Hardeep Singh Puri: राज्यसभा टिकट कटा, फिर भी मोदी कैबिनेट में बने रहने के संकेत, BJP की रणनीति में छिपा बड़ा संकेत

Hardeep Singh Puri News: BJP ने यूपी राज्यसभा चुनाव के लिए हरदीप सिंह पुरी को टिकट नहीं दिया, लेकिन नवंबर में कार्यकाल खत्म होने के बाद भी वे 6 महीने तक मंत्री

बीजेपी ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए आठ उम्मीदवारों की सूची जारी की है, जिसमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम नहीं है। उनका राज्यसभा कार्यकाल नवंबर में खत्म हो रहा है, ऐसे में उनका नाम सूची में न होना चर्चा का विषय बन गया है।

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए अपने आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। इस सूची में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम नहीं है। पुरी का मौजूदा राज्यसभा कार्यकाल नवंबर 2026 में समाप्त होने जा रहा है। ऐसे में उनके नाम का सूची से बाहर होना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। 

हालांकि, पार्टी के अंदरूनी संकेतों से यह स्पष्ट होता है कि राज्यसभा का टिकट नहीं मिलने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि हरदीप सिंह पुरी मोदी सरकार से बाहर होने वाले हैं।

यूपी चुनाव को ध्यान में रखकर तैयार की गई रणनीति

बीजेपी से जुड़े सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के लिए राज्यसभा उम्मीदवारों का चयन मुख्य रूप से 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर किया गया है। पार्टी ने ऐसे नेताओं को प्राथमिकता दी है, जिनकी राज्य में मजबूत राजनीतिक पकड़ और जमीनी मौजूदगी है। इस लिहाज से हरदीप सिंह पुरी को सूची में शामिल नहीं करना एक चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। 

पार्टी के लिए इस समय उत्तर प्रदेश में जातीय, क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को मजबूत करना प्राथमिकता है। यही वजह है कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव रखने वाले कुछ अन्य नेताओं को भी इस सूची में जगह नहीं मिली।

स्मृति ईरानी और सुनील बंसल भी सूची से बाहर

उत्तर प्रदेश की राज्यसभा सूची में सिर्फ हरदीप सिंह पुरी का नाम न होना ही चर्चा का विषय नहीं है। पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल जैसे प्रमुख नेताओं को भी इस बार मौका नहीं मिला है। सुनील बंसल ने अलग-अलग राज्यों में संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति तैयार करने में अहम भूमिका निभाई है। 

वहीं स्मृति ईरानी भी बीजेपी की राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण चेहरा रही हैं। ऐसे में पार्टी की सूची से इन नामों का बाहर रहना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि चयन में राष्ट्रीय कद के बजाय उत्तर प्रदेश के स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को प्राथमिकता दी गई है। 

राज्यसभा सदस्यता खत्म होने के बाद क्या होगा?

हरदीप सिंह पुरी का मौजूदा राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर 2026 तक है। उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी उनके मंत्री पद को लेकर तत्काल कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। संवैधानिक व्यवस्था के तहत कोई व्यक्ति संसद के किसी भी सदन का सदस्य न रहते हुए भी सीमित अवधि तक मंत्री पद पर बना रह सकता है। 

ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहें तो पुरी को कुछ समय तक केंद्रीय मंत्रिमंडल में बनाए रख सकते हैं। इस अवधि के दौरान उन्हें संसद का सदस्य बनने का रास्ता तलाशना होगा। यही प्रावधान हरदीप सिंह पुरी के राजनीतिक भविष्य को लेकर सबसे महत्वपूर्ण पहलू बन गया है।

पंजाब चुनाव में पुरी की भूमिका हो सकती है अहम

हरदीप सिंह पुरी मोदी सरकार में प्रमुख सिख चेहरों में शामिल हैं। उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पंजाब में भी अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में बीजेपी उनके अनुभव और राजनीतिक पहचान का इस्तेमाल पंजाब में कर सकती है। पार्टी के लिए पंजाब में सिख मतदाताओं और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के बीच अपनी स्थिति मजबूत करना चुनौतीपूर्ण रहा है।

ऐसे में पुरी की मौजूदगी बीजेपी के लिए रणनीतिक रूप से उपयोगी हो सकती है। यह भी संभावना जताई जा रही है कि पार्टी भविष्य में उन्हें पंजाब से संसद में लाने का विकल्प तलाश सकती है।

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