धनबाद के निरसा प्रखंड स्थित बेलटिकरी गांव में आज भी पुल और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। पुल नहीं होने से ग्रामीणों को 10 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर करना पड़ता है, जबकि बरसात में बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है।
धनबाद: आजादी के दशकों बाद भी धनबाद जिले के निरसा प्रखंड का बेलटिकरी गांव बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। गांव में पुल और चापाकल नहीं होने से ग्रामीणों को आवागमन, पेयजल और बच्चों की शिक्षा जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में हालात और भी चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं।
पुल नहीं होने से बढ़ी मुश्किलें, 4 किमी की जगह तय करना पड़ता है 10 किमी का सफर
धनबाद जिले के निरसा प्रखंड के बेलटिकरी गांव में आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है। सोनबाद और खुशरी पंचायत के अंतर्गत आने वाले इस गांव के लोगों को प्रखंड मुख्यालय तक पहुंचने के लिए सामान्यतः चार किलोमीटर की दूरी तय करनी चाहिए, लेकिन जोरिया पर पुल नहीं होने के कारण उन्हें लगभग 10 किलोमीटर का लंबा रास्ता अपनाना पड़ता है।

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से पुल निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। इसका असर केवल आवागमन तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं, रोजगार और रोजमर्रा की जरूरतों पर भी पड़ता है। आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भी काफी परेशानी होती है।
बारिश में बच्चों की पढ़ाई होती है प्रभावित
बरसात के मौसम में जोरिया में पानी का स्तर बढ़ जाने से गांव के बच्चों के लिए स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है। बेलटिकरी के अधिकांश छात्र मध्य विद्यालय उदयपुर में पढ़ाई करते हैं, लेकिन बारिश के दौरान उन्हें सुरक्षित रास्ता नहीं मिल पाता।
ऐसे समय में बच्चों को करीब पांच किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। कई परिवारों का कहना है कि छोटे बच्चों के लिए यह सफर संभव नहीं होता, जिसके कारण वे कई दिनों तक स्कूल नहीं जा पाते। ग्रामीणों का मानना है कि यदि यहां पुल का निर्माण हो जाए, तो बच्चों की शिक्षा पर पड़ने वाला यह असर काफी हद तक समाप्त हो जाएगा।
पेयजल के लिए आज भी प्राकृतिक स्रोतों पर निर्भर गांव
बेलटिकरी गांव की एक और बड़ी समस्या पेयजल की है। ग्रामीणों के अनुसार, दो पंचायतों के अधीन होने के बावजूद गांव में आज तक एक भी सरकारी चापाकल स्थापित नहीं किया गया है। ऐसे में लोगों को पीने का पानी प्राकृतिक जलस्रोत दाढ़ी-चुआं से लाना पड़ता है।
बरसात के दौरान यह समस्या और गंभीर हो जाती है, क्योंकि जलस्रोतों की गुणवत्ता और पहुंच दोनों प्रभावित होती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था नहीं होने से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ जाते हैं। उन्होंने प्रशासन से गांव में चापाकल लगाने और स्थायी पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
खुशरी पंचायत के मुखिया सपन गोराई ने बताया कि जोरिया पर पुल निर्माण के लिए संबंधित अधिकारियों को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। उनका कहना है कि पुल बनने से न केवल आवागमन आसान होगा, बल्कि बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और स्थानीय लोगों के रोजगार के अवसर भी बेहतर होंगे।
ग्रामीणों को अब उम्मीद है कि प्रशासन उनकी वर्षों पुरानी मांगों पर जल्द निर्णय लेगा, ताकि बेलटिकरी गांव भी बुनियादी सुविधाओं से जुड़ सके और लोगों को रोजमर्रा की परेशानियों से राहत मिल सके।











