वित्तीय मामलों से जुड़ी संसद की स्थायी समिति ने पिछले हफ्ते अपनी रिपोर्ट में क्रिप्टोकरेंसी समेत वर्चुअल डिजिटल असेट्स (VDAs) के लिए सरकार को सेल्फ रेगुलेटरी ऑर्गनाइजेशन (SRO) बनाने की सलाह दी थी।
बिजनेस न्यूज़: भारत सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी और वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) से जुड़े लेनदेन पर निगरानी मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने क्रिप्टो एसेट रिपोर्टिंग से संबंधित एक विस्तृत गाइडेंस नोट जारी किया है। इस कदम का उद्देश्य क्रिप्टो लेनदेन में पारदर्शिता बढ़ाना और टैक्स चोरी की संभावनाओं को कम करना है।
हालांकि, सरकार के नए निर्देशों से क्रिप्टोकरेंसी पर लागू मौजूदा टैक्स व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी डिजिटल एसेट्स से होने वाली आय पर पहले की तरह ही टैक्स नियम लागू रहेंगे। लेकिन अब क्रिप्टो एक्सचेंजों, ब्रोकरों और अन्य संबंधित प्लेटफॉर्मों के लिए लेनदेन की जानकारी टैक्स विभाग तक पहुंचाना अनिवार्य होगा।
क्रिप्टो एक्सचेंजों को देनी होगी लेनदेन की जानकारी
CBDT के नए गाइडेंस नोट के अनुसार, क्रिप्टो एक्सचेंजों और अन्य रिपोर्टिंग क्रिप्टो एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स (RCASP) को अपने प्लेटफॉर्म पर होने वाले डिजिटल एसेट लेनदेन की जानकारी एकत्र करनी होगी और उसे आयकर विभाग के साथ साझा करना होगा। इसमें ग्राहकों की पहचान, टैक्स रेजिडेंसी, लेनदेन का विवरण और वार्षिक ट्रांजैक्शन रिपोर्ट जैसी जानकारियां शामिल होंगी। इसके लिए क्रिप्टो प्लेटफॉर्मों को मजबूत KYC प्रक्रिया अपनानी होगी और ग्राहकों से जुड़ी जानकारी को सत्यापित करना होगा।
इस बदलाव के बाद टैक्स विभाग के पास क्रिप्टो निवेशकों के वास्तविक लेनदेन का अधिक विस्तृत डेटा उपलब्ध होगा। इससे निवेशकों द्वारा आयकर रिटर्न में दी गई जानकारी और एक्सचेंज रिकॉर्ड के बीच अंतर का पता लगाना आसान हो जाएगा।
सरकार ने क्यों उठाया यह कदम?
भारत का यह कदम वैश्विक स्तर पर क्रिप्टो रिपोर्टिंग को मानकीकृत करने की दिशा में उठाया गया है। आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) तथा भारत सहित कई साझेदार देशों ने मिलकर Crypto-Asset Reporting Framework (CARF) तैयार किया है। CARF का उद्देश्य विभिन्न देशों के बीच क्रिप्टो एसेट से जुड़ी वित्तीय जानकारी के आदान-प्रदान को आसान बनाना है। इसके तहत क्रिप्टो सेवा प्रदाताओं के लिए रिपोर्टिंग की जिम्मेदारियां तय की गई हैं।
CBDT का नया निर्देश इसी अंतरराष्ट्रीय ढांचे के अनुरूप है। इससे भारत को वैश्विक स्तर पर क्रिप्टो लेनदेन की जानकारी जुटाने और वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
निवेशकों पर क्या पड़ेगा असर?

नए नियमों का सबसे बड़ा प्रभाव उन निवेशकों पर पड़ेगा जो क्रिप्टो ट्रेडिंग से जुड़ी जानकारी सही तरीके से रिपोर्ट नहीं करते हैं। कई बार निवेशक विदेशी एक्सचेंजों या अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर किए गए लेनदेन को आयकर रिटर्न में दर्ज करना भूल जाते हैं। अब एक्सचेंजों से मिलने वाली जानकारी के कारण आयकर विभाग के पास निवेशकों के क्रिप्टो लेनदेन का रिकॉर्ड उपलब्ध होगा। इससे वार्षिक सूचना विवरण (Annual Information Statement - AIS) और अन्य टैक्स दस्तावेजों में जानकारी को क्रॉस-वेरिफाई करना आसान हो जाएगा।
हालांकि, आम करदाताओं के लिए कोई नई टैक्स जिम्मेदारी तय नहीं की गई है। लेकिन अब उन्हें अपने क्रिप्टो निवेश और आय की जानकारी दर्ज करते समय अधिक सावधानी बरतनी होगी।
क्रिप्टो टैक्स नियमों में नहीं हुआ बदलाव
भारत में क्रिप्टोकरेंसी को अभी कानूनी मुद्रा यानी लीगल टेंडर का दर्जा प्राप्त नहीं है। वर्चुअल डिजिटल एसेट्स से होने वाले लाभ पर पहले की तरह 30 प्रतिशत की दर से टैक्स लागू रहेगा। इसके अलावा, क्रिप्टो ट्रेडिंग में होने वाले नुकसान को अन्य पूंजीगत लाभ (Capital Gains) के साथ समायोजित नहीं किया जा सकता। साथ ही, ऐसे नुकसान को भविष्य के वर्षों के लिए आगे भी नहीं बढ़ाया जा सकता।
इसका मतलब है कि सरकार ने फिलहाल क्रिप्टो टैक्स की दरों में कोई बदलाव नहीं किया है, बल्कि लेनदेन की निगरानी और रिपोर्टिंग व्यवस्था को मजबूत किया है।
क्रिप्टो प्लेटफॉर्मों की बढ़ी जिम्मेदारी
नए ढांचे के तहत क्रिप्टो एक्सचेंजों और अन्य RCASP की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो जाएगी। उन्हें ग्राहकों की पहचान सत्यापित करनी होगी, टैक्स संबंधी जानकारी एकत्र करनी होगी और निर्धारित समय पर रिपोर्ट जमा करनी होगी। इससे क्रिप्टो एक्सचेंज सरकार और निवेशकों के बीच सूचना के प्रमुख माध्यम बन जाएंगे। प्लेटफॉर्मों को अब केवल ट्रेडिंग सुविधा देने के बजाय वित्तीय रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।












