दिल्ली सरकार ने 17 फरवरी 2026 को सरकारी स्कूलों में शिक्षा को आधुनिक बनाने के लिए सीएम श्री स्कूल्स प्रोजेक्ट की शुरुआत की। 75 स्कूलों में AI स्मार्ट क्लासेज, डिजिटल लाइब्रेरी, लैंग्वेज और स्किल लैब जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इस पहल से बच्चों का सीखने का अनुभव बेहतर होगा और भविष्य की तैयारी में मदद मिलेगी।
CM Shri Schools Project in Delhi: दिल्ली सरकार ने मंगलवार, 17 फरवरी 2026 को सरोजिनी नगर में सीएम श्री स्कूल का उद्घाटन किया, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता मौजूद थीं। इस पहल के तहत 75 सरकारी स्कूलों को AI स्मार्ट क्लासेज, डिजिटल लाइब्रेरी, लैंग्वेज लैब और करियर काउंसलिंग जैसी आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों को डिजिटल शिक्षा और जीवन कौशल में सक्षम बनाना है, ताकि वे भविष्य में प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर बन सकें।
स्मार्ट क्लासेज और तकनीकी सुविधाएं
सीएम श्री स्कूलों में सबसे बड़ी विशेषता AI आधारित स्मार्ट क्लासेज हैं। यहां इंटरएक्टिव बोर्ड और डिजिटल तकनीक की मदद से पढ़ाई को आसान और रोचक बनाया जाएगा।
बच्चों को करियर काउंसलिंग लैब, आईसीटी लैब और डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। मल्टी-सेक्टोरल स्किल लैब में विभिन्न स्किल्स की ट्रेनिंग दी जाएगी। लैंग्वेज लैब के जरिए विदेशी भाषाएं सीखने का अवसर मिलेगा। समावेशी शिक्षा के लिए विशेष संसाधन कक्ष भी बनाए गए हैं, ताकि हर बच्चा बराबरी से सीख सके।

बच्चों और शिक्षकों पर असर
सीएम श्री स्कूलों में शिक्षा का अनुभव पहले से बिल्कुल अलग होगा। एबीपी न्यूज की टीम ने सरोजिनी नगर स्कूल का दौरा किया, जहां शिक्षकों ने बताया कि स्मार्ट बोर्ड और डिजिटल टूल्स के जरिए पढ़ाई खेल जैसी लगने लगी है। बच्चों की उपस्थिति बढ़ी है और वे पढ़ाई को एंजॉय कर रहे हैं।
छात्रों को अब स्कूल में ही भविष्य की तैयारी का माहौल मिलेगा। डिजिटल पोर्टल के जरिए JEE, NEET और UPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी आसानी से हो सकेगी। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चे भी प्राइवेट स्कूल जैसी सुविधाएं प्राप्त करेंगे।
भविष्य की दिशा और संभावित असर
इस प्रोजेक्ट से दिल्ली के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आने की उम्मीद है। AI स्मार्ट क्लासेज और डिजिटल संसाधनों के इस्तेमाल से छात्रों का सीखने का तरीका बदल रहा है। भविष्य में इस मॉडल को और स्कूलों में भी लागू किया जा सकता है।
सरकार का लक्ष्य है कि तकनीक और शिक्षा के माध्यम से सभी छात्रों को समान अवसर मिले और डिजिटल इंडिया का सपना साकार हो। इसके साथ ही, विदेशी भाषाओं की पढ़ाई और करियर-काउंसलिंग जैसी सुविधाएं छात्रों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद करेंगी।












