El Nino Impact: प्रशांत महासागर में बढ़ी तूफानी गतिविधि, ग्लोबल ट्रेड और अर्थव्यवस्था पर मंडराया खतरा

El Nino Impact: प्रशांत महासागर में बढ़ती तूफानी गतिविधियों से समुद्री परिवहन, सप्लाई चेन और ग्लोबल ट्रेड प्रभावित होने की आशंका है। जानें इसका वैश्विक

लगातार मजबूत हो रहा अल नीनो प्रशांत महासागर में टाइफून और समुद्री तूफानों के रूप में गंभीर असर डाल रहा है। इन तूफानों के कारण अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है, जबकि व्यापारिक गतिविधियां भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। 

El Nino Impact: प्रशांत महासागर में मौसम का बदलता मिजाज दुनिया के लिए नई चुनौती बनता जा रहा है। अल नीनो की मजबूत होती स्थिति के बीच प्रशांत क्षेत्र में उष्णकटिबंधीय तूफानों और टाइफून की गतिविधियां बढ़ी हैं। इन प्राकृतिक आपदाओं का असर केवल तटीय इलाकों और स्थानीय आबादी तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार, समुद्री परिवहन और वैश्विक सप्लाई चेन पर भी दिखाई देने लगा है।

पिछले कुछ महीनों में प्रशांत महासागर के अलग-अलग हिस्सों में कई शक्तिशाली तूफान विकसित हुए हैं। इनके कारण सैकड़ों लोगों की मौत होने की खबर है, जबकि कई देशों को अरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। जापान के आसपास भी एक और तूफान के पहुंचने के बाद क्षेत्र में मौसम संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि नवंबर तक प्रशांत क्षेत्र में उष्णकटिबंधीय गतिविधियां जारी रह सकती हैं।

प्रशांत महासागर में बढ़ी तूफानी गतिविधि

अल नीनो आम तौर पर भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के समुद्री सतह के तापमान में असामान्य वृद्धि और उससे जुड़ी वायुमंडलीय परिस्थितियों से संबंधित है। समुद्र के तापमान और वातावरण में बदलाव से कई क्षेत्रों में तूफानों के बनने के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं। इस बार प्रशांत महासागर के कई हिस्सों में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की सक्रियता ने चिंता बढ़ाई है। अगस्त में प्रशांत बेसिन और दक्षिण चीन सागर में 12 उष्णकटिबंधीय चक्रवात विकसित हुए। उपलब्ध मौसम संबंधी आंकड़ों के अनुसार, 1961 के बाद किसी एक अगस्त में यह सबसे अधिक संख्या बताई गई है।

मध्य और पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में भी कई मौसम प्रणालियां ट्रॉपिकल स्टॉर्म की श्रेणी तक पहुंचीं। इनमें कुछ सिस्टम बेहद शक्तिशाली तूफानों में बदल गए। कुछ तूफानों में हवा की गति 179 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे अधिक तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है।

सैकड़ों लोगों की मौत, अरबों डॉलर का नुकसान

प्रशांत क्षेत्र में आए तूफानों ने कई देशों में जान-माल को प्रभावित किया है। अप्रैल से अब तक इन चक्रवाती घटनाओं से 230 से अधिक लोगों की मौत होने का दावा किया गया है। इसके अलावा घरों, सड़कों, बिजली नेटवर्क, बंदरगाहों और दूसरे बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। चीन में भी प्राकृतिक आपदाओं के कारण आर्थिक नुकसान काफी बढ़ा है। 

अमेरिकी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, केवल जुलाई में चीन को प्राकृतिक आपदाओं से करीब 8.5 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान हुआ। यह आंकड़ा इस बात का संकेत देता है कि चरम मौसम की घटनाएं अब स्थानीय आपदा के साथ-साथ आर्थिक जोखिम का भी बड़ा स्रोत बन रही हैं।

बंदरगाहों पर बढ़ा दबाव

तूफानों का प्रभाव समुद्री व्यापार पर भी पड़ रहा है। तेज हवाओं और खराब समुद्री परिस्थितियों के कारण कई बंदरगाहों पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। कुछ प्रमुख बंदरगाहों में कंटेनर कंजेशन बढ़ने से माल की आवाजाही में देरी हुई है। समुद्री परिवहन में किसी एक बड़े मार्ग या बंदरगाह के प्रभावित होने का असर कई देशों तक पहुंच सकता है। 

जहाजों के निर्धारित समय से पीछे चलने पर कंटेनर की डिलीवरी, औद्योगिक कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार उत्पादों के निर्यात-आयात पर दबाव बढ़ सकता है। इससे कंपनियों की लॉजिस्टिक्स लागत भी बढ़ने की संभावना रहती है।

अटलांटिक में तस्वीर अलग

जहां प्रशांत महासागर में तूफानी गतिविधियां चिंता बढ़ा रही हैं, वहीं अटलांटिक महासागर में मौसम की स्थिति इसके विपरीत बताई जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अटलांटिक तूफान सीजन की शुरुआत 1941 के बाद सबसे शांत अवधियों में से एक रही है। हालांकि, दोनों महासागरों की गतिविधियों में अंतर को केवल एक कारक से जोड़ना उचित नहीं होगा। 

समुद्र की सतह का तापमान, वायुमंडलीय दबाव, हवा की दिशा और गति समेत कई प्राकृतिक परिस्थितियां उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के विकास को प्रभावित करती हैं।

Leave a comment