ओडिशा में INDIA ब्लॉक के 12 घंटे के बंद से गुरुवार को कई जिलों में जनजीवन प्रभावित रहा। बस और ऑटो सेवाएं बाधित हुईं, जबकि अस्पताल, एंबुलेंस, दवा और दूध जैसी आवश्यक सेवाओं को बंद से बाहर रखा गया है।
भुवनेश्वर: ओडिशा में गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को INDIA ब्लॉक के आह्वान पर 12 घंटे का राज्यव्यापी बंद शुरू हुआ। सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक प्रस्तावित इस बंद का असर कई हिस्सों में सार्वजनिक परिवहन, बाजारों और रोजमर्रा की गतिविधियों पर दिखाई दे रहा है। बसों और ऑटो-रिक्शा की सेवाएं प्रभावित होने से यात्रियों को वैकल्पिक साधनों की तलाश करनी पड़ रही है।
बंद के दौरान प्रदर्शनकारियों ने अलग-अलग स्थानों पर धरना, प्रदर्शन और सड़क अवरोध किए। राज्य सरकार ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला कलेक्टरों को एहतियाती कदम उठाने और संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं।
विपक्षी गठबंधन ने यह बंद चार प्रमुख मांगों को लेकर बुलाया है। इनमें MMDR Amendment Act, 2026 को वापस लेने, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, ओडिशा के स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे और बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए पर्याप्त राहत एवं मुआवजे की मांग शामिल है।
सुबह से ही परिवहन सेवाओं पर असर
बंद का सबसे स्पष्ट प्रभाव सार्वजनिक परिवहन पर दिखाई दे रहा है। कई इलाकों में बसें और ऑटो-रिक्शा सड़कों से दूर रहे, जिसके कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई यात्री बस स्टैंड और प्रमुख परिवहन केंद्रों पर वैकल्पिक साधनों की तलाश करते दिखाई दिए।
भुवनेश्वर में Capital Region Urban Transport यानी CRUT ने बताया कि Ama Bus सेवाएं चलाने की योजना थी, हालांकि स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर कुछ मार्गों पर सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इससे संकेत मिलता है कि बंद का प्रभाव पूरे परिवहन नेटवर्क पर एक समान नहीं रहा।
यात्रियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती नियमित बस और ऑटो सेवाओं में व्यवधान रही। कार्यालय जाने वाले लोगों, छात्रों और अन्य जरूरी काम से यात्रा करने वालों को कई स्थानों पर अतिरिक्त समय और वैकल्पिक परिवहन की जरूरत पड़ी।
चार प्रमुख मांगों को लेकर बंद
INDIA ब्लॉक ने बंद के पीछे चार प्रमुख मुद्दे रखे हैं। पहला मुद्दा Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Act, 2026 को वापस लेने का है। विपक्षी दलों का आरोप है कि नए प्रावधान ओडिशा के खनिज संसाधनों, राजस्व और राज्य के अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं।
दूसरी मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे से जुड़ी है। विपक्षी दलों ने Special Intensive Revision यानी SIR के दौरान मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर आधिकारिक चुनावी रिकॉर्ड और संबंधित संस्थाओं का पक्ष महत्वपूर्ण रहेगा।
तीसरी मांग स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे की है। विपक्ष ने स्कूल की पाठ्यपुस्तकों में कथित त्रुटियों को लेकर सरकार को घेरा है। चौथी मांग हाल की बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए पर्याप्त राहत, पुनर्वास और मुआवजे की है। बंद के आयोजकों ने इसे राज्य के प्रभावित परिवारों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में उठाया है।
दुकानें और कारोबारी गतिविधियां भी प्रभावित
बंद के आह्वान के चलते कई इलाकों में दुकानें, बाजार और कारोबारी प्रतिष्ठान बंद रहे। INDIA ब्लॉक ने अपने समर्थकों से शांतिपूर्ण तरीके से दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बंद रखने का आग्रह किया था।
हालांकि, राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बंद का असर एक जैसा नहीं रहा। कुछ स्थानों पर सामान्य गतिविधियां अधिक प्रभावित हुईं, जबकि कुछ क्षेत्रों में सीमित व्यवधान की स्थिति रही।
बाजारों पर असर का सीधा प्रभाव स्थानीय कारोबार और दैनिक खरीदारी पर पड़ा। परिवहन सेवाओं में कमी के कारण कई उपभोक्ताओं के लिए बाजारों तक पहुंचना भी मुश्किल हुआ।
जरूरी सेवाओं को बंद से बाहर रखा गया
