CJP प्रोटेस्ट में ब्लास्ट की साजिश का दावा, 9 आरोपी गिरफ्तार जंतर-मंतर पर पेट्रोल बम लाने की बात की जांच

CJP के जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े हिंसा मामले में ब्लास्ट की साजिश का दावा सामने आया है। 9 आरोपियों की गिरफ्तारी और पेट्रोल बम की जांच जारी है।
CJP प्रोटेस्ट में ब्लास्ट की साजिश का दावा, 9 आरोपी गिरफ्तार जंतर-मंतर पर पेट्रोल बम लाने की बात की जांच
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CJP के जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम में पुलिस जांच लगातार आगे बढ़ रही है। प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के बाद सुरक्षा एजेंसियों की ओर से कई लोगों की गतिविधियों और आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच की गई है। इसी बीच एक दावा सामने आया है कि प्रदर्शन के दौरान पेट्रोल बम जैसे ज्वलनशील पदार्थों के जरिए बड़ा विस्फोट कराने की साजिश रची गई थी और इस मामले में पंजाब पुलिस ने 9 आरोपियों को पकड़ा है। हालांकि ISI से सीधे जुड़ी साजिश और पेट्रोल बम वाली इस specific जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों से नहीं हो सकी है, इसलिए जांच पूरी होने तक इसे पुलिस या जांच एजेंसी के दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन के दौरान पहले भी स्थिति तनावपूर्ण हो चुकी थी। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प के दौरान पत्थर और बोतलें फेंके जाने की घटनाएं सामने आई थीं। दिल्ली पुलिस के कई जवान घायल हुए थे और स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस तथा RAF ने कार्रवाई की थी।

20 जुलाई को हुए ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान भी प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव हुआ था। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने हिंसा से जुड़े कई मामले दर्ज किए। एक FIR में पुलिसकर्मियों पर हमले, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने के प्रयास जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे।

घटना के बाद पुलिस ने प्रदर्शन स्थल और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। रिपोर्टों के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने करीब 2,873 लोगों की पहचान और सत्यापन किया। इनमें से 989 लोगों के खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई। इन मामलों में हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, डकैती, रेप, हथियार और NDPS एक्ट से जुड़े मामले भी शामिल बताए गए हैं।

पुलिस जांच का मकसद यह पता लगाना है कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा अचानक हुई या इसके पीछे पहले से कोई योजना थी। बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने वाले प्रदर्शन में बाहरी तत्वों की मौजूदगी की संभावना को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां अलग-अलग संदिग्ध लोगों की भूमिका की जांच कर रही हैं।

इसी जांच के बीच पेट्रोल बम और कथित ब्लास्ट की साजिश से जुड़ा दावा सामने आया है। यदि जांच में ज्वलनशील पदार्थों की बरामदगी या उन्हें प्रदर्शन स्थल तक पहुंचाने की बात प्रमाणित होती है, तो मामला बेहद गंभीर हो सकता है। हालांकि इस दावे की पुष्टि के लिए बरामदगी, FIR, पुलिस बयान और अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों को देखना जरूरी होगा।

ISI से जुड़े किसी भी आरोप को लेकर भी विशेष सावधानी जरूरी है। किसी विदेशी खुफिया एजेंसी की भूमिका का आरोप गंभीर प्रकृति का होता है और इसके लिए जांच एजेंसियों के ठोस सबूत आवश्यक होते हैं। फिलहाल उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों में CJP प्रदर्शन के संदर्भ में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की पहचान और हिंसा की जांच की जानकारी है, लेकिन ISI द्वारा ब्लास्ट की साजिश रचे जाने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिली है।

प्रदर्शन के दौरान हिंसा के बाद सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई थी। जंतर-मंतर तथा आसपास के इलाकों में पुलिस और RAF की तैनाती बढ़ाई गई। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और अन्य गैर-घातक साधनों का इस्तेमाल किया था। आधिकारिक पुलिस रिकॉर्ड के हवाले से रिपोर्टों में बताया गया कि RAF ने कई गैर-घातक गोले और प्लास्टिक पैलेट भी इस्तेमाल किए।

CJP प्रदर्शन को लेकर जांच का एक बड़ा हिस्सा उन लोगों की पहचान से जुड़ा है जो हिंसा में शामिल होने के संदेह में कैमरों में कैद हुए। दिल्ली पुलिस ने चेहरे की पहचान तकनीक का इस्तेमाल करके हजारों लोगों का सत्यापन किया। पुलिस के मुताबिक सत्यापन किए गए लोगों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग मिले जिनका आपराधिक रिकॉर्ड पहले से मौजूद था।

इस जांच से यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या कुछ लोग प्रदर्शन के मूल उद्देश्य से अलग इरादे से भीड़ में शामिल हुए थे। हालांकि किसी व्यक्ति का आपराधिक रिकॉर्ड होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उसने जंतर-मंतर पर हिंसा की या किसी साजिश में हिस्सा लिया। प्रत्येक आरोपी की भूमिका के लिए अलग-अलग सबूत जरूरी होंगे।

