दिल्ली विश्वविद्यालय और सेंट स्टीफंस कॉलेज में बढ़ा विवाद: प्रिंसिपल नियुक्ति प्रक्रिया पर DU ने जताई आपत्ति

नई दिल्ली : दिल्ली विश्वविद्यालय ने सेंट स्टीफंस कॉलेज में नए प्रिंसिपल की नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगाने को कहा है। युजीसी नियमों के पालन पर जोर दिया।

दिल्ली विश्वविद्यालय ने सेंट स्टीफंस कॉलेज में नई प्रिंसिपल नियुक्ति प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है। DU ने कॉलेज प्रशासन को UGC नियम 2018 के तहत चयन समिति की बैठक बुलाने और नियुक्ति प्रक्रिया फिलहाल आगे नहीं बढ़ाने का निर्देश दिया है।

नई दिल्ली: भारत के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में गिने जाने वाले St. Stephen's College में नए प्रिंसिपल की नियुक्ति को लेकर विवाद गहरा गया है। University of Delhi ने कॉलेज प्रशासन द्वारा शुरू की गई नियुक्ति प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए इसे फिलहाल आगे न बढ़ाने को कहा है।

विश्वविद्यालय ने कॉलेज प्रशासन को पत्र भेजकर स्पष्ट किया है कि नियुक्ति प्रक्रिया केवल University Grants Commission (UGC) विनियम 2018 के तहत गठित चयन समिति के माध्यम से ही पूरी की जानी चाहिए।

यह विवाद अब उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रशासनिक स्वायत्तता और नियामकीय अधिकारों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनता जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

सेंट स्टीफंस कॉलेज ने हाल ही में घोषणा की थी कि Susan Elias को कॉलेज की 14वीं और पहली महिला प्रिंसिपल नियुक्त किया जाएगा। कॉलेज प्रशासन के अनुसार वे 1 जून से पदभार संभालेंगी।

हालांकि, इस घोषणा के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने हस्तक्षेप करते हुए नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

विश्वविद्यालय ने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया UGC नियमों के अनुरूप पूरी नहीं की गई और चयन समिति की औपचारिक बैठक बुलाना आवश्यक है।

दिल्ली विश्वविद्यालय का आधिकारिक पत्र

दिल्ली विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार द्वारा कॉलेज प्रशासन को भेजे गए पत्र में कहा गया कि नए प्रिंसिपल की नियुक्ति प्रक्रिया को फिलहाल आगे न बढ़ाया जाए।

पत्र में विश्वविद्यालय ने आग्रह किया कि UGC विनियम 2018 के तहत गठित चयन समिति की बैठक आयोजित की जाए और उसी प्रक्रिया के अनुसार नियुक्ति की जाए।

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि सेंट स्टीफंस कॉलेज पूरी तरह केंद्र सरकार से वित्तपोषित संस्थान है और इसलिए उसे UGC तथा विश्वविद्यालय के नियमों का पालन करना अनिवार्य है।

UGC विनियम 2018 क्यों महत्वपूर्ण हैं?

UGC Regulations 2018 भारत के उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति के लिए निर्धारित नियमों का ढांचा है।

इन नियमों के अनुसार किसी कॉलेज के प्रिंसिपल की नियुक्ति के लिए एक चयन समिति का गठन किया जाता है, जिसमें विश्वविद्यालय, कॉलेज प्रशासन और विशेषज्ञ सदस्य शामिल होते हैं।

विश्वविद्यालय का कहना है कि यदि यह प्रक्रिया पूरी तरह नहीं अपनाई गई, तो नियुक्ति कानूनी और प्रशासनिक विवाद का कारण बन सकती है।

पहली महिला प्रिंसिपल बनने जा रही थीं सुसान एलियास

सेंट स्टीफंस कॉलेज द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार सुसान एलियास कॉलेज के इतिहास में पहली महिला प्रिंसिपल बनने जा रही थीं।

यह फैसला कॉलेज समुदाय के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा था क्योंकि सेंट स्टीफंस लंबे समय से भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शामिल रहा है।

लेकिन अब विश्वविद्यालय की आपत्ति के बाद इस नियुक्ति पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।

कॉलेज और विश्वविद्यालय के बीच बढ़ता तनाव

इस मुद्दे ने कॉलेज प्रशासन और दिल्ली विश्वविद्यालय के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक नियुक्ति विवाद नहीं, बल्कि कॉलेज की स्वायत्तता बनाम विश्वविद्यालय की नियामकीय शक्तियों का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

सेंट स्टीफंस कॉलेज ऐतिहासिक रूप से अपनी प्रशासनिक स्वतंत्रता को लेकर संवेदनशील रहा है। वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सभी संबद्ध संस्थान समान नियमों का पालन करें।

परिसर में चर्चा और प्रतिक्रिया

कॉलेज परिसर में इस मुद्दे को लेकर छात्रों, शिक्षकों और पूर्व छात्रों के बीच व्यापक चर्चा हो रही है।

कुछ लोग इसे विश्वविद्यालय की प्रशासनिक दखलअंदाजी मान रहे हैं, जबकि अन्य का कहना है कि सभी नियुक्तियां नियमानुसार होना जरूरी है ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

सोशल मीडिया और अकादमिक हलकों में भी यह मुद्दा तेजी से चर्चा में आ गया है।

दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष

दिल्ली विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार Vikas Gupta ने कहा कि चूंकि कॉलेज पूरी तरह केंद्र सरकार से वित्तपोषित है, इसलिए UGC नियमों का पालन अनिवार्य है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी संस्थान को निर्धारित प्रक्रियाओं से अलग जाकर नियुक्ति करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

विश्वविद्यालय का तर्क है कि नियामकीय प्रक्रियाएं उच्च शिक्षा संस्थानों की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं।

भारत के उच्च शिक्षा तंत्र पर व्यापक असर

यह विवाद केवल सेंट स्टीफंस कॉलेज तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर भारत के अन्य स्वायत्त और संबद्ध कॉलेजों पर भी पड़ सकता है।

देश के कई प्रतिष्ठित कॉलेज लंबे समय से अधिक प्रशासनिक स्वतंत्रता की मांग करते रहे हैं। दूसरी ओर विश्वविद्यालय और नियामक संस्थाएं यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि नियुक्तियों और प्रशासनिक फैसलों में एक समान मानक लागू हों।

इस विवाद से भविष्य में विश्वविद्यालयों और संबद्ध कॉलेजों के अधिकारों की सीमाओं पर नई बहस छिड़ सकती है।

सेंट स्टीफंस कॉलेज का ऐतिहासिक महत्व

1881 में स्थापित सेंट स्टीफंस कॉलेज भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में से एक है।

यह कॉलेज शिक्षा, राजनीति, साहित्य, पत्रकारिता और प्रशासन के क्षेत्र में कई प्रमुख व्यक्तित्व दे चुका है।

कॉलेज की प्रशासनिक नीतियां और नियुक्तियां अक्सर राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित करती रही हैं।

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