ED ने कथित ₹2,110.97 करोड़ के पोंजी-स्टाइल निवेश मामले में शिवम एसोसिएट्स से जुड़े शिवानंद नीलन्नवर को गिरफ्तार किया है। एजेंसी के अनुसार, निवेशकों को 3 प्रतिशत मासिक रिटर्न का वादा कर कई राज्यों से रकम जुटाई गई और धन के कथित डायवर्जन की जांच जारी है।
मंगलुरु: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित ₹2,110.97 करोड़ के पोंजी-स्टाइल निवेश घोटाले में शिवम एसोसिएट्स से जुड़े शिवानंद सिद्धप्पा नीलन्नवर को गिरफ्तार किया है। एजेंसी के मुताबिक, आरोपी पर निवेशकों से भारी रकम जुटाने, धन के कथित डायवर्जन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोप हैं। मामले की जांच कई राज्यों तक फैली हुई है।
13 अगस्त को हुई गिरफ्तारी
ED के मंगलुरु सब-जोनल कार्यालय ने शुक्रवार को बताया कि शिवानंद नीलन्नवर को 13 अगस्त को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें मंगलुरु की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया। अदालत ने आरोपी को 24 अगस्त तक 12 दिनों के लिए ED की हिरासत में भेज दिया है।
जांच एजेंसी का कहना है कि नीलन्नवर शिवम एसोसिएट्स के फंड फ्लो को नियंत्रित करने वाले प्रमुख व्यक्ति थे और फर्म में बहुमत हिस्सेदारी के साथ उसके संचालन पर मुख्य नियंत्रण रखते थे। हालांकि, मामले में सामने आए आरोप अभी जांच के अधीन हैं और अदालत में इनका अंतिम निर्धारण होना बाकी है।
FIR से शुरू हुई जांच
ED के अनुसार, इस मामले की जांच कर्नाटक के बेलगावी शहर स्थित मालामारुति पुलिस थाने में दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई। FIR में अनियमित जमा योजनाओं पर रोक लगाने वाले कानून, यानी Banning of Unregulated Deposit Schemes Act, 2019 और Karnataka Protection of Interest of Depositors in Financial Establishments Act, 2004 के तहत आरोप दर्ज किए गए थे।
आरोप है कि शिवम एसोसिएट्स से जुड़े लोगों ने आम लोगों को निवेश के लिए आकर्षित किया और उन्हें असामान्य रूप से अधिक तथा निश्चित रिटर्न देने का वादा किया। ED ने PMLA के तहत जांच आगे बढ़ाई तो एजेंसी को कथित तौर पर एक बड़े, संगठित और कई राज्यों में फैले निवेश नेटवर्क की जानकारी मिली।
3 प्रतिशत मासिक रिटर्न का कथित वादा
ED के मुताबिक, शिवम एसोसिएट्स ने कथित तौर पर कर्नाटक, महाराष्ट्र, गोवा और छत्तीसगढ़ में निवेशकों का नेटवर्क तैयार किया था। एजेंसी का दावा है कि फर्म ने करीब ₹2,110.97 करोड़ की राशि सार्वजनिक निवेशकों से जुटाई।
जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, निवेशकों को हर महीने 3 प्रतिशत तक रिटर्न देने का वादा किया जाता था। नए निवेशकों को जोड़ने के लिए डिजिटल मैपिंग सिस्टम और रेफरल नेटवर्क का इस्तेमाल किए जाने की बात भी ED ने कही है।
एजेंसी के अनुसार, स्वतंत्र सलाहकारों को नए निवेशक लाने के बदले 0.5 प्रतिशत तक रेफरल कमीशन दिया जाता था। इस तरह निवेश का नेटवर्क लगातार बढ़ाया गया और अलग-अलग राज्यों में लोगों को कथित तौर पर योजना से जोड़ा गया।
शेयर बाजार में नुकसान के बाद बढ़ी मुश्किलें