पेट्रोल बम से जुड़े कथित मामले में भी यही कानूनी प्रक्रिया लागू होगी। पुलिस को यह साबित करना होगा कि बरामद वस्तु क्या थी, वह किसके कब्जे में थी, उसे कहां से लाया गया और उसका इस्तेमाल या इस्तेमाल की तैयारी किस उद्देश्य से की जा रही थी। इसके अलावा आरोपियों के बीच किसी संगठित साजिश का संबंध है या नहीं, यह भी जांच का हिस्सा होगा।

पंजाब पुलिस द्वारा 9 आरोपियों की गिरफ्तारी के दावे को लेकर भी आधिकारिक जानकारी सामने आना जरूरी है। यदि वास्तव में इस मामले में नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है, तो उनकी गिरफ्तारी की तारीख, स्थान, दर्ज FIR, बरामदगी और लगाई गई धाराओं से जांच की वास्तविक दिशा स्पष्ट हो सकती है।

जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस की जांच में पहले से आपराधिक मामलों वाले लोगों की मौजूदगी जरूर सामने आई है। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक सत्यापन किए गए लोगों में 101 लोग हत्या के मामलों में, 62 हत्या के प्रयास के मामलों में और 284 लोग लूट या डकैती के मामलों में आरोपी पाए गए। हथियार और नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में भी कई लोग दर्ज थे।

इससे पुलिस को यह जांच करने का आधार मिला कि हिंसा के दौरान भीड़ में ऐसे लोगों की क्या भूमिका थी। हालांकि पुलिस की जांच और अदालत में आरोप साबित होना दो अलग प्रक्रियाएं हैं। इसलिए किसी आरोपी को दोषी ठहराने से पहले न्यायिक प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।

CJP प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की कई घटनाएं सामने आई थीं। RAF कर्मियों के साथ कथित मारपीट को लेकर भी दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की थी। पुलिस के अनुसार यह घटना जंतर-मंतर के आसपास हुई थी और अज्ञात लोगों के खिलाफ सार्वजनिक सेवक पर हमला करने समेत संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया।

प्रदर्शन से जुड़े मामलों की संख्या बढ़ने के साथ जांच एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती यह है कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने वालों और हिंसा में शामिल लोगों के बीच स्पष्ट अंतर किया जाए। किसी बड़े प्रदर्शन में हजारों लोगों की मौजूदगी के कारण प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका CCTV फुटेज, वीडियो, गवाहों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर तय करनी होगी।

यदि ब्लास्ट की साजिश से जुड़ा दावा जांच में सही पाया जाता है तो यह सामान्य हिंसा के मामले से कहीं अधिक गंभीर मामला होगा। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां आरोपियों के संपर्क, मोबाइल रिकॉर्ड, आर्थिक लेनदेन और संभावित नेटवर्क की जांच कर सकती हैं। लेकिन इन सभी पहलुओं की पुष्टि आधिकारिक जांच के बाद ही संभव होगी।

CJP प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बहस भी जारी है। प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं, जबकि पुलिस का कहना है कि भीड़ के हिंसक होने के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई करनी पड़ी। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों दोनों के घायल होने की रिपोर्ट सामने आई है।

इस पूरे घटनाक्रम में सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे भी तेजी से प्रसारित हुए हैं। ऐसे में किसी भी वायरल दावे को पुलिस की आधिकारिक पुष्टि के बिना तथ्य मानना उचित नहीं होगा। खासकर ISI जैसी विदेशी एजेंसी की कथित भूमिका और ब्लास्ट की साजिश जैसे आरोपों को प्रमाणित करने के लिए आधिकारिक जांच रिपोर्ट जरूरी है।

फिलहाल CJP प्रदर्शन से जुड़े मामलों में पुलिस की जांच का दायरा बड़ा है। हिंसा में शामिल संदिग्धों की पहचान, आपराधिक रिकॉर्ड की जांच, CCTV फुटेज का विश्लेषण और पुलिसकर्मियों पर हमले से जुड़े मामलों की पड़ताल जारी है।

यदि पंजाब में गिरफ्तार किए गए नौ आरोपियों के खिलाफ पेट्रोल बम या किसी विस्फोटक सामग्री से जुड़े ठोस सबूत सामने आते हैं, तो जांच का रुख और गंभीर हो सकता है। इसके बाद यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि सामग्री कहां से आई, किसके निर्देश पर लाई गई और क्या इसका संबंध जंतर-मंतर की हिंसा से था।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि CJP के जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद पुलिस ने बड़े स्तर पर जांच शुरू की है और प्रदर्शन में मौजूद लोगों की आपराधिक पृष्ठभूमि खंगाली गई है। हिंसा से जुड़े मामलों में कई गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों की पहचान भी हुई है।

वहीं ‘ISI ने ब्लास्ट की साजिश रची’ और ‘पेट्रोल बम लेकर आए 9 आरोपियों को पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार किया’ जैसे दावों की आधिकारिक और स्वतंत्र पुष्टि होने तक इन्हें आरोप या जांच के दावे के रूप में ही लिखा जाना चाहिए। जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई और आधिकारिक बयान से इस मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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