दिल्ली में SIR प्रक्रिया पर घिरी चुनाव व्यवस्था, कांग्रेस ने चुनाव आयोग से मांगा स्पष्टीकरण

दिल्ली में मतदाता सूची पुनरीक्षण पर कांग्रेस ने सवाल उठाए। Election Commission से पारदर्शिता और प्रक्रिया स्पष्ट करने की मांग, BLA की भूमिका पर भी विवाद।

दिल्ली में मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर कांग्रेस ने EC से पारदर्शिता और प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने BLA की भूमिका, 2002 सूची के उपयोग और सत्यापन व्यवस्था पर चिंता जताई है।

New Delhi: दिल्ली में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर कांग्रेस ने गंभीर चिंताएं जताई हैं। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी (DPCC) ने इस प्रक्रिया की पारदर्शिता और वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी (Chief Electoral Officer – CEO) से तत्काल स्पष्टीकरण मांगा है। पार्टी का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में कई ऐसे बिंदु हैं जो न केवल भ्रम पैदा करते हैं बल्कि भविष्य में विवाद की स्थिति भी बना सकते हैं।

बूथ लेवल एजेंट की भूमिका पर विवाद

कांग्रेस ने अपने पत्र में सबसे बड़ा मुद्दा बूथ लेवल एजेंट (Booth Level Agents – BLA) की भूमिका को लेकर उठाया है। पार्टी के अनुसार, वर्तमान प्रक्रिया में बीएलए को प्रतिदिन प्रत्येक बूथ से लगभग 50 भरे हुए गणना प्रपत्र (Enumeration Forms) एकत्र करने और उनकी सत्यता प्रमाणित करने के लिए कहा जा रहा है। कांग्रेस का मानना है कि यह व्यवस्था न तो व्यावहारिक है और न ही कानूनी रूप से उचित।

दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने स्पष्ट कहा कि मतदाता आवेदन विवरणों का सत्यापन करना निर्वाचन अधिकारियों की जिम्मेदारी है। इसमें बूथ लेवल अधिकारी (BLO), सहायक मतदाता पंजीकरण अधिकारी (AERO) और मतदाता पंजीकरण अधिकारी (ERO) शामिल होते हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से यह कार्य करवाना जिम्मेदारियों का गलत हस्तांतरण है।

वैधानिक जिम्मेदारियों पर उठे सवाल

कांग्रेस ने यह भी कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया एक संवैधानिक दायित्व है और इसकी निष्पक्षता बनाए रखना चुनाव आयोग (Election Commission) की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि राजनीतिक दलों के एजेंटों से सत्यापन कराया जाता है, तो इससे निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।

पार्टी का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था से भविष्य में अनावश्यक विवाद उत्पन्न हो सकते हैं। यदि किसी मतदाता के विवरण में त्रुटि पाई जाती है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, यह स्पष्ट नहीं है। इस तरह की अस्पष्टता चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है।

पारदर्शिता की कमी पर चिंता

दिल्ली में SIR प्रक्रिया पर घिरी चुनाव व्यवस्था, कांग्रेस ने चुनाव आयोग से मांगा स्पष्टीकरण

कांग्रेस ने अपने पत्र में पारदर्शिता (Transparency) को लेकर भी चिंता जताई है। पार्टी का कहना है कि पूरी प्रक्रिया में स्पष्ट दिशा-निर्देश और सार्वजनिक जानकारी की कमी है। मतदाता सूची पुनरीक्षण जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में हर कदम पारदर्शी होना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की शंका न रहे।

पार्टी ने मांग की है कि सभी प्रक्रियाओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाए और संबंधित दस्तावेज सभी हितधारकों को समय पर उपलब्ध कराए जाएं। इससे न केवल प्रक्रिया आसान होगी बल्कि जनता का विश्वास भी मजबूत होगा।

2002 की मतदाता सूची के उपयोग पर आपत्ति

कांग्रेस ने 2002 की मतदाता सूची को आधार दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि 2002 के बाद परिसीमन (Delimitation) हुआ है, जिससे निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं में बड़े बदलाव आए हैं।

देवेंद्र यादव ने कहा कि बिना उचित क्षेत्रवार मैपिंग (Mapping) के पुराने और वर्तमान निर्वाचन क्षेत्रों के बीच मतदाताओं का मिलान करना बेहद मुश्किल है। इससे कई वास्तविक मतदाताओं के नाम छूट सकते हैं या गलत तरीके से जोड़े जा सकते हैं।

डिजिटल और प्रिंट डेटा की मांग

कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मांग की है कि 2002 की मतदाता सूचियों को निर्वाचन क्षेत्रवार विवरण के साथ उपलब्ध कराया जाए। यह जानकारी प्रिंट और डिजिटल दोनों प्रारूपों में दी जानी चाहिए ताकि सभी संबंधित पक्ष आसानी से इसका उपयोग कर सकें।

पार्टी का कहना है कि यदि यह डेटा उपलब्ध कराया जाता है, तो मतदाता सत्यापन प्रक्रिया अधिक सटीक और पारदर्शी हो सकती है। इससे किसी भी प्रकार की त्रुटि को समय रहते सुधारा जा सकता है।

फोटोयुक्त मतदाता सूची की जरूरत

कांग्रेस ने यह भी मांग की है कि अंतिम रूप दिए जाने के बाद फोटोयुक्त मतदाता सूची (Photo Electoral Roll) उपलब्ध कराई जाए। पार्टी के अनुसार, इससे मतदाता पहचान में आसानी होगी और फर्जीवाड़े की संभावना कम होगी।

फोटोयुक्त सूची न केवल मतदान प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाएगी बल्कि मतदाताओं का भरोसा भी बढ़ाएगी। यह एक जरूरी कदम माना जा रहा है, खासकर शहरी क्षेत्रों में जहां जनसंख्या घनत्व अधिक है।

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