उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने बिजली उत्पादन और खरीद के निर्धारित शेड्यूल से विचलन पर शुल्क लगाने के लिए नए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं। भुगतान में देरी पर नौ दिन बाद प्रतिदिन 0.04 प्रतिशत साधारण ब्याज भी देना होगा।
देहरादून: उत्तराखंड में बिजली उत्पादन और खरीद के तय शेड्यूल से विचलन करने वाली इकाइयों पर अब आर्थिक दायित्व बढ़ सकता है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने विचलन निपटान तंत्र विनियम, 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है। प्रस्तावित नियम राज्य ग्रिड से जुड़े संस्थानों और राज्य के भीतर बिजली खरीद-बिक्री करने वाली इकाइयों पर लागू होंगे। इसका उद्देश्य ग्रिड अनुशासन और सुरक्षा को मजबूत करना है।
तय शेड्यूल से हटने पर देना होगा विचलन शुल्क
उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग यानी UERC ने बिजली उत्पादन और खरीद के निर्धारित शेड्यूल से होने वाले विचलन को लेकर नए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं। प्रस्तावित विचलन निपटान तंत्र विनियम, 2026 के तहत वास्तविक बिजली उत्पादन या खपत और स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर यानी SLDC की ओर से निर्धारित शेड्यूल के बीच अंतर को डेविएशन माना जाएगा।

इस तरह के विचलन के लिए संबंधित बिजली खरीदार या विक्रेता को डेविएशन चार्ज का भुगतान करना होगा। नियमों का उद्देश्य बिजली व्यवस्था में अनुशासन बनाए रखना और राज्य ग्रिड की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
सात दिन में करना होगा शुल्क का भुगतान
ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर की ओर से स्टेटमेंट जारी किए जाने के बाद संबंधित खरीदार या विक्रेता को सात दिनों के भीतर डेविएशन चार्ज का भुगतान करना होगा। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ेगा।
नियमों में प्रावधान किया गया है कि नौ दिन के बाद किए जाने वाले भुगतान पर प्रतिदिन 0.04 प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज लगाया जाएगा। इस व्यवस्था के जरिए समय पर भुगतान सुनिश्चित करने और बिजली बाजार से जुड़े पक्षों पर वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की कोशिश की गई है।
डिफॉल्ट करने वालों के लिए एलसी की शर्त
प्रस्तावित नियमों में ऐसे खरीदारों और विक्रेताओं के लिए भी कड़ा प्रावधान किया गया है, जिन्होंने पिछले वित्तीय वर्ष में भुगतान में डिफॉल्ट किया था। ऐसे पक्षों को अगले वित्तीय वर्ष में अपनी औसत साप्ताहिक देनदारी के 110 प्रतिशत के बराबर लेटर ऑफ क्रेडिट यानी LC रखना होगा।
यदि संबंधित पक्ष डेविएशन चार्ज का भुगतान नहीं करता है, तो SLDC उस लेटर ऑफ क्रेडिट को भुना सकता है। इससे समय पर भुगतान नहीं करने वाले खरीदारों और विक्रेताओं पर वित्तीय जिम्मेदारी और बढ़ जाएगी।
सरप्लस राशि अलग फंड में जाएगी
ड्राफ्ट नियमों में डेविएशन चार्ज से प्राप्त राशि के इस्तेमाल को लेकर भी प्रावधान किया गया है। महीने के अंत में डेविएशन से प्राप्त राशि में यदि कोई सरप्लस बचता है, तो उसे अलग स्टेट पावर सिस्टम डेवलपमेंट फंड में स्थानांतरित किया जाएगा।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत राज्य ग्रिड से जुड़े संस्थानों और राज्य के भीतर बिजली की खरीद-बिक्री करने वाली इकाइयों को निर्धारित शेड्यूल के अनुरूप उत्पादन और खपत बनाए रखने पर अधिक ध्यान देना होगा। इससे बिजली व्यवस्था में संतुलन, ग्रिड अनुशासन और भुगतान व्यवस्था को बेहतर बनाने का लक्ष्य है।











