देहरादून के डीबीएस पीजी कॉलेज में गुरुवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) से जुड़े कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट का मामला सामने आया है। दोनों छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं के आमने-सामने आने के बाद कॉलेज परिसर में स्थिति तनावपूर्ण हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश शुरू की। फिलहाल शुरुआती जानकारी में मारपीट की पुष्टि हुई है, जबकि विवाद की पूरी वजह और घटना में शामिल लोगों के बारे में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
डीबीएस पीजी कॉलेज में हाल ही में छात्रसंघ चुनाव को लेकर भी राजनीतिक और छात्र संगठनों के बीच काफी गतिविधियां रही हैं। चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए ABVP के अभिषेक नेगी और NSUI के अभिनव कफलिया के बीच सीधा मुकाबला बताया गया था। बाद में घोषित परिणाम में NSUI के अभिनव कफलिया ने अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की। ऐसे में चुनावी प्रक्रिया के कुछ ही समय बाद दोनों संगठनों के कार्यकर्ताओं के बीच हुई मारपीट ने कॉलेज परिसर में तनाव की स्थिति पैदा कर दी है।
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम डीबीएस पीजी कॉलेज पहुंची। पुलिस ने मौके पर मौजूद कार्यकर्ताओं से जानकारी लेने और स्थिति को शांत कराने की कोशिश की। फिलहाल पुलिस की ओर से घटना के पीछे की वजह को लेकर विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों पक्षों के बीच विवाद किस बात को लेकर शुरू हुआ और देखते ही देखते मामला मारपीट तक कैसे पहुंच गया।
डीबीएस कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव के दौरान भी ABVP और NSUI के बीच मुकाबला चर्चा में रहा था। चुनाव से पहले अध्यक्ष पद पर दोनों संगठनों के उम्मीदवारों के बीच सीधी टक्कर बताई गई थी। चुनाव के बाद NSUI के अभिनव कफलिया अध्यक्ष निर्वाचित हुए। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार अभिनव पिछले कई वर्षों से कॉलेज में छात्रों के बीच सक्रिय थे और चुनाव की तैयारी कर रहे थे।
छात्रसंघ चुनाव के दौरान कॉलेज परिसरों में अलग-अलग छात्र संगठनों के बीच राजनीतिक गतिविधियां बढ़ जाती हैं। प्रचार, उम्मीदवारों के समर्थन और चुनावी रणनीति को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच बहस और विवाद की स्थिति भी बन सकती है। हालांकि डीबीएस कॉलेज की मौजूदा मारपीट के मामले में विवाद का वास्तविक कारण पुलिस जांच और संबंधित पक्षों के बयान के बाद ही स्पष्ट होगा।
मौके पर पुलिस के पहुंचने के बाद कॉलेज परिसर में स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया। पुलिस की प्राथमिकता फिलहाल किसी भी तरह की स्थिति को और बिगड़ने से रोकना और दोनों पक्षों को अलग रखना हो सकती है। घटना के संबंध में पुलिस आसपास मौजूद लोगों और छात्र-कार्यकर्ताओं से पूछताछ कर सकती है, ताकि विवाद की शुरुआत और मारपीट में शामिल लोगों की पहचान की जा सके।
इस घटना के बाद कॉलेज परिसर में सुरक्षा व्यवस्था पर भी ध्यान बढ़ाया जा सकता है। छात्रसंघ चुनाव के बाद किसी भी तरह के विवाद को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस और कॉलेज प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। अगर दोनों पक्षों की ओर से शिकायत दी जाती है तो उसके आधार पर पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकती है।
डीबीएस पीजी कॉलेज देहरादून के प्रमुख कॉलेजों में शामिल है और यहां छात्र राजनीति को लेकर पहले भी गतिविधियां देखने को मिली हैं। इस वर्ष छात्रसंघ चुनाव में ABVP और NSUI के बीच अध्यक्ष पद को लेकर मुकाबला रहा। परिणाम में NSUI के अभिनव कफलिया के अध्यक्ष चुने जाने की जानकारी सामने आई।
वहीं देहरादून के अन्य कॉलेजों में भी इस वर्ष छात्रसंघ चुनाव के दौरान विवाद और तनाव की घटनाएं सामने आई थीं। डीएवी पीजी कॉलेज में मतदान और मतगणना के दौरान NSUI और ABVP कार्यकर्ताओं के बीच अलग-अलग मौकों पर हंगामा हुआ था। मतपत्र की वैधता को लेकर विवाद के दौरान टेबल पलटने और पुलिस के हस्तक्षेप की जानकारी भी सामने आई थी।
ऐसे माहौल में डीबीएस कॉलेज में हुई ताजा मारपीट के बाद पुलिस के सामने स्थिति को शांत बनाए रखना चुनौती हो सकता है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पुलिस मौके पर पहुंच चुकी है और मामले की स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही है। घटना में कितने लोग शामिल थे, किसी को चोट लगी या नहीं और किसी पक्ष ने पुलिस को लिखित शिकायत दी है या नहीं, इन बिंदुओं पर आगे की जानकारी का इंतजार है।
कॉलेज प्रशासन की ओर से भी मामले को लेकर आगे कोई आधिकारिक जानकारी सामने आने की स्थिति में विवाद की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। यदि CCTV फुटेज उपलब्ध है तो घटना के क्रम को समझने में वह भी पुलिस के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। फिलहाल केवल सामने आई प्रारंभिक सूचना के आधार पर इतना कहा जा सकता है कि ABVP और NSUI कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट हुई और पुलिस को मौके पर पहुंचकर हस्तक्षेप करना पड़ा।
घटना के बाद कॉलेज में छात्रों के बीच भी चर्चा शुरू हो गई है। छात्र संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं के बीच विवाद को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ सकते हैं, लेकिन पुलिस जांच पूरी होने से पहले किसी एक पक्ष को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। दोनों पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही विवाद की वास्तविक वजह सामने आएगी।
फिलहाल पुलिस की मौजूदगी में स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास जारी है। मामले में आगे शिकायत दर्ज होने, CCTV या प्रत्यक्षदर्शियों के बयान सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई स्पष्ट हो सकती है। कॉलेज प्रशासन और पुलिस की कोशिश होगी कि विवाद को आगे बढ़ने से रोका जाए और परिसर में सामान्य शैक्षणिक माहौल बना रहे।











