Colgate Palmolive Share: 3% से ज्यादा टूटा शेयर, ब्रोकरेज ने जताई चिंता; जानें टारगेट प्राइस

Colgate Palmolive Share में 3% से ज्यादा की गिरावट आई। Q1 नतीजों के बाद ब्रोकरेज ने कंपनी के प्रदर्शन पर चिंता जताई है। जानें शेयर का टारगेट प्राइस और पूरी राय।

एफएमसीजी कंपनी कोलगेट-पामोलिव (इंडिया) के शेयर मंगलवार को 3 फीसदी से अधिक गिरकर बंद हुए। Q1 एनालिस्ट कॉल के बाद ब्रोकरेज फर्मों ने कंपनी की निकट अवधि की कमाई को लेकर सतर्क रुख अपनाया है।

Colgate Palmolive India Share Price: कोलगेट-पामोलिव (इंडिया) के शेयरों में मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को तेज गिरावट देखने को मिली। कंपनी के Q1 एनालिस्ट कॉल के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ी और शेयर करीब 3 फीसदी से अधिक टूट गया। ब्रोकरेज हाउसों का मानना है कि प्रीमियम प्रोडक्ट्स, वॉल्यूम और रेवेन्यू ग्रोथ पर कंपनी का फोकस लंबी अवधि में फायदेमंद हो सकता है, लेकिन ज्यादा विज्ञापन और ब्रांड निवेश निकट अवधि में मुनाफे तथा मार्जिन पर दबाव डाल सकते हैं।

भारतीय FMCG सेक्टर की प्रमुख कंपनी Colgate-Palmolive (India) के शेयरों में मंगलवार को बिकवाली तेज रही। 18 अगस्त को कंपनी का शेयर करीब ₹1,954 के स्तर पर खुला और कारोबार के दौरान ₹1,901 का निचला स्तर छूने के बाद लगभग ₹1,903 पर बंद हुआ। साल 2026 में अब तक शेयर में 8 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की जा चुकी है।

गिरावट की मुख्य वजह कंपनी के Q1 एनालिस्ट कॉल के बाद सामने आए ब्रोकरेज कमेंट्स रहे। विश्लेषकों ने संकेत दिया है कि कंपनी की ग्रोथ रणनीति के लिए ब्रांड, विज्ञापन और प्रीमियमाइजेशन पर बढ़ता खर्च जरूरी हो सकता है, लेकिन इससे बिक्री की तुलना में कमाई की रफ्तार धीमी रहने और ऑपरेटिंग मार्जिन में सीमित सुधार की संभावना बनती है।

शेयर क्यों गिरा?

कोलगेट-पामोलिव की रणनीति में वॉल्यूम ग्रोथ, कीमतों में बदलाव और प्रीमियम प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी बढ़ाना प्रमुख बिंदु हैं। ब्रोकरेज हाउसों का मानना है कि इससे लंबे समय में कंपनी की आय बढ़ सकती है, लेकिन इस वृद्धि को हासिल करने के लिए विज्ञापन और ब्रांड निवेश बढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है।यही वजह है कि बाजार को निकट अवधि में संभावित Revenue-Earnings Trade-off की चिंता है। यानी बिक्री बढ़ सकती है, लेकिन उस ग्रोथ को हासिल करने के लिए अधिक खर्च होने से मुनाफे में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हो सकती।

कंपनी ने पहले भी संकेत दिया है कि आने वाली अवधि में कमोडिटी लागत और मुद्रा से जुड़े दबाव बने रह सकते हैं। साथ ही प्रीमियम उत्पादों और ब्रांड निर्माण पर खर्च बढ़ने से EBITDA मार्जिन पर असर पड़ सकता है।

Citi ने क्या कहा?

ब्रोकरेज फर्म Citi ने कोलगेट-पामोलिव पर अपनी ‘Sell’ रेटिंग बरकरार रखी है और ₹2,000 प्रति शेयर का टारगेट प्राइस दिया है। Citi का मानना है कि वॉल्यूम, प्राइसिंग और प्रोडक्ट मिक्स से कंपनी को ग्रोथ का लाभ मिल सकता है, लेकिन निकट अवधि में कमाई को लेकर पर्याप्त जोखिम मौजूद हैं। मौजूदा स्तर से सीमित संभावित बढ़त और अनुमानित आय जोखिम को देखते हुए ब्रोकरेज ने सतर्क रुख बनाए रखा है।

CLSA ने कोलगेट-पामोलिव पर ‘Hold’ रेटिंग कायम रखी है और ₹2,024 का टारगेट प्राइस तय किया है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी का हाई ग्रॉस मार्जिन विज्ञापन और ब्रांड निवेश में अतिरिक्त खर्च की गुंजाइश देता है। हालांकि, इसके बावजूद निवेशकों को यह देखना होगा कि बढ़ा हुआ खर्च कितनी तेजी से वास्तविक बिक्री और मुनाफे में तब्दील होता है।

HSBC भी सतर्क, टारगेट ₹2,140

HSBC ने भी कंपनी पर ‘Hold’ रेटिंग बरकरार रखी है और ₹2,140 प्रति शेयर का टारगेट दिया है। HSBC के अनुसार, प्रीमियम उत्पादों पर कंपनी का जोर और उत्पादों का ज्यादा इस्तेमाल हासिल करने की रणनीति लंबे समय में ग्रोथ का मजबूत आधार बन सकती है। हालांकि, ब्रांड निवेश में बढ़ोतरी के कारण निकट अवधि में मार्जिन पर दबाव की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

जहां Citi, CLSA और HSBC ने सावधानी बरती है, वहीं Jefferies का रुख काफी सकारात्मक है। ब्रोकरेज ने कोलगेट-पामोलिव पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखते हुए ₹2,650 का टारगेट प्राइस दिया है। Jefferies का मानना है कि कंपनी के पोर्टफोलियो में प्रीमियमाइजेशन, बेहतर वितरण और वॉल्यूम ग्रोथ आने वाले समय में रेवेन्यू को तेज कर सकते हैं। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि प्रीमियम उत्पादों और बेहतर प्राइसिंग के साथ कंपनी की आय में धीरे-धीरे तेजी आ सकती है।

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