दिल्ली में अंतरराज्यीय नकली नोट गिरोह का खुलासा, 2 आरोपी गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने अंतरराज्यीय नकली नोट नेटवर्क का पर्दाफाश कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। 500 रुपये के 187 नकली नोट बरामद हुए, जिनकी कीमत ₹93,500 है।

दिल्ली पुलिस ने अंतरराज्यीय नकली नोट नेटवर्क का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरोह के तार बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से जुड़े हैं। आरोपियों के पास से ₹93,500 के 187 नकली नोट बरामद हुए।

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पुलिस ने कथित अंतरराज्यीय नकली नोट नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। शाहदरा जिले की गांधी नगर थाना पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क के तार दिल्ली के अलावा बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल तक जुड़े होने की जानकारी सामने आई है।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 500 रुपये मूल्य के कुल 187 नकली नोट बरामद किए हैं। इनकी कुल अंकित कीमत ₹93,500 बताई गई है। पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों और नकली नोटों के कथित स्रोत का पता लगाने में जुटी है।

बैंक में जमा रकम से शुरू हुई जांच

इस मामले की जांच एक कारोबारी द्वारा बैंक में जमा कराई गई नकदी की जांच से शुरू हुई। पुलिस के अनुसार, गांधी नगर के एक स्थानीय कारोबारी ने बैंक में ₹90,000 नकद जमा किए थे।

बैंक में नोटों की गिनती और सत्यापन के दौरान 500 रुपये के 18 नोट संदिग्ध पाए गए। जांच में इन नोटों को नकली पाया गया। इन 18 नोटों की कुल कीमत ₹9,000 थी।

बैंक की ओर से सूचना दिए जाने के बाद गांधी नगर थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया और नकली नोटों के स्रोत का पता लगाने के लिए जांच शुरू की।

CCTV फुटेज से मिला पहला सुराग

पुलिस ने जांच के दौरान बैंक और आसपास के इलाकों के CCTV फुटेज खंगाले। इसी तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस को एक संदिग्ध के बारे में जानकारी मिली।

पुलिस ने मोहम्मद दानिश नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया। पूछताछ में पुलिस के अनुसार, दानिश कथित तौर पर स्थानीय दुकानों पर छोटी-मोटी खरीदारी के लिए नकली नोटों का इस्तेमाल करता था।

इस तरीके का उद्देश्य नकली नोट बाजार में चलाकर उसके बदले वास्तविक सामान या बाकी रकम के रूप में वैध मुद्रा हासिल करना बताया गया है।

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दानिश को नकली नोट किससे मिले और उसके जरिए कितने नोट बाजार में पहुंचाए गए।

पूछताछ में झारखंड के चतरा का कनेक्शन

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान दानिश ने नकली नोटों की आपूर्ति को झारखंड के चतरा से जोड़ने वाली जानकारी दी।

इसके बाद दिल्ली पुलिस की टीम ने जांच का दायरा दिल्ली से बाहर बढ़ाया। पुलिस बिहार के बोधगया पहुंची और स्थानीय पुलिस के सहयोग से वहां कार्रवाई की।

इसी कार्रवाई के दौरान मेराज उर्फ गुड्डू नाम के दूसरे आरोपी को गिरफ्तार किया गया।

मेराज के बैग से 169 नकली नोट मिलने का दावा

पुलिस के अनुसार, मेराज के बैग की तलाशी के दौरान 500 रुपये के 169 नकली नोट बरामद हुए। इन नोटों की कुल अंकित कीमत ₹84,500 बताई गई है।

पहले मामले में बैंक से मिले 18 नकली नोट और दूसरे आरोपी से बरामद 169 नोटों को मिलाकर पुलिस ने कुल 187 नकली नोट जब्त किए हैं। इनकी कुल अंकित कीमत ₹93,500 है।

पुलिस के अनुसार, मेराज का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड भी रहा है। हालांकि, उसके पिछले मामलों की प्रकृति और वर्तमान मामले से उनका संबंध पुलिस की जांच का विषय है।

मालदा तक जुड़े नेटवर्क के तार

पूछताछ के दौरान पुलिस को इस कथित नेटवर्क के पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के कालियाचक इलाके तक जुड़े होने की जानकारी मिली है।

