Delhi Metro ने रचा इतिहास, हांगकांग-पेरिस-न्यूयॉर्क को पीछे छोड़कर दुनिया में बनाया नया रिकॉर्ड

Delhi Metro ने हांगकांग, पेरिस और न्यूयॉर्क जैसे बड़े मेट्रो नेटवर्क को पीछे छोड़कर नया रिकॉर्ड बनाया है। दिल्ली मेट्रो की इस उपलब्धि ने भारत का गौरव बढ़ाया।

दिल्ली-एनसीआर की लाइफलाइन बन चुकी दिल्ली मेट्रो ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। ट्रेन संचालन में सटीकता, समय की पाबंदी और भरोसेमंद सेवा के मामले में दिल्ली मेट्रो ने दुनिया की कई प्रमुख मेट्रो प्रणालियों को पीछे छोड़ दिया है।

बिजनेस न्यूज़: दिल्ली-एनसीआर की लाइफलाइन कही जाने वाली दिल्ली मेट्रो ने परिचालन की सटीकता और समय की पाबंदी के मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। दुनिया की कई प्रमुख मेट्रो प्रणालियों के बीच दिल्ली मेट्रो का प्रदर्शन भारत के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। कम्युनिटी ऑफ मेट्रो (COMET) के तुलनात्मक सर्वे में दिल्ली मेट्रो को ट्रेन संचालन की विश्वसनीयता और समयबद्धता के मामले में शीर्ष प्रदर्शन करने वाली प्रणालियों में जगह मिली है।

यह उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है जब दुनिया के बड़े शहरों में सार्वजनिक परिवहन को तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। दिल्ली मेट्रो का विस्तृत नेटवर्क रोजाना बड़ी संख्या में यात्रियों को शहर और एनसीआर के अलग-अलग हिस्सों से जोड़ता है।

45 प्रमुख मेट्रो प्रणालियों से तुलना

COMET के तुलनात्मक अध्ययन में दुनिया की करीब 45 प्रमुख मेट्रो प्रणालियों के परिचालन प्रदर्शन का आकलन किया गया। इसमें ट्रेन की समयबद्धता और तय समय के मुताबिक परिचालन को प्रमुख मानकों में शामिल किया गया। दिल्ली मेट्रो की खासियत यह है कि यहां ट्रेन के निर्धारित गंतव्य तक पहुंचने में 59 सेकंड से अधिक की देरी को भी विलंब माना जाता है। 

दूसरी ओर, कई अंतरराष्ट्रीय मेट्रो प्रणालियां दो से पांच मिनट तक की देरी को स्वीकार्य सीमा में रखती हैं। ऐसे सख्त मानकों के बावजूद दिल्ली मेट्रो का प्रदर्शन इसकी परिचालन क्षमता को दर्शाता है।

23 साल में समयबद्धता में बड़ा सुधार

दिल्ली मेट्रो ने वर्ष 2003 में अपनी यात्रा शुरू की थी। शुरुआती दौर में इसकी समयबद्धता करीब 98.27 प्रतिशत थी। समय के साथ तकनीक, सिग्नलिंग सिस्टम और संचालन व्यवस्था में सुधार के चलते यह आंकड़ा बढ़कर करीब 99.95 प्रतिशत तक पहुंच गया है। दिल्ली-एनसीआर में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार भी तेजी से हुआ है। मौजूदा नेटवर्क करीब 416.5 किलोमीटर तक पहुंच चुका है। 

यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए कई व्यस्त कॉरिडोर पर ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी भी बढ़ाई गई है। जहां शुरुआती वर्षों में ट्रेनों के बीच अंतराल लगभग सात मिनट था, वहीं कुछ व्यस्त हिस्सों में यह घटकर करीब 2.18 मिनट तक पहुंच गया है।

ड्राइवरलेस मेट्रो से बढ़ी तकनीकी क्षमता

दिल्ली मेट्रो का फोकस सिर्फ समय पर ट्रेन चलाने तक सीमित नहीं है। तकनीकी आधुनिकीकरण के तहत नेटवर्क के एक हिस्से पर ऑटोमैटिक ट्रेन ऑपरेशन की सुविधा भी शुरू की गई है। पिंक और मजेंटा लाइन समेत करीब 29 प्रतिशत नेटवर्क पर ड्राइवरलेस या ऑटोमैटिक ट्रेन संचालन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। 

करीब 71.55 किलोमीटर लंबी पिंक लाइन दुनिया की प्रमुख चालक रहित मेट्रो लाइनों में शामिल है। इस तकनीक से परिचालन की सटीकता बढ़ाने और ट्रेनों के बीच अंतराल को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

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