भारत में कई मशहूर नेताओं, फिल्मी सितारों और उद्योगपतियों को उनके नाम के साथ खास उपाधियों और उपनामों से भी जाना जाता है। किसी को ‘लौह पुरुष’ तो किसी को ‘शो-मैन’ और किसी को ‘कॉरपोरेट समुराई’ के नाम से पहचान मिली।
Darbari Seth Story: भारत के कॉरपोरेट इतिहास में कुछ ऐसे नाम हैं, जिन्होंने किसी कंपनी को सिर्फ कारोबार नहीं, बल्कि एक नई दिशा दी। दरबारी सेठ भी ऐसे ही दूरदर्शी उद्योग नेता थे। टाटा समूह में जूनियर इंजीनियर के रूप में करियर शुरू करने वाले सेठ ने आगे चलकर केमिकल, नमक और चाय जैसे क्षेत्रों में टाटा की मजबूत नींव तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्हें Tata Salt के जनक के रूप में भी याद किया जाता है। देश के घर-घर तक पहुंचने वाले इस ब्रांड की शुरुआती सोच के पीछे दरबारी सेठ का बड़ा योगदान था। टाटा समूह में उनकी भूमिका इतनी प्रभावशाली रही कि एक समय उन्हें समूह का ‘सत्रप’ यानी शक्तिशाली प्रशासक तक कहा जाता था।
1943 में जूनियर इंजीनियर के तौर पर शुरू हुआ सफर
दरबारी सेठ ने वर्ष 1943 में टाटा केमिकल्स के साथ अपने करियर की शुरुआत की। उस समय उन्होंने जूनियर इंजीनियर के तौर पर कंपनी में कदम रखा था। तकनीकी ज्ञान और औद्योगिक सोच के दम पर उन्होंने धीरे-धीरे संगठन में अपनी अलग पहचान बनाई। लगभग एक दशक बाद वह उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गए और सिनसिनाटी यूनिवर्सिटी से केमिकल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की। अमेरिका में उन्होंने डॉव केमिकल्स के साथ भी काम किया। अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक अनुभव हासिल करने के बाद वह भारत लौटे और दोबारा टाटा केमिकल्स से जुड़ गए।
बंजर जमीन पर खड़ा किया बड़ा केमिकल प्लांट
दरबारी सेठ की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गुजरात के मीठापुर में टाटा केमिकल्स के विस्तार को माना जाता है। जिस क्षेत्र में औद्योगिक विकास की संभावनाएं सीमित दिखाई देती थीं, वहां उन्होंने एक बड़े केमिकल संयंत्र को विकसित करने की दिशा में काम किया। उनकी इंजीनियरिंग समझ, प्रबंधन क्षमता और लंबे समय की रणनीति ने टाटा केमिकल्स को मजबूत औद्योगिक कंपनी बनाने में अहम भूमिका निभाई। यही वजह थी कि उन्हें टाटा समूह के केमिकल कारोबार के प्रमुख वास्तुकारों में गिना जाने लगा।

कैसे जुड़े Tata Salt से?
दरबारी सेठ का नाम सिर्फ केमिकल कारोबार तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने नमक के क्षेत्र में भी टाटा समूह के विस्तार का रास्ता तैयार किया। भारत में आधुनिक तकनीक के जरिए आयोडाइज्ड और वैक्यूम-इवेपोरेटेड नमक को बड़े पैमाने पर बाजार तक पहुंचाने की दिशा में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। बाद में Tata Salt देश के सबसे पहचाने जाने वाले नमक ब्रांडों में शामिल हो गया।
ब्रांड की पहचान से जुड़ी ‘देश का नमक’ जैसी पंक्ति ने इसे भारतीय उपभोक्ताओं के बीच और लोकप्रिय बनाया। इस तरह दरबारी सेठ को Tata Salt की शुरुआती रणनीति और विकास से जुड़े प्रमुख लोगों में याद किया जाता है।
Tata Tea की नींव में भी निभाई अहम भूमिका
दरबारी सेठ ने टाटा समूह के चाय कारोबार को बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। 1980 के दशक में जब ब्रिटिश कंपनी जेम्स फिनले भारत से अपना कारोबार समेटने लगी, तब उसके चाय बागानों के अधिग्रहण के जरिए टाटा समूह ने इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत की। इसी दौर में टाटा का चाय कारोबार आगे बढ़ा और Tata Tea एक प्रमुख उपभोक्ता ब्रांड के रूप में स्थापित हुआ। केमिकल्स से लेकर एफएमसीजी तक टाटा समूह की पहुंच बढ़ाने में दरबारी सेठ की रणनीतिक सोच की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
टाटा समूह में दरबारी सेठ का प्रभाव उनकी जिम्मेदारियों से भी समझा जा सकता है। टाटा केमिकल्स के नेतृत्व में सफलता के बाद उन्हें समूह की 14 से अधिक कंपनियों का चेयरमैन बनाया गया। इसके अलावा वह करीब 20 कंपनियों के निदेशक भी रहे। जे.आर.डी. टाटा के नेतृत्व वाले दौर में वह समूह के सबसे प्रभावशाली वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल थे। उनकी विशेषज्ञता का लाभ केवल एक कंपनी को नहीं, बल्कि टाटा समूह के कई कारोबारों को मिला।












