दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टे होटल में भीषण आग से 21 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 11 विदेशी नागरिक शामिल हैं। पुलिस ने होटल मालिक को गिरफ्तार कर लिया है और फायर सेफ्टी नियमों की गंभीर लापरवाही सामने आई है।
नई दिल्ली: दिल्ली के दक्षिणी हिस्से में स्थित मालवीय नगर क्षेत्र के एक होटल में बुधवार सुबह भीषण आग लगने से कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 11 विदेशी नागरिक शामिल हैं। यह दर्दनाक हादसा उस समय हुआ जब कई मेहमान होटल में मौजूद थे और आग तेजी से पूरी इमारत में फैल गई।
अधिकारियों के अनुसार, फायर ब्रिगेड और पुलिस ने संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर कुल 58 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और विभिन्न अस्पतालों में उनका इलाज जारी है।
अवैध निर्माण और सुरक्षा खामियों का खुलासा
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस होटल में आग लगी, उसे केवल 6 कमरों की अनुमति दी गई थी, लेकिन इसमें अवैध रूप से 25 से अधिक कमरे बनाए गए थे और इमारत को 5 मंजिल तक विस्तारित कर दिया गया था।
इसके अलावा, होटल के पास फायर सेफ्टी नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) भी नहीं था। जांच में यह भी पाया गया कि इमारत में केवल एक ही प्रवेश और निकास मार्ग था, जिससे आग लगने के बाद लोगों के बाहर निकलने का कोई वैकल्पिक रास्ता नहीं बचा।
आग लगने की वजह और तेजी से फैलाव
प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, आग सुबह करीब 8:30 बजे लगी और कुछ ही मिनटों में पूरे होटल में धुआं फैल गया। कई लोग ऊपरी मंजिलों पर फंस गए और उन्हें बाहर निकलने का अवसर नहीं मिला।
विशेषज्ञों के अनुसार, इमारत में वेंटिलेशन की कमी, बंद खिड़कियां और सीमित निकास मार्ग ने स्थिति को और भयावह बना दिया। धुआं तेजी से ऊपर की मंजिलों तक पहुंच गया, जिससे लोग बेहोश होकर फंस गए।
11 विदेशी नागरिकों सहित 21 की मौत
इस हादसे में जान गंवाने वालों में 10 भारतीय और 11 विदेशी नागरिक शामिल हैं। विदेशी मृतकों में 9 अफ्रीकी देशों और 2 तुर्कमेनिस्तान के नागरिक बताए जा रहे हैं।
मृतकों की पहचान के लिए डीएनए परीक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है क्योंकि कई शव बुरी तरह जल चुके हैं।
होटल मालिक गिरफ्तार, गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज
पुलिस ने होटल मालिक लवकेश बजाज को गिरफ्तार कर लिया है। उनके खिलाफ गैर इरादतन हत्या (Culpable Homicide Not Amounting to Murder) का मामला दर्ज किया गया है।
पूछताछ के दौरान होटल मालिक ने दावा किया कि होटल के संचालन और बदलावों का काम वह स्वयं नहीं देखता था और यह जिम्मेदारी अन्य लोगों को दी गई थी। हालांकि, पुलिस इस बयान की पुष्टि कर रही है और पूरे प्रबंधन तंत्र की जांच की जा रही है।

सीए परिवार की त्रासदी: फोन कॉल में आखिरी शब्द
इस हादसे में गुरुग्राम के चार्टर्ड अकाउंटेंट विवेक अग्रवाल और उनके पूरे परिवार की भी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि आग के बीच उन्होंने एक रिश्तेदार को फोन कर कहा था कि “शायद हम बच नहीं पाएंगे।”
इस परिवार में कुल 8 लोगों की मौत हुई, जिसमें विवेक, उनकी पत्नी, दो बेटियां, मां, अन्य रिश्तेदार शामिल हैं। यह घटना पूरे देश में भावनात्मक चर्चा का विषय बन गई है।
रेस्क्यू ऑपरेशन: स्थानीय लोगों ने भी बचाई जानें
आग लगने के बाद स्थानीय लोग भी बचाव कार्य में जुट गए। कई लोगों ने होटल के बाहर गद्दे और कंबल बिछाकर ऊंचाई से कूदने वाले लोगों की जान बचाने की कोशिश की।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ लोग खिड़कियों और बालकनी से मदद के लिए पुकार रहे थे। कई घायल लोगों को स्थानीय लोगों और पुलिस ने तुरंत अस्पताल पहुंचाया।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन खामियों ने मिलकर इमारत को “डेथ ट्रैप” (मौत का जाल) बना दिया।
बेसमेंट में फंसे लोग, ग्रिल काटकर बचाया गया
रिपोर्ट्स के अनुसार, कई लोग बेसमेंट में फंस गए थे। दमकलकर्मियों को लोहे की ग्रिल काटकर लोगों को बाहर निकालना पड़ा, जिसमें काफी समय लग गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर निकासी व्यवस्था सही होती तो कई जानें बचाई जा सकती थीं।
राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
हादसे के बाद प्रशासन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। दिल्ली हाई कोर्ट में पहले से ही यह मुद्दा लंबित था कि राजधानी में बड़ी संख्या में होटल और गेस्ट हाउस बिना फायर NOC के संचालित हो रहे हैं।
राजनीतिक नेताओं ने इस घटना को “प्रशासनिक लापरवाही” का गंभीर उदाहरण बताया है और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
अस्पतालों में अफरा-तफरी, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
घायलों को AIIMS, मैक्स और अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। अस्पतालों में परिजनों की भारी भीड़ है, जो अपने प्रियजनों की तलाश में परेशान नजर आ रहे हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, कई मरीज गंभीर हालत में आईसीयू में भर्ती हैं और कुछ वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं।










