मिडिल ईस्ट तनाव का असर अब बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। ईंधन संकट, महंगाई और गारमेंट इंडस्ट्री में उत्पादन गिरने से आर्थिक ग्रोथ पर दबाव बढ़ गया है, जिससे सरकार की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
ढाका: मध्य-पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा बाजार में अस्थिरता का असर अब दक्षिण एशिया की उभरती अर्थव्यवस्था बांग्लादेश पर साफ दिखाई देने लगा है। ऊर्जा आयात पर अत्यधिक निर्भर इस देश में ईंधन की बढ़ती कीमतों, औद्योगिक उत्पादन में गिरावट और महंगाई के दबाव ने आर्थिक स्थिति को कमजोर करना शुरू कर दिया है। विशेष रूप से रेडीमेड गारमेंट (RMG) सेक्टर, जो बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है।
LNG और ईंधन सब्सिडी पर बढ़ता सरकारी बोझ
रिपोर्टों के अनुसार, वैश्विक गैस कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन में अस्थिरता के कारण बांग्लादेश सरकार पर वित्तीय दबाव तेजी से बढ़ रहा है। यदि गैस की कीमतें उच्च स्तर पर बनी रहती हैं, तो अप्रैल से जून की तिमाही में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) सब्सिडी पर सरकार को अतिरिक्त 1.07 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक) खर्च करना पड़ सकता है।
इस स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने कई कठोर कदम उठाए हैं, जिनमें बिजली बचत अभियान, ईंधन राशनिंग और औद्योगिक गैस आपूर्ति में प्राथमिकता तय करना शामिल है। उर्वरक संयंत्रों को अस्थायी रूप से बंद कर गैस आपूर्ति बिजली उत्पादन की ओर मोड़ी जा रही है, जबकि कुछ क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के समय में भी कटौती की गई है।

औद्योगिक उत्पादन पर भारी असर
बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा आधार रेडीमेड गारमेंट उद्योग इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। उद्योग संगठनों के अनुसार, उत्पादन में 30 से 40 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। ऊर्जा की कमी और बढ़ती लागत के कारण फैक्ट्रियों का संचालन बाधित हुआ है।
इसके अलावा, अमेरिका और यूरोपीय देशों को होने वाले निर्यात में भी 5 से 13 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो वियतनाम, भारत और कंबोडिया जैसे प्रतिस्पर्धी देश वैश्विक बाजार में बांग्लादेश की हिस्सेदारी को चुनौती दे सकते हैं।
वर्ल्ड बैंक की चेतावनी: विकास दर में गिरावट संभव
विश्व बैंक ने अपनी ताजा रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में बांग्लादेश की आर्थिक विकास दर घटकर 3.9 प्रतिशत तक रह सकती है, जबकि पहले यह अनुमान 4.8 प्रतिशत था। संस्था ने कहा है कि ऊर्जा संकट, बढ़ती सब्सिडी लागत और मुद्रास्फीति सरकार की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ा रहे हैं।
आम जनता पर महंगाई और ईंधन संकट का असर
आर्थिक दबाव का असर केवल उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिकों के जीवन पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ रहा है। राजधानी ढाका सहित कई शहरों में ईंधन की कमी के कारण परिवहन और दैनिक जीवन प्रभावित हुआ है। पेट्रोल और गैस की उपलब्धता में अनियमितता के कारण लोगों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है।
ढाका के एक पूर्व व्यवसायी तारिकुल इस्लाम जैसे कई लोग अब वैकल्पिक रोजगार अपनाने को मजबूर हैं। बढ़ती महंगाई और घटती आमदनी ने मध्यम वर्ग और छोटे कारोबारियों की आर्थिक स्थिति को कमजोर कर दिया है।










