संसद के मानसून सत्र के नौवें दिन लोकसभा ने भी वंदे मातरम् विधेयक पारित कर दिया। इससे पहले यह राज्यसभा से मंजूरी पा चुका था। वहीं एंटी पेपर लीक कानून, छात्र आंदोलन, विपक्ष के विरोध और सरकार के जवाबों को लेकर दोनों सदनों में तीखी बहस और हंगामा देखने को मिला।
नई दिल्ली: भारत की संसद के मानसून सत्र के नौवें दिन एक महत्वपूर्ण विधायी उपलब्धि दर्ज हुई, जब लोकसभा ने भी वंदे मातरम् विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इससे पहले यह विधेयक राज्यसभा से मंजूरी प्राप्त कर चुका था। दोनों सदनों की स्वीकृति के बाद अब विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद इसके कानून बनने का रास्ता साफ हो जाएगा। यह विधेयक राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को कानूनी संरक्षण देने के उद्देश्य से लाया गया है।
इसके तहत Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है, ताकि राष्ट्रीय गीत का जानबूझकर अपमान करने या उसके गायन में बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाया जा सके। सरकार का कहना है कि इस संशोधन से ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के समान कानूनी संरक्षण मिलेगा।
संसद में पूरे दिन जारी रहा राजनीतिक टकराव
विधेयक पारित होने के साथ-साथ संसद का नौवां दिन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के कारण भी चर्चा में रहा। लोकसभा और राज्यसभा दोनों में विपक्षी दलों ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन, कथित पुलिस कार्रवाई और विभिन्न राजनीतिक मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा। लोकसभा की कार्यवाही विपक्षी सांसदों की नारेबाजी के कारण कई बार बाधित हुई। विपक्षी सदस्य गृह मंत्री से जवाब की मांग करते हुए सदन के भीतर और संसद परिसर में प्रदर्शन करते रहे। लगातार शोर-शराबे के कारण कार्यवाही को कुछ समय के लिए स्थगित भी करना पड़ा।
एंटी पेपर लीक कानून पर हुई लंबी बहस
संसद में एंटी पेपर लीक कानून भी प्रमुख चर्चा का विषय रहा। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विधेयक पर सरकार का पक्ष रखा और कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह कानून आवश्यक है। सरकार के अनुसार नए कानून में पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच निर्धारित समय सीमा में पूरी करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। संगठित अपराध से जुड़े मामलों में कठोर सजा और भारी आर्थिक दंड का प्रस्ताव भी इसमें शामिल है। सरकार का तर्क है कि यह कानून प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को मजबूत करेगा और छात्रों के हितों की रक्षा करेगा।
विपक्ष ने कानून को बताया अपर्याप्त
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि पेपर लीक रोकने के लिए व्यापक प्रशासनिक सुधार और जवाबदेही की आवश्यकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक छात्रों के गुस्से को शांत करने का प्रयास मात्र है और जब तक परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव नहीं किए जाते, तब तक पेपर लीक की घटनाएं पूरी तरह नहीं रुकेंगी। खड़गे ने शिक्षा व्यवस्था, बजट और परीक्षा संचालन प्रणाली पर भी सरकार से जवाब मांगा।

छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई पर विपक्ष का विरोध
संसद के बाहर विपक्षी दलों ने छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रदर्शन किया। विपक्षी सांसदों ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर बल प्रयोग और कथित लाठीचार्ज के मामले में सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की। कांग्रेस सहित कई विपक्षी नेताओं ने गृह मंत्री से इस विषय पर संसद में विस्तृत बयान देने की मांग की। विपक्ष का कहना था कि लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।सरकार की ओर से इस मुद्दे पर विस्तृत प्रतिक्रिया की मांग लगातार उठती रही, जिससे सदन का माहौल कई बार तनावपूर्ण बना रहा।
राम मंदिर चढ़ावे के मुद्दे पर भी उठा विवाद
संसद परिसर में समाजवादी पार्टी सहित कुछ विपक्षी दलों ने राम मंदिर चढ़ावे में कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर भी प्रदर्शन किया। विपक्षी सांसदों ने इस विषय पर चर्चा की मांग करते हुए सरकार से निष्पक्ष जांच कराने का आग्रह किया। वहीं सत्तापक्ष के नेताओं ने कहा कि संबंधित एजेंसियां आवश्यक कार्रवाई कर रही हैं और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच पूरी होने का इंतजार किया जाना चाहिए।
सरकार ने विधायी एजेंडा आगे बढ़ाया
राजनीतिक गतिरोध और विरोध प्रदर्शनों के बावजूद सरकार ने अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश जारी रखी। वंदे मातरम् विधेयक के पारित होने के अलावा अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों पर भी चर्चा हुई। सरकार का कहना है कि संसद का उद्देश्य महत्वपूर्ण सुधारों को समयबद्ध तरीके से लागू करना है और विभिन्न क्षेत्रों में संस्थागत सुधारों के लिए आवश्यक कानून बनाए जा रहे हैं।
विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक
पूरे दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी करने और राजनीतिक लाभ लेने के आरोप लगाए। हालांकि कई अवसरों पर सदन की कार्यवाही सामान्य रूप से चलाने का प्रयास भी किया गया, लेकिन बार-बार होने वाले विरोध और नारेबाजी के कारण कार्यवाही प्रभावित होती रही।
आगे की प्रक्रिया
वंदे मातरम् विधेयक अब राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद यह कानून प्रभावी हो जाएगा। वहीं एंटी पेपर लीक कानून पर संसद की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसके लागू होने की दिशा में अगला कदम उठाया जाएगा। मानसून सत्र के आगामी दिनों में भी कई महत्वपूर्ण विधेयकों, आर्थिक मुद्दों और राष्ट्रीय विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।










