डेयरी और टोफू के कचरे से बनेगा कार्बन ट्रैप, स्विस वैज्ञानिकों की नई खोज

स्विस वैज्ञानिकों ने डेयरी और टोफू अपशिष्ट से विशेष बीड्स विकसित किए हैं, जो वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित कर कम लागत वाली कार्बन कैप्चर तकनीक बन सकते हैं।

स्विट्जरलैंड के शोधकर्ताओं ने डेयरी और टोफू उत्पादन से निकलने वाले प्रोटीन युक्त अपशिष्ट से ऐसे विशेष बीड्स विकसित किए हैं, जो वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को प्रभावी ढंग से अवशोषित कर सकते हैं। यह तकनीक कम लागत वाली कार्बन कैप्चर प्रणाली के रूप में उभर सकती है।

 ज्यूरिख: जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वैज्ञानिक लगातार नए समाधान खोज रहे हैं। इसी दिशा में स्विट्जरलैंड के ETH Zurich के शोधकर्ताओं ने डेयरी और टोफू उद्योग से निकलने वाले अपशिष्ट का उपयोग कर ऐसे विशेष कार्बन कैप्चर बीड्स विकसित किए हैं, जो वातावरण में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने में सक्षम हैं। यह खोज भविष्य में सस्ती और टिकाऊ कार्बन हटाने की तकनीक का आधार बन सकती है।

डेयरी और टोफू उद्योग के कचरे से तैयार किए गए विशेष बीड्स

जलवायु परिवर्तन आज पूरी दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। बढ़ते कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए वैज्ञानिक नई तकनीकों पर लगातार काम कर रहे हैं। इसी क्रम में स्विट्जरलैंड के ETH Zurich संस्थान के शोधकर्ताओं ने डेयरी और टोफू उत्पादन से निकलने वाले प्रोटीन युक्त अपशिष्ट को उपयोगी संसाधन में बदलने का तरीका खोजा है।

शोधकर्ताओं ने दूध उद्योग और टोफू निर्माण के दौरान निकलने वाले तरल अपशिष्ट से प्रोटीन निकाला। इसके बाद इन प्रोटीनों को पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड के साथ मिलाकर विशेष प्रकार के छिद्रयुक्त बीड्स तैयार किए गए। इन बीड्स की संरचना ऐसी है कि वे वातावरण में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड को अपने भीतर अवशोषित कर सकते हैं।

वातावरण से कार्बन हटाने में मददगार होगी तकनीक

वैज्ञानिकों के अनुसार इन बीड्स का मुख्य उद्देश्य वातावरण में मौजूद अतिरिक्त कार्बन डाइऑक्साइड को कम करना है। कार्बन डाइऑक्साइड को सीधे हवा से निकालने की प्रक्रिया को डायरेक्ट एयर कैप्चर (DAC) कहा जाता है। यह तकनीक जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि यह पहले से उत्सर्जित कार्बन को भी हटाने की क्षमता रखती है।

शोध में पाया गया कि प्रोटीन आधारित ये बीड्स कार्बन को प्रभावी रूप से पकड़ सकते हैं। साथ ही इन्हें तैयार करने के लिए ऐसे अपशिष्ट पदार्थों का उपयोग किया जाता है जो सामान्य रूप से फेंक दिए जाते हैं। इससे पर्यावरणीय कचरे की समस्या भी कम हो सकती है।

खाद्य उद्योग के अपशिष्ट का मिलेगा नया उपयोग

डेयरी और टोफू उत्पादन के दौरान बड़ी मात्रा में प्रोटीन युक्त तरल पदार्थ निकलता है। इसका कुछ हिस्सा खाद्य उद्योग में दोबारा उपयोग किया जाता है, लेकिन बड़ी मात्रा में यह अपशिष्ट के रूप में नष्ट हो जाता है।

नई तकनीक इस बेकार समझे जाने वाले पदार्थ को मूल्यवान संसाधन में बदल सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि इस तकनीक को बड़े स्तर पर अपनाया गया तो खाद्य उद्योग से निकलने वाले अपशिष्ट का बेहतर प्रबंधन संभव होगा और पर्यावरणीय लाभ भी मिलेगा।

कम लागत वाली कार्बन कैप्चर तकनीक की उम्मीद

कार्बन कैप्चर तकनीकों की सबसे बड़ी चुनौती उनकी लागत होती है। कई मौजूदा प्रणालियां महंगी हैं और बड़े पैमाने पर लागू करना आसान नहीं है। शोधकर्ताओं का कहना है कि डेयरी और टोफू अपशिष्ट से तैयार किए गए ये बीड्स अपेक्षाकृत कम लागत में बनाए जा सकते हैं।

यदि आगे के परीक्षणों में यह तकनीक सफल साबित होती है तो यह कार्बन हटाने के क्षेत्र में एक किफायती विकल्प बन सकती है। इससे उद्योगों, सरकारों और पर्यावरण संगठनों को जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिल सकती है।

जलवायु परिवर्तन के खिलाफ नई उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल उत्सर्जन कम करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि वातावरण में पहले से मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड को भी हटाना जरूरी है। ऐसे में डायरेक्ट एयर कैप्चर जैसी तकनीकों की भूमिका भविष्य में और महत्वपूर्ण हो जाएगी।

ETH Zurich की यह खोज दिखाती है कि वैज्ञानिक अपशिष्ट पदार्थों को भी जलवायु समाधान में बदल सकते हैं। आने वाले वर्षों में यदि यह तकनीक व्यावसायिक स्तर पर सफल होती है, तो यह कार्बन कैप्चर के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है और वैश्विक जलवायु प्रयासों को नई दिशा दे सकती है।

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