आगरा के दयालबाग में जन्माष्टमी के अवसर पर परम पुरुष पूरन धनी हुजूर स्वामीजी महाराज का पावन भंडारा आयोजित होगा। 2 से 6 सितंबर तक चलने वाले भंडारा सप्ताह में देश-विदेश से अनुयायी शामिल होंगे।
आगरा: जन्माष्टमी के अवसर पर दयालबाग में परम पुरुष पूरन धनी हुजूर स्वामीजी महाराज का पावन भंडारा श्रद्धा और सेवा भाव के साथ मनाया जाएगा। यहां 2 से 6 सितंबर तक भंडारा सप्ताह आयोजित किया जा रहा है। वहीं देश-विदेश की विभिन्न शाखाओं में 4 सितंबर को भंडारा होगा। आयोजन को लेकर दयालबाग में तैयारियां चल रही हैं और विभिन्न राज्यों से अनुयायियों के पहुंचने का क्रम जारी है।
दयालबाग में 2 से 6 सितंबर तक भंडारा सप्ताह
जन्माष्टमी के अवसर पर दयालबाग में परम पुरुष पूरन धनी हुजूर स्वामीजी महाराज का पावन भंडारा आयोजित किया जा रहा है। भंडारा सप्ताह 2 से 6 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान दयालबाग में सेवा, सत्संग और विभिन्न आध्यात्मिक गतिविधियों का विशेष आयोजन होगा।
![]()
दयालबाग सत्संग पदाधिकारियों के अनुसार, देश-विदेश की विभिन्न शाखाओं में भी 4 सितंबर को भंडारा आयोजित किया जाएगा। आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, बंगाल, ओडिशा और पूर्वी राज्यों के साथ यूरोप की अनुमत शाखाओं से सत्संगी अनुयायियों और पंजीकृत जिज्ञासुओं के दयालबाग पहुंचने का कार्यक्रम है।
जन्माष्टमी की रात हुआ था स्वामीजी महाराज का जन्म
सत्संग परंपरा के अनुसार, परम पुरुष पूरन धनी हुजूर स्वामीजी महाराज को राधास्वामी मत का आद्य प्रवर्तक, संस्थापक और प्रथम संत सतगुरु माना जाता है। उनका जन्म जन्माष्टमी की पावन रात्रि 24 और 25 अगस्त 1818 के बीच आगरा की पन्नी गली में सेठ शिवदयाल सिंह के रूप में हुआ था।
उनके जीवन और शिक्षाओं में मानव के आध्यात्मिक कल्याण पर जोर दिया गया। उन्होंने गृहस्थ जीवन के साथ आध्यात्मिक उन्नति का सहज मार्ग बताया और नियमित सुमिरन, ध्यान, भजन, सेवा तथा सत्संग के साथ सांसारिक दायित्व निभाने पर बल दिया।
उनके द्वारा प्रतिपादित सुरत-शब्द-योग की साधना राधास्वामी मत की प्रमुख आध्यात्मिक साधना मानी जाती है।
1861 में आम जिज्ञासुओं के लिए खुले सत्संग के द्वार
परंपरागत विवरण के मुताबिक, वर्ष 1858 में राय सालिगराम साहब बहादुर उनके संपर्क में आए और प्रमुख शिष्य बने। उनके आग्रह पर परम पुरुष पूरन धनी हुजूर स्वामीजी महाराज ने बसंत पंचमी, 15 फरवरी 1861 को सामान्य जिज्ञासुओं और गृहस्थों के लिए सत्संग के द्वार खोल दिए।
उनके बचनों को बाद में सार बचन राधास्वामी-छंद-बंद और सार बचन राधास्वामी-वार्तिक के रूप में संकलित किया गया। 15 जून 1878 को पन्नी गली स्थित अपने निवास पर उन्होंने नश्वर चोला त्यागकर निजधाम प्रस्थान किया। इसके बाद सत्संग की जिम्मेदारी परम गुरु हुजूर महाराज ने संभाली।
4 सितंबर को विशेष भंडारा दिवस
दयालबाग में 4 सितंबर को भंडारा दिवस पर सुबह आरती का कार्यक्रम होगा। इसके बाद द्वितीय पाली में खेतों पर नियमानुसार परम पुरुष पूरन धनी हुजूर स्वामीजी महाराज का पावन भंडारा आयोजित किया जाएगा।
मीडिया प्रभारी जितेन्द्र कांत शर्मा के अनुसार, भंडारा सप्ताह को लेकर आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। आयोजन के दौरान दयालबाग में बड़ी संख्या में अनुयायियों की मौजूदगी को देखते हुए सेवा और आध्यात्मिक कार्यक्रमों की व्यवस्थाएं की जा रही हैं।









