अमेरिका–इजरायल हमलों के बीच अली खामेनेई की मौत की खबरों के बाद ईरान ने बड़ा सैन्य बदलाव किया है। सरकार ने IRGC की कमान अहमद वाहिदी को सौंप दी। क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के बीच इसे रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
Iran-Israel War: ईरान में हालात तेजी से बदल रहे हैं। अमेरिका–इजरायल के हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei की मौत की खबरों के बीच देश ने अपनी सैन्य कमान में बड़ा बदलाव कर दिया है। ईरान ने अहमद वाहिदी को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी Islamic Revolutionary Guard Corps का नया कमांडर-इन-चीफ नियुक्त किया है।
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब क्षेत्र में तनाव चरम पर है और ईरान को अपनी सैन्य रणनीति को तुरंत मजबूत करने की जरूरत महसूस हो रही है। 31 दिसंबर 2025 को अहमद वाहिदी को डिप्टी कमांडर-इन-चीफ बनाया गया था और अब उन्हें पूरी कमान सौंप दी गई है।
कौन हैं अहमद वाहिदी
अहमद वाहिदी ईरान की सैन्य और सुरक्षा व्यवस्था में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। उनका जन्म 27 जून 1958 को ईरान के शिराज में हुआ था। शिक्षा की बात करें तो वे इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट हैं, औद्योगिक इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल कर चुके हैं और रणनीतिक अध्ययन में पीएचडी भी कर चुके हैं।
ईरान में उन्हें सैन्य रणनीति का मास्टरमाइंड माना जाता है। उनका नाम उन अधिकारियों में लिया जाता है जिन्होंने देश की रक्षा नीति को आकार देने में अहम भूमिका निभाई।
कुद्स फोर्स के पहले कमांडर
अहमद वाहिदी साल 1988 से 1998 तक कुद्स फोर्स के पहले कमांडर रहे। कुद्स फोर्स, IRGC की वह शाखा है जो ईरान के बाहर सैन्य और खुफिया ऑपरेशन संचालित करती है। इसे ईरान की विदेशी सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा माना जाता है।

कुद्स फोर्स का काम केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं रहता, बल्कि क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ समन्वय और रणनीतिक नेटवर्क तैयार करना भी इसकी जिम्मेदारी होती है। ऐसे में वाहिदी का अनुभव ईरान के लिए मौजूदा हालात में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रक्षा मंत्री और अन्य पदों पर भूमिका
अहमद वाहिदी 2009 से 2013 तक ईरान के रक्षा मंत्री भी रह चुके हैं। इस दौरान उन्होंने देश की रक्षा नीति और सैन्य आधुनिकीकरण पर काम किया।
वे एक्सपीडिएंसी डिस्कर्नमेंट काउंसिल के सदस्य भी रहे हैं, जो ईरान की नीतिगत निर्णय प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाती है। इसके अलावा वे सुप्रीम नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी के चेयरमैन भी रह चुके हैं। यह विश्वविद्यालय देश के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और रणनीतिक विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करता है।
इंटरपोल रेड नोटिस में नाम
अहमद वाहिदी का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विवादों में रहा है। 1994 में अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में यहूदी केंद्र पर हुए बम विस्फोट में कथित संलिप्तता के आरोप में उनका नाम इंटरपोल की रेड नोटिस लिस्ट में शामिल है। इस हमले में 85 लोगों की मौत हुई थी।
हालांकि ईरान ने इन आरोपों को खारिज किया है, लेकिन यह मामला अब भी अंतरराष्ट्रीय राजनीति में संवेदनशील माना जाता है।
अमेरिका और यूरोपियन यूनियन के प्रतिबंध
अहमद वाहिदी पर अमेरिका और यूरोपियन यूनियन ने कई प्रतिबंध लगाए हैं। इन प्रतिबंधों का कारण ईरान के परमाणु कार्यक्रम से उनके कथित संबंध और 2022 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान मानवाधिकार उल्लंघन में उनकी भूमिका को बताया गया है। पश्चिमी देशों का मानना है कि वाहिदी ने सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अहम भूमिका निभाई थी। वहीं ईरान इन आरोपों को राजनीतिक दबाव का हिस्सा बताता है।
खामेनेई परिवार को भी नुकसान
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका–इजरायल हमलों में अली खामेनेई के परिवार के सदस्यों की भी मौत हुई है। दावा किया जा रहा है कि उन्होंने अपने दामाद और बहू को खो दिया। तेहरान सिटी काउंसिल के सदस्य मीसम मुजफ्फर ने पत्रकारों के क्लब में कहा कि सर्वोच्च नेता के दामाद और बेटी भी मारे गए हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।











