अलवर में सरिस्का सेंचुरी और क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (CTH) के नए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के बाद टाइगर रिजर्व की सीमा अब डढीकर तक बढ़ गई है। इस बदलाव से क्षेत्र में मौजूद दर्जनों होटल, रेस्टोरेंट, रिसोर्ट और फार्म हाउस पर खतरा मंडराने लगा है। नए सीमांकन के चलते इनके संचालन पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
Rajasthan: अलवर स्थित सरिस्का सेंचुरी और क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (CTH) के नए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन ने डढीकर क्षेत्र को भी रिजर्व की सीमा में शामिल कर दिया है। करीब 2808.73 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को आरक्षित वन क्षेत्र घोषित किए जाने से यहां के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर अनिश्चितता बढ़ गई है। डढीकर में शहर के कई बड़े होटल, रेस्टोरेंट और रिसोर्ट संचालित हो रहे हैं, जिनमें कुछ समूह पांच सितारा होटल की चेन लाने की तैयारी में थे।
नए सीमांकन के बाद इन सभी कॉमर्शियल इकाइयों के संचालन और भविष्य को लेकर चिंता गहरा गई है, क्योंकि आरक्षित वन क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगती है। इस बदलाव से दो दर्जन से अधिक प्रतिष्ठानों और कई फार्म हाउस प्रभावित हो सकते हैं।फिलहाल प्रशासन आपत्तियाँ आमंत्रित कर रहा है और अंतिम निर्णय इन्हीं के निस्तारण के बाद लिया जाएगा।
डढीकर में बढ़ सकता है टहला जैसा विवाद

टाइगर रिजर्व सीमा बढ़ने के बाद डढीकर में भी भविष्य में टहला जैसे हालात बन सकते हैं। सरिस्का के पूर्व सहायक वन संरक्षक विनोद शर्मा का कहना है कि टहला क्षेत्र में सीटीएच से एक किलोमीटर दायरे में बने 50 से अधिक होटलों का सर्वे प्रशासन पहले ही कर चुका है, जहां सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद कार्रवाई लंबित है। उनका मानना है कि डढीकर में भी व्यावसायिक प्रतिष्ठान लगातार बढ़ते रहे तो सेंचुरी सीमा के कारण भविष्य में प्रतिबंध लगाना अनिवार्य हो जाएगा। ऐसे में 2808 हेक्टेयर प्रभावित क्षेत्र में आने वाले सभी प्रतिष्ठानों पर समय रहते कार्रवाई जरूरी है।
सर्वे पूरा, कार्रवाई अब भी अधर में
सिलीसेढ़ और टहला क्षेत्रों में संचालित हो रहे दर्जनों कॉमर्शियल प्रतिष्ठानों का सर्वे प्रशासन पहले ही कर चुका है, लेकिन कार्रवाई को लेकर स्थिति अब भी अस्पष्ट बनी हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने संरक्षित क्षेत्रों में बने अवैध होटलों और रिसॉर्ट्स पर तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए थे, फिर भी स्थानीय स्तर पर इसे लागू करने की गति बेहद धीमी है। इससे वहां के कारोबारियों और पर्यावरण विशेषज्ञों के बीच असमंजस बढ़ रहा है।










