दिल्ली में राष्ट्रीय लोक अदालत (National Lok Adalat) आयोजित की जा रही है। यह आयोजन 10 जनवरी 2026 को राजधानी के 7 प्रमुख कोर्ट कॉम्प्लेक्स में होगा। अगर आपके पास ट्रैफिक चालान है या कोई लंबित मामला निपटारा चाहता है, तो यह आपके लिए सुनहरा अवसर है।
नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में राष्ट्रीय लोक अदालत लगने जा रही है। इसके माध्यम से ट्रैफिक चालान या अन्य छोटे-मोटे मामलों का निपटारा आसानी से किया जा सकेगा। यह राष्ट्रीय लोक अदालत 10 जनवरी 2026 को दिल्ली के 7 कोर्ट कॉम्प्लेक्स में आयोजित होगी, जिनमें पटियाला हाउस, कड़कड़डूमा, तीस हजारी, साकेत, रोहिणी, द्वारका और राउज एवेन्यू कोर्ट कॉम्प्लेक्स शामिल हैं।
यह पहल दिल्ली स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के सहयोग से की जा रही है। अगर आप ट्रैफिक चालान का निपटारा करवाना चाहते हैं, तो ध्यान रहे कि नोटिस और चालान का प्रिंटआउट खुद लेकर जाना अनिवार्य है, क्योंकि कोर्ट कॉम्प्लेक्स में प्रिंटआउट की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है।
लोक अदालत लगने वाले स्थान
राष्ट्रीय लोक अदालत दिल्ली के निम्नलिखित कोर्ट कॉम्प्लेक्स में आयोजित की जाएगी:
- पटियाला हाउस कोर्ट
- कड़कड़डूमा कोर्ट
- तीस हजारी कोर्ट
- साकेत कोर्ट
- रोहिणी कोर्ट
- द्वारका कोर्ट
- राउज एवेन्यू कोर्ट
दिल्ली स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस मिलकर इस विशेष अदालत का आयोजन कर रही हैं। यदि आप अपने ट्रैफिक चालान का निपटारा करना चाहते हैं, तो यह आवश्यक है कि आप चालान और नोटिस का प्रिंटआउट अपने साथ लेकर जाएं। कोर्ट कॉम्प्लेक्स में प्रिंट आउट की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी। इससे सुनिश्चित होगा कि आपका निपटारा तेज़ी से हो सके।
राष्ट्रीय लोक अदालत क्या है?

राष्ट्रीय लोक अदालत, जिसे जनता की अदालत भी कहा जाता है, लोगों के मामलों का त्वरित निपटारा करने का एक मंच है। इसे राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के तहत विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के अंतर्गत आयोजित किया जाता है। इस अदालत का मुख्य उद्देश्य है:
- लंबित मामलों का बोझ कम करना
- लोगों के विवादों का तेज़ निपटारा
- न्याय का सभी वर्गों तक आसान और त्वरित प्रवाह
- राष्ट्रीय लोक अदालत में निपटाए जाने वाले मामले
राष्ट्रीय लोक अदालत में आम तौर पर कंपाउंडेबल मामले और प्री-लिटिगेशन (मुकदमा पूर्व) मामले शामिल किए जाते हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- मोटर दुर्घटना दावे
- बैंक रिकवरी और वित्तीय दावे
- श्रम विवाद
- वैवाहिक मामले (सहमति आधारित)
- संपत्ति विवाद
- उपभोक्ता शिकायतें
गैर-कंपाउंडेबल मामले, जैसे तलाक और गंभीर अपराध, लोक अदालत में शामिल नहीं होते।
राष्ट्रीय लोक अदालत की सबसे बड़ी खासियत है कि यह तेज, आसान और कम खर्चीली न्याय व्यवस्था प्रदान करती है। यहाँ मामलों का निपटारा दोनों पक्षों की सहमति से होता है और कोर्ट फीस नहीं लगती। इसके अन्य लाभ:
- तेज न्याय – लंबित मामलों का समाधान तुरंत हो जाता है
- कम खर्च – महंगी कानूनी फीस या शुल्क नहीं
- अनौपचारिक वातावरण – अदालत में लंबी औपचारिक प्रक्रियाओं से बचाव
- अदालतों के बैकलॉग में कमी – न्यायपालिका का बोझ कम होता है
दिल्ली जैसे बड़े शहरों में ट्रैफिक चालान, बैंक दावे और संपत्ति विवाद आम हैं। इन मामलों में लंबितियों और कोर्ट की प्रक्रिया में देरी अक्सर लोगों को परेशान करती है। राष्ट्रीय लोक अदालत इस समस्या का समाधान पेश करती है और लोगों को जल्द न्याय उपलब्ध कराती है।











