर मुआवजा व सस्पेंशन की मांग की।

चूरू के राजलदेसर सरकारी अस्पताल में मरीज की मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए शव को डीप-फ्रीजर में रखकर प्रदर्शन किया। परिजनों ने डॉक्टर को सस्पेंड करने और 50 लाख मुआवजे की मांग की।

चूरू: राजस्थान के चूरू जिले के राजलदेसर कस्बे में एक मरीज की मौत के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सरकारी अस्पताल में इलाज के दौरान हुई कथित लापरवाही के आरोप लगाते हुए परिजनों ने अस्पताल के बाहर शव को डीप-फ्रीजर में रखकर विरोध प्रदर्शन किया। इस घटना ने पूरे इलाके में तनाव का माहौल पैदा कर दिया।

परिजनों ने डॉक्टर पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए सस्पेंशन और मुआवजे की मांग की है। वहीं प्रशासन और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे।

मरीज की मौत के बाद भड़का आक्रोश

जानकारी के अनुसार, वार्ड 26 निवासी रामलाल भाट (33) को सोमवार सुबह करीब 9 बजे राजलदेसर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मरीज के पैर में गंभीर चोट लगी थी, जिसके बाद इलाज शुरू किया गया।

परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान डॉक्टर ने मरीज की स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया और केवल पैर पर प्लास्टर लगाकर इलाज किया गया। इस दौरान मरीज की हालत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन समय पर रेफर नहीं किया गया।

पांच घंटे इलाज के बाद बीकानेर रेफर, अस्पताल पहुंचते ही मौत

परिजनों के अनुसार, करीब पांच घंटे तक इलाज के बाद दोपहर लगभग 2 बजे मरीज को बीकानेर रेफर किया गया। मरीज को तुरंत पीबीएम अस्पताल ले जाया गया, जहां पहुंचते ही डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

मौत की खबर मिलते ही परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और वे शव को वापस राजलदेसर लेकर पहुंचे। इसके बाद अस्पताल के बाहर डीप-फ्रीजर में शव रखकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया गया।

परिजनों के गंभीर आरोप: इलाज में लापरवाही

परिजनों ने आरोप लगाया कि मरीज की हालत पहले से गंभीर थी, बावजूद इसके अस्पताल प्रशासन ने समय पर उचित इलाज नहीं दिया। उनका कहना है कि मरीज को खून की उल्टियां होने जैसी गंभीर स्थिति के बावजूद भी तुरंत रेफर नहीं किया गया।

परिजनों का दावा है कि यदि समय पर सही इलाज और रेफरल मिल जाता तो मरीज की जान बचाई जा सकती थी। इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखी जा रही है।

मुआवजे और सस्पेंशन की मांग पर अड़े परिजन

प्रदर्शन कर रहे परिजनों ने जिला प्रशासन के सामने कई मांगें रखी हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • आरोपी डॉक्टर को तत्काल निलंबित किया जाए
  • पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए
  • 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जा
  • मृतक के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए
  • अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था की समीक्षा हो

परिजनों का कहना है कि जब तक न्याय नहीं मिलता, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा।

पुलिस और प्रशासन मौके पर तैनात

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। राजलदेसर थाने से ASI बजरंग यादव पुलिस बल के साथ पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन स्थिति शांत नहीं हो सकी।

प्रदर्शन स्थल पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

सामाजिक संगठनों और नेताओं का समर्थन

इस आंदोलन में कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के लोग भी शामिल हुए। प्रदर्शन स्थल पर अखिल भारतीय किसान सभा, भीम आर्मी और अन्य स्थानीय संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

इसके अलावा स्थानीय जनप्रतिनिधि और विधायक स्तर के लोग भी मौके पर पहुंचे और परिजनों से बातचीत की कोशिश की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका।

मरीज की पृष्ठभूमि और परिवार की स्थिति

जानकारी के अनुसार, मृतक रामलाल भाट भजन-कीर्तन कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। वह धार्मिक आयोजनों और जागरण में गायक के रूप में काम करता था।

उसके परिवार में तीन छोटे बच्चे हैं, जिनमें दो बेटियां और एक बेटा शामिल हैं, जो अभी स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर बताई जा रही है, जिससे इस घटना ने उनके जीवन को और कठिन बना दिया है।

प्रशासनिक जांच के संकेत

प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच के संकेत दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि पूरे इलाज रिकॉर्ड की समीक्षा की जाएगी और डॉक्टरों की भूमिका की जांच होगी।

यदि जांच में लापरवाही साबित होती है तो संबंधित कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी।

अस्पताल व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और छोटे अस्पतालों में गंभीर मरीजों के लिए पर्याप्त सुविधाएं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी बनी रहती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर रेफरल और सही निर्णय न होने से कई बार ऐसी घटनाएं सामने आती हैं।

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