मालदा का कालियाचक क्षेत्र पहले भी नकली मुद्रा से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई के दायरे में रहा है। हालांकि, मौजूदा मामले में नकली नोटों की वास्तविक छपाई कहां हुई, इसकी पुष्टि अभी जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों ने कथित तौर पर ‘मामा उर्फ छोटू’ और ‘भैया जी’ नाम के कुछ सप्लायरों के बारे में जानकारी दी है।

इन नामों की पहचान और उनकी भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि अभी पुलिस जांच के स्तर पर होनी बाकी है।

पुलिस को प्रिंटिंग स्रोत की तलाश

जांच का अगला महत्वपूर्ण चरण नकली नोटों के कथित प्रिंटिंग स्रोत तक पहुंचना है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नकली नोट कहां तैयार किए जाते थे और उन्हें दिल्ली तथा अन्य राज्यों तक कैसे पहुंचाया जाता था।

इसके साथ ही जांचकर्ता यह भी पता लगा रहे हैं कि गिरोह में कितने लोग शामिल हैं और नेटवर्क के सदस्य किन राज्यों में सक्रिय थे।

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से मोबाइल फोन और खरीदारी से संबंधित कुछ बिल भी जब्त किए हैं। इन डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच से कथित नेटवर्क की गतिविधियों और संपर्कों के बारे में अतिरिक्त जानकारी मिलने की संभावना है।

दिल्ली से कई राज्यों तक फैला नेटवर्क

पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, यह मामला केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। जांच में बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के साथ संभावित कनेक्शन सामने आए हैं।

ऐसे मामलों में नकली नोटों की आपूर्ति कई चरणों में होने की संभावना रहती है। स्थानीय स्तर पर नोट चलाने वाले लोगों से लेकर कथित सप्लायरों और स्रोत तक की भूमिका अलग-अलग हो सकती है।

हालांकि, इस मामले में नेटवर्क की पूरी संरचना और प्रत्येक आरोपी की भूमिका अभी पुलिस जांच का हिस्सा है। इसलिए फिलहाल सामने आई जानकारियों को पुलिस की जांच में सामने आए दावों के रूप में देखा जाना चाहिए।

बैंकिंग सिस्टम से मिला अहम सुराग

इस मामले में बैंक में जमा की गई नकदी ने जांच एजेंसियों को शुरुआती सुराग दिया। सामान्य बैंकिंग प्रक्रिया के दौरान नोटों की जांच में 18 नकली नोटों की पहचान हुई और इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।

इसके बाद CCTV फुटेज और तकनीकी जांच के माध्यम से पुलिस संदिग्ध तक पहुंची। पूछताछ से मिली जानकारी के आधार पर जांच दिल्ली से बाहर बिहार और झारखंड तक पहुंची।

यह घटनाक्रम दिखाता है कि नकली मुद्रा के मामलों में बैंकिंग प्रणाली में होने वाली नियमित जांच और संदिग्ध लेन-देन की रिपोर्टिंग जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण शुरुआती संकेत दे सकती है।

गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी

दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब उनसे कथित नेटवर्क के बारे में पूछताछ कर रही है। जांचकर्ताओं का फोकस नकली नोटों की आपूर्ति श्रृंखला, कथित सप्लायरों, वितरण के तरीकों और अन्य संभावित आरोपियों की पहचान पर है।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि बरामद 187 नोटों के अलावा कितनी नकली मुद्रा पहले बाजार में पहुंचाई जा चुकी हो सकती है।

इसके लिए आरोपियों के मोबाइल फोन, संपर्कों, खरीदारी के बिल और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

आगे क्या होगी कार्रवाई?

पुलिस की जांच में यदि कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान होती है, तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही नकली नोटों के कथित स्रोत का पता लगाना जांच का प्रमुख लक्ष्य बना हुआ है।

फिलहाल पुलिस ने दो प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया है और ₹93,500 अंकित मूल्य के 500 रुपये के 187 नकली नोट बरामद किए हैं।

मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होगा कि कथित सिंडिकेट का संचालन किस स्तर पर हो रहा था, नकली नोटों की आपूर्ति का वास्तविक स्रोत कहां था और इसमें कितने लोग शामिल थे। पुलिस की अंतिम जांच और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।

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