दुनिया के पहले प्रयोगात्मक ब्रेन ट्यूमर इलाज कराने वाले डॉक्टर रिचर्ड स्कोल्यर का निधन

ऑस्ट्रेलियाई डॉक्टर रिचर्ड स्कोल्यर का निधन, जिन्होंने ब्रेन ट्यूमर के लिए दुनिया का पहला प्रयोगात्मक इलाज कराया था। कैंसर रिसर्च में उनका योगदान अमूल्य रहा।

ऑस्ट्रेलिया के मशहूर डॉक्टर रिचर्ड स्कोल्यर का 59 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे ब्रेन ट्यूमर के लिए विश्व का पहला प्रयोगात्मक इलाज कराने वाले मरीज बने थे। कैंसर रिसर्च और मेलानोमा उपचार में उनका बड़ा योगदान रहा।

मेलबोर्न: ऑस्ट्रेलिया के जाने-माने डॉक्टर और मेलानोमा विशेषज्ञ डॉ. रिचर्ड स्कोलयर का निधन हो गया है। वे पिछले तीन वर्षों से एक आक्रामक ब्रेन ट्यूमर, ग्लियोब्लास्टोमा (Glioblastoma) से जूझ रहे थे। 59 वर्षीय स्कोलयर को उनकी साहसिक सोच और दुनिया के पहले प्रयोगात्मक उपचार के लिए वैश्विक पहचान मिली थी।

उनका निधन मेडिकल जगत के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने न केवल कैंसर अनुसंधान को नई दिशा दी, बल्कि खुद अपने इलाज को विज्ञान के एक प्रयोग में बदल दिया था।

दुनिया का पहला अनोखा ब्रेन ट्यूमर इलाज

डॉ. स्कोलयर ने अपने दोस्त और सहयोगी प्रोफेसर जॉर्जिना लॉन्ग के साथ मिलकर एक अनोखा और प्रयोगात्मक उपचार अपनाया था। यह इलाज उनके अपने शोध पर आधारित था, जो पहले त्वचा कैंसर (मेलानोमा) के इलाज में बेहद सफल रहा था।

इस प्रक्रिया के तहत उन्हें सर्जरी से पहले इम्यूनोथेरेपी दी गई, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर कोशिकाओं पर हमला करने के लिए सक्रिय करती है। इसके साथ ही उन्हें उनके ट्यूमर की विशेषताओं पर आधारित एक व्यक्तिगत वैक्सीन भी दी गई, जो उपचार को और प्रभावी बनाती है।

यह दुनिया में पहली बार था जब किसी ब्रेन कैंसर मरीज पर इस तरह का कॉम्बिनेशन इम्यूनोथेरेपी प्रयोग किया गया।

‘मैं चुपचाप मौत स्वीकार नहीं कर सकता था’

अपनी बीमारी के बाद दिए गए एक सार्वजनिक पत्र में स्कोलयर ने लिखा था कि वे इस स्थिति को बिना प्रयास के स्वीकार नहीं कर सकते थे। उन्होंने कहा था कि उनका उद्देश्य केवल जीवित रहना नहीं, बल्कि विज्ञान में योगदान देना भी था।

उन्होंने अपने शब्दों में यह स्पष्ट किया कि वे अपने अंतिम समय तक भी चिकित्सा अनुसंधान में योगदान देते रहना चाहते थे।

इलाज से मिली शुरुआती उम्मीदें और वैज्ञानिक सफलता

इस प्रयोगात्मक उपचार के बाद शुरुआती स्कैन में उनके शरीर में सकारात्मक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया देखी गई थी। हालांकि यह इलाज पूरी तरह सफल नहीं हो सका, लेकिन इसने भविष्य के लिए नई चिकित्सा संभावनाओं के द्वार खोल दिए।

उनके उपचार के परिणामों ने अमेरिका में एक शुरुआती चरण के क्लिनिकल ट्रायल को भी प्रेरित किया, जहां इस पद्धति को अन्य मरीजों पर परखा जा रहा है।

मेलानोमा अनुसंधान में क्रांतिकारी योगदान

डॉ. रिचर्ड स्कोलयर और प्रोफेसर जॉर्जिना लॉन्ग पिछले एक दशक से मेलानोमा (त्वचा कैंसर) के इलाज में क्रांतिकारी काम कर रहे थे। उनकी इम्यूनोथेरेपी पर आधारित रिसर्च ने उन्नत कैंसर मरीजों के जीवन को बदल दिया।

पहले जहां उन्नत मेलानोमा को लगभग असाध्य माना जाता था, वहीं अब आधे से अधिक मरीजों के ठीक होने की संभावना बताई जाती है, जो पहले 10 प्रतिशत से भी कम थी।

ऑस्ट्रेलिया में राष्ट्रीय सम्मान और पहचान

2024 में डॉ. स्कोलयर और प्रोफेसर लॉन्ग को संयुक्त रूप से “ऑस्ट्रेलियन ऑफ द ईयर” का सम्मान दिया गया था। उनके काम को चिकित्सा विज्ञान में एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना गया।

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें देश के सबसे प्रेरणादायक वैज्ञानिकों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि स्कोलयर ने अपने जीवन और संघर्ष को जनता के साथ साझा कर लाखों लोगों को प्रेरित किया।

परिवार और व्यक्तिगत जीवन

डॉ. स्कोलयर अपने पीछे अपनी पत्नी, जो स्वयं भी पैथोलॉजिस्ट हैं, और तीन बच्चों को छोड़ गए हैं। उन्होंने अपने अंतिम संदेशों में अपने परिवार के प्रति गहरा प्रेम और कृतज्ञता व्यक्त की।

उन्होंने लिखा कि उनके परिवार ने हर कठिन समय में उनका साथ दिया और वे उनके जीवन की सबसे बड़ी ताकत रहे।

चिकित्सा विज्ञान में “मानव प्रयोग” की मिसाल

डॉ. स्कोलयर का मामला चिकित्सा इतिहास में एक दुर्लभ उदाहरण माना जाता है, जहां एक डॉक्टर ने अपने ही शोध को अपने ऊपर लागू किया। यह निर्णय जोखिम भरा था, क्योंकि ग्लियोब्लास्टोमा जैसे ट्यूमर का इलाज अत्यंत कठिन माना जाता है और अधिकांश मरीज एक वर्ष से अधिक जीवित नहीं रह पाते।

इसके बावजूद उन्होंने प्रयोगात्मक उपचार को अपनाया, ताकि भविष्य के मरीजों के लिए नई राह बन सके।

वैज्ञानिक समुदाय में गहरी छाप

वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने स्कोलयर के योगदान को “विज्ञान को आगे बढ़ाने वाली साहसिक सोच” बताया है। उनके सहयोगियों के अनुसार, वे हमेशा नए शोधकर्ताओं का मार्गदर्शन करने और चिकित्सा क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए समर्पित रहे।

उनके काम ने इम्यूनोथेरेपी को कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक प्रमुख तकनीक के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

दुनिया भर में शोक और श्रद्धांजलि

उनके निधन के बाद चिकित्सा जगत में शोक की लहर है। वैज्ञानिक समुदाय, सरकारी नेता और उनके मरीजों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। उन्हें एक ऐसे डॉक्टर के रूप में याद किया जा रहा है जिन्होंने कठिन समय में भी आशा और विज्ञान को चुना।

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