हिमाचल में भारी बारिश का कहर: धर्मशाला बस अड्डे के पास भूस्खलन, बहुमंजिला इमारतें और कांगड़ा कला संग्रहालय खतरे में

धर्मशाला बस अड्डे के पास भारी बारिश से भूस्खलन हुआ। मलबा और पेड़ गिरने से बहुमंजिला इमारतों व कांगड़ा कला संग्रहालय पर खतरा बढ़ा।

हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के बीच धर्मशाला बस अड्डे के पास भूस्खलन हुआ, जिससे भारी मात्रा में मलबा और एक पेड़ नीचे आ गिरा। घटना के बाद आसपास की बहुमंजिला इमारतों और कांगड़ा कला संग्रहालय की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश में जारी भारी बारिश के बीच बुधवार सुबह धर्मशाला बस अड्डे के समीप बड़ा भूस्खलन हुआ। पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और एक विशाल पेड़ नीचे गिर गया, जिससे आसपास के बहुमंजिला भवनों और कांगड़ा कला संग्रहालय पर खतरा मंडराने लगा। राहत की बात यह रही कि घटना के समय क्षेत्र में कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

भूस्खलन से बस अड्डे के आसपास बढ़ा खतरा

लगातार हो रही बारिश के कारण धर्मशाला बस अड्डे के पास स्थित पहाड़ी का एक हिस्सा बुधवार सुबह अचानक खिसक गया। भूस्खलन के चलते भारी मात्रा में मिट्टी और पत्थर नीचे आ गए तथा एक बड़ा पेड़ भी गिर पड़ा। प्रशासन ने पहले ही एहतियात के तौर पर इस हिस्से से वाहनों को हटा दिया था, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

हालांकि इस घटना ने बस अड्डे के आसपास रहने वाले लोगों और स्थानीय कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। क्षेत्र में कई बहुमंजिला भवन स्थित हैं, जिनकी सुरक्षा अब खतरे में बताई जा रही है। लगातार हो रही बारिश से पहाड़ी की स्थिति और अधिक कमजोर होने की आशंका जताई जा रही है।

सुरक्षा दीवार कमजोर, संग्रहालय और होटल भी जोखिम में

धर्मशाला बस अड्डे के निर्माण कार्य पर लंबे समय से काम चल रहा है, लेकिन यह अब तक पूरा नहीं हो पाया है। इसी बीच बस अड्डे से सटी सुरक्षा दीवार भी लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण कमजोर पड़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इसकी मजबूती पर काम नहीं किया गया तो दीवार गिरने का खतरा बढ़ सकता है।

भूस्खलन का असर केवल बस अड्डे तक सीमित नहीं है। इसके आसपास स्थित कांगड़ा कला संग्रहालय, निजी होटल और अन्य बहुमंजिला इमारतें भी संभावित जोखिम की जद में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बारिश के दौरान ढलानों की स्थिरता बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक उपाय अपनाना आवश्यक है, ताकि भविष्य में बड़े नुकसान से बचा जा सके।

प्रशासन ने शुरू किए राहत कार्य, स्थायी समाधान की मांग

घटना के बाद प्रशासन ने तत्काल बचाव और सुरक्षा उपाय शुरू कर दिए हैं। फिलहाल पहाड़ी ढलान पर तिरपाल बिछाए जा रहे हैं, ताकि वर्षा का पानी सीधे मिट्टी में न समाए और आगे होने वाले भूस्खलन के जोखिम को कम किया जा सके।

हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल अस्थायी उपाय है। उनका मानना है कि क्षेत्र में मजबूत रिटेनिंग वॉल (सुरक्षा दीवार), ढलान का वैज्ञानिक उपचार और जल निकासी की प्रभावी व्यवस्था की जानी चाहिए। साथ ही धर्मशाला बस अड्डे के निर्माण कार्य को भी जल्द पूरा करने की मांग उठाई जा रही है।

बुधवार की घटना के बाद एक बार फिर धर्मशाला में भूस्खलन की संवेदनशीलता और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि संभावित खतरे को देखते हुए दीर्घकालिक समाधान लागू किया जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके। प्रशासन भी क्षेत्र की लगातार निगरानी कर रहा है और मौसम की स्थिति के अनुसार आवश्यक कदम उठाने की बात कह रहा है।

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