ED की जांच में आरोप लगाया गया है कि शिवम एसोसिएट्स को वर्ष 2019 से शेयर बाजार में लगातार और बढ़ते नुकसान का सामना करना पड़ा। एजेंसी के अनुसार, इन कथित वित्तीय नुकसान को छिपाने और निवेशकों के बीच फर्म की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए बाद में जमा किए गए निवेशकों के मूलधन का इस्तेमाल पहले के निवेशकों को ब्याज या रिटर्न देने में किया गया।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इस तरीके से निवेशकों को भुगतान जारी रखने की कोशिश की गई, जबकि फर्म को बाजार में नुकसान हो रहा था। ऐसी व्यवस्था पोंजी-स्टाइल मॉडल की प्रमुख विशेषताओं से मिलती-जुलती बताई गई है, जिसमें नए निवेशकों से प्राप्त धन का इस्तेमाल पुराने निवेशकों को भुगतान करने के लिए किया जाता है।
हालांकि, ED के आरोप जांच का हिस्सा हैं और इस स्तर पर इन्हें अदालत द्वारा सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।
निजी खातों और कंपनियों के जरिए धन की कथित लेयरिंग
ED ने आरोप लगाया है कि निवेशकों से जुटाई गई रकम को कई निजी बैंक खातों, परिवार के सदस्यों और संबंधित संस्थाओं के माध्यम से कथित तौर पर घुमाया गया। एजेंसी ने शिवम सेवा (OPC) प्राइवेट लिमिटेड और शिवम प्रोडक्शंस जैसी संस्थाओं का भी जांच में उल्लेख किया है।
ED के मुताबिक, इस प्रक्रिया के जरिए कथित तौर पर धन की लेयरिंग और इंटीग्रेशन की गई। जांच एजेंसी का दावा है कि निवेशकों से जुटाई गई रकम के एक हिस्से का इस्तेमाल ऐसी संपत्तियां और परिसंपत्तियां खरीदने में किया गया, जिनका संबंध कथित तौर पर आरोपी या उसके सहयोगियों से था।
लग्जरी गाड़ियों और महंगी संपत्तियों पर खर्च का आरोप
जांच एजेंसी के अनुसार, कथित तौर पर डायवर्ट किए गए धन का इस्तेमाल लग्जरी वाहनों की खरीद, महंगे बंगलों के निर्माण और संपत्तियां हासिल करने में किया गया। ED ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ संपत्तियां नाममात्र के साझेदारों के नाम पर खरीदी गईं।
इसके अलावा, एजेंसी ने फिल्म निर्माण में भी कथित तौर पर धन के इस्तेमाल की बात कही है। ED के अनुसार, शिवम प्रोडक्शंस से जुड़े लेन-देन भी जांच के दायरे में हैं। एजेंसी इन कथित तौर पर डायवर्ट किए गए धन को PMLA के तहत अपराध से अर्जित आय यानी ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ मान रही है।
कई राज्यों तक फैला नेटवर्क
इस मामले की खास बात यह है कि कथित निवेश नेटवर्क केवल एक शहर या राज्य तक सीमित नहीं था। ED के अनुसार, कर्नाटक के अलावा महाराष्ट्र, गोवा और छत्तीसगढ़ में भी निवेशकों को नेटवर्क से जोड़ा गया था।
जांच एजेंसी डिजिटल तकनीक, रेफरल सिस्टम और स्वतंत्र सलाहकारों के कथित नेटवर्क के जरिए निवेश जुटाने के तरीके की भी पड़ताल कर रही है। इससे जांच का दायरा व्यापक हो गया है और एजेंसी अब कथित वित्तीय लेन-देन की पूरी श्रृंखला का पता लगाने में जुटी है।
ED अब बाकी धनराशि और निवेशकों की देनदारी खंगालेगा
ED ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है। एजेंसी का लक्ष्य कथित तौर पर जुटाई गई रकम, निवेशकों की कुल देनदारी, धन के अंतिम इस्तेमाल और विभिन्न खातों तथा संस्थाओं के बीच हुए लेन-देन की पूरी जानकारी हासिल करना है।
जांच के दौरान एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित योजना से जुड़े अन्य लोग कौन हैं और निवेशकों से प्राप्त धन का कितना हिस्सा अलग-अलग माध्यमों से स्थानांतरित किया गया।
₹2,110.97 करोड़ की कथित राशि और कई राज्यों में फैले नेटवर्क के कारण यह मामला वित्तीय अपराध और निवेश धोखाधड़ी से जुड़ी बड़ी जांचों में शामिल हो गया है। फिलहाल शिवानंद नीलन्नवर ED की हिरासत में हैं और आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों तथा अदालत की कार्यवाही पर निर्भर करेगी।