बंद के आयोजकों ने आवश्यक और आपातकालीन सेवाओं को इसके दायरे से बाहर रखने की अपील की है। अस्पताल, एंबुलेंस, अग्निशमन सेवाएं, दवा की दुकानें और दूध की आपूर्ति जैसी सेवाओं को जारी रखने की बात कही गई है।
परीक्षाओं और अन्य जरूरी गतिविधियों को भी प्रभावित न करने की कोशिश की गई। इसका उद्देश्य राजनीतिक विरोध के बावजूद स्वास्थ्य, आपातकालीन सहायता और आवश्यक आपूर्ति जैसी सेवाओं को सामान्य बनाए रखना है।
हालांकि, स्थानीय परिस्थितियों के कारण अलग-अलग क्षेत्रों में सेवाओं की उपलब्धता में अंतर हो सकता है।
सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई
ओडिशा सरकार ने बंद के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी जिलों के प्रशासन को एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। गृह विभाग ने आशंका जताई थी कि कुछ जगहों पर सड़क अवरोध, रैलियां, धरना-प्रदर्शन और सरकारी या निजी प्रतिष्ठानों को बंद कराने के प्रयास हो सकते हैं।

जिला प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय करने को कहा गया है।
पुलिस का जोर प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बनाए रखने और प्रदर्शनकारियों को संवैधानिक अधिकारों की सीमा में विरोध करने देने पर है।
MMDR कानून पर राजनीतिक टकराव
ओडिशा बंद का एक प्रमुख मुद्दा MMDR Amendment Act, 2026 है। विपक्षी दलों का कहना है कि संशोधित कानून राज्य के खनिज संसाधनों और उससे मिलने वाले राजस्व पर असर डाल सकता है। INDIA ब्लॉक ने कानून को पूरी तरह वापस लेने की मांग की है।
दूसरी ओर, भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि संशोधन का उद्देश्य खनन गतिविधियों और खनिज कराधान में अधिक पारदर्शिता और एकरूपता लाना है।
इस मुद्दे ने ओडिशा में केंद्र और राज्य के अधिकारों, खनिज संसाधनों तथा राजस्व बंटवारे को लेकर राजनीतिक बहस को तेज किया है।
SIR और मतदाता सूची भी विरोध का केंद्र
बंद की दूसरी बड़ी वजह मतदाता सूची के Special Intensive Revision को लेकर विपक्ष की आपत्ति है। INDIA ब्लॉक ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए मतदाता सूची में कथित बदलावों और अनियमितताओं पर सवाल उठाए हैं।
यह मुद्दा केवल ओडिशा तक सीमित नहीं है। विपक्षी दल राष्ट्रीय स्तर पर भी SIR प्रक्रिया और चुनावी पारदर्शिता को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। हालांकि, मतदाता सूची से संबंधित किसी भी आरोप का आकलन आधिकारिक रिकॉर्ड और चुनाव आयोग की प्रक्रिया के आधार पर किया जाना आवश्यक है।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
विपक्ष ने स्कूल की पाठ्यपुस्तकों में कथित गलतियों को लेकर राज्य के स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे की मांग की है। INDIA ब्लॉक का आरोप है कि छात्रों तक गलत जानकारी पहुंचाने के लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
सरकार की ओर से भाजपा नेताओं ने कहा है कि पाठ्यपुस्तकों से जुड़ी त्रुटियों पर कार्रवाई शुरू की जा चुकी है और क्राइम ब्रांच की जांच चल रही है।
BJD ने बंद से दूरी बनाई
ओडिशा की प्रमुख क्षेत्रीय पार्टी बीजू जनता दल यानी BJD ने बंद को लेकर अपना रुख बदला। पार्टी ने पहले समर्थन की घोषणा की थी, लेकिन बाद में कहा कि वह न तो बंद का समर्थन करेगी और न ही विरोध, बल्कि स्वतंत्र राजनीतिक रुख बनाए रखेगी।
BJD के इस फैसले ने ओडिशा की राजनीति में बंद को लेकर विपक्षी एकजुटता के सवाल को भी महत्वपूर्ण बना दिया है। पार्टी ने हालांकि मतदाता सूची और चुनाव आयोग से जुड़े कुछ मुद्दों पर अलग से विरोध दर्ज कराया है।
आगे क्या?
12 घंटे का बंद शाम 6 बजे तक प्रस्तावित है। इस दौरान परिवहन, बाजार और व्यावसायिक गतिविधियों पर स्थानीय स्तर पर असर जारी रहने की संभावना है। प्रशासन की प्राथमिकता आवश्यक सेवाओं को सामान्य बनाए रखना और किसी अप्रिय घटना को रोकना है।
ओडिशा बंद ने राज्य में खनिज नीति, शिक्षा व्यवस्था, चुनावी प्रक्रिया और बाढ़ राहत जैसे अलग-अलग मुद्दों को एक साझा राजनीतिक मंच पर ला दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि बंद के बाद सरकार और विपक्ष के बीच इन मांगों को लेकर बातचीत होती है या राजनीतिक आंदोलन आगे और तेज किया जाता है।
फिलहाल राज्य के कई हिस्सों में सामान्य जनजीवन प्रभावित है, जबकि आवश्यक सेवाओं को चालू रखने की कोशिश की जा रही है। बंद का वास्तविक प्रभाव जिलावार अलग-अलग रहा है और दिन बढ़ने के साथ स्थिति में बदलाव संभव है।











