वेब सीरीज ‘द पिरामिड स्कीम’ के कलाकारों ने इंडस्ट्री में धोखे और फर्जी वादों के अनुभव साझा किए। परमवीर सिंह चीमा ने बताया कि पोर्टफोलियो शूट के नाम पर उनसे डेढ़ लाख रुपये ठगे गए। कलाकारों ने भरोसे और संघर्ष पर खुलकर बात की।
बॉलीवुड: टीवीएफ (TVF) की नई वेब सीरीज ‘द पिरामिड स्कीम’ सिर्फ एक एंटरटेनमेंट शो नहीं है, बल्कि यह उन वास्तविक घटनाओं और अनुभवों पर आधारित कहानी को सामने लाती है, जिसमें फर्जी वादों, स्कैम और भरोसे के टूटने की सच्चाई दिखाई गई है। यह सीरीज खासकर उन लोगों की कहानी बयां करती है जो बड़े सपनों के नाम पर आर्थिक और भावनात्मक धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं।
सीरीज के कलाकारों रणवीर शौरी, अल्फिया जाफरी, परमवीर सिंह चीमा और क्रिएटर-निर्देशक श्रेयांश पांडे ने अपने निजी अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि कैसे इंडस्ट्री और वास्तविक जीवन में कई बार लोग झूठे वादों और फर्जी स्कीम्स का शिकार बन जाते हैं।
पिरामिड स्कीम का सच: सिर्फ पैसा नहीं, रिश्ते भी टूटते हैं
क्रिएटर श्रेयांश पांडे के अनुसार पिरामिड स्कीम केवल वित्तीय धोखाधड़ी तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसका सबसे गहरा असर लोगों के रिश्तों पर पड़ता है। उन्होंने बताया कि ऐसे सिस्टम में लोगों को यह विश्वास दिलाया जाता है कि उनकी जिंदगी बदल जाएगी, उन्हें बेहतर करियर और अवसर मिलेंगे, लेकिन असल में यह एक सुनियोजित नेटवर्क होता है जो नए लोगों को जोड़कर चलता है।
श्रेयांश पांडे ने कहा कि कई मामलों में लोग अपने ही दोस्तों और रिश्तेदारों को इस सिस्टम में शामिल करते हैं, और जब यह स्कीम टूटती है तो सबसे बड़ा नुकसान भरोसे और रिश्तों का होता है, जिसे वापस पाना लगभग असंभव होता है।
परमवीर सिंह चीमा का अनुभव: डेढ़ लाख रुपये का नुकसान और टूटा भरोसा
अभिनेता परमवीर सिंह चीमा ने अपने शुरुआती करियर का एक अनुभव साझा किया, जिसमें वे एक फोटोग्राफर के झांसे में आ गए थे। उन्हें मॉडलिंग पोर्टफोलियो शूट के नाम पर बताया गया कि शूट की कीमत काफी ज्यादा है, लेकिन उन्हें रियायती दर पर काम दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि कुल मिलाकर उन्होंने करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च कर दिए, जिसमें अलग-अलग फीस शामिल थी। बाद में उन्हें पता चला कि वह फोटोग्राफर मुफ्त में भी काम करता था और उनसे अतिरिक्त पैसे लिए गए थे।
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परमवीर के अनुसार, इस घटना में सबसे बड़ा नुकसान पैसों का नहीं बल्कि भरोसे का था। उन्होंने कहा कि जब आपको लगता है कि लोग आपकी मदद कर रहे हैं और बाद में पता चलता है कि यह एक धोखा था, तो यह अनुभव मानसिक रूप से अधिक चोट पहुंचाता है।
रणवीर शौरी: इंडस्ट्री में उम्मीदें और वास्तविकता का फर्क
अभिनेता रणवीर शौरी ने बातचीत में बताया कि फिल्म और मनोरंजन उद्योग में अक्सर लोगों को यह कहा जाता है कि कोई खास रोल या प्रोजेक्ट उनकी जिंदगी बदल देगा। लेकिन वास्तविकता इससे अलग होती है।
उन्होंने कहा कि हर प्रोजेक्ट के बाद कलाकार को खुद को फिर से साबित करना पड़ता है। कई बार एक असफलता के बाद दो से तीन साल तक दोबारा अवसर पाने में समय लग जाता है। रणवीर ने यह भी कहा कि अनुभव के साथ व्यक्ति मजबूत हो जाता है और इंडस्ट्री की वास्तविकताओं को बेहतर तरीके से समझने लगता है।
अल्फिया जाफरी: झूठे वादों और फर्जी कास्टिंग कॉल का अनुभव
अभिनेत्री अल्फिया जाफरी ने बताया कि उन्होंने सीधे तौर पर किसी बड़े स्कैम का सामना नहीं किया, लेकिन उन्हें अक्सर ऐसे झूठे वादों का अनुभव हुआ, जिसमें कहा जाता था कि उन्हें बड़े अवसर मिलेंगे या उन्हें लॉन्च किया जाएगा।
उन्होंने एक घटना का जिक्र किया जिसमें उन्हें ‘हाउस ऑफ द ड्रैगन’ जैसी बड़ी सीरीज के लिए कास्ट करने का झूठा कॉल आया था, जो बाद में फर्जी निकला। इस अनुभव ने उन्हें लोगों पर भरोसा करने के मामले में अधिक सतर्क बना दिया।
अल्फिया ने कहा कि ऐसे अनुभवों के बाद उन्होंने अपने सोशल सर्कल को छोटा कर लिया और अब वे सीमित लोगों पर ही भरोसा करती हैं।
डिजिटल युग में बढ़ते फर्जी ऑफर और स्कैम
श्रेयांश पांडे ने बताया कि आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया और इंटरनेट के जरिए फर्जी कास्टिंग कॉल, स्कैम और झूठे वादों की संख्या बढ़ गई है। युवाओं को आकर्षक ऑफर दिए जाते हैं जैसे पर्सनैलिटी डेवलपमेंट, जॉब गारंटी या फिल्म इंडस्ट्री में ब्रेक।
लेकिन वास्तविकता यह है कि इनमें से कई ऑफर लोगों को फंसाने और उनसे पैसे ऐंठने के लिए बनाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि जागरूकता और सतर्कता ही इससे बचने का सबसे बड़ा तरीका है।
भरोसा टूटने का मानसिक असर
कलाकारों ने एकमत होकर कहा कि ऐसे अनुभवों का सबसे बड़ा प्रभाव मानसिक और भावनात्मक स्तर पर होता है। पैसे का नुकसान समय के साथ पूरा किया जा सकता है, लेकिन टूटे हुए भरोसे को वापस जोड़ना आसान नहीं होता।
परमवीर सिंह चीमा ने कहा कि ऐसे अनुभवों के बाद लोग दूसरों पर भरोसा करने से डरने लगते हैं, जबकि अल्फिया जाफरी ने बताया कि उन्होंने भी समय के साथ लोगों पर विश्वास करना सीमित कर दिया है।
‘द पिरामिड स्कीम’ की कहानी क्यों है महत्वपूर्ण
निर्देशक श्रेयांश पांडे के अनुसार यह वेब सीरीज केवल एक स्कैम की कहानी नहीं है, बल्कि यह उन लोगों की भावनात्मक यात्रा को दिखाती है जो अपने सपनों, पैसे और रिश्तों को दांव पर लगा देते हैं।
सीरीज यह भी बताती है कि कैसे एक झूठा सिस्टम धीरे-धीरे लोगों के जीवन को प्रभावित करता है और उन्हें ऐसे जाल में फंसा देता है, जिससे बाहर निकलना आसान नहीं होता।









