ट्रंप से पहली मुलाकात से पहले ब्रिटिश PM बर्नहम का बड़ा कूटनीतिक कदम, UN में यूक्रेन से AI तक कई मुद्दों पर नजर

ब्रिटिश के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम न्यूयॉर्क में ट्रंप से पहली बार मिलेंगे। यूक्रेन, मध्य-पूर्व संकट, सऊदी अरब और AI गवर्नेंस बातचीत के प्रमुख मुद्दे होंगे।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान पहली बार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे। बातचीत में यूक्रेन, मध्य-पूर्व संकट, सऊदी अरब की सुरक्षा, ऊर्जा मार्ग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के वैश्विक नियमन पर चर्चा होने की संभावना है।

लंदन: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम मंगलवार को न्यूयॉर्क में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से पहली बार आमने-सामने मुलाकात करने जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान होने वाली इस बैठक में यूक्रेन युद्ध, मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष, सऊदी अरब की सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़े जोखिम प्रमुख मुद्दों में शामिल रहेंगे। बर्नहम का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब ब्रिटेन ने सऊदी अरब के अनुरोध पर उसकी रक्षा में सीमित सैन्य सहायता देने का फैसला किया है।

बर्नहम ने न्यूयॉर्क रवाना होते समय कहा कि वह ब्रिटेन और व्यापक क्षेत्र के हितों को सुरक्षित करने के उद्देश्य से कदम उठा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिटेन मध्य-पूर्व के संघर्ष को जल्द से जल्द समाप्त होते देखना चाहता है और इसके लिए अपनी भूमिका निभाने को तैयार है।

सऊदी अरब के समर्थन में RAF का विमान भेजेगा ब्रिटेन

बर्नहम सरकार ने सऊदी अरब की ओर से मिले अनुरोध के बाद रॉयल एयर फोर्स (RAF) को सीमित सैन्य सहायता उपलब्ध कराने की मंजूरी दी है। ब्रिटेन एक RAF Voyager विमान के जरिए सऊदी विमानों को हवा में ईंधन भरने यानी air-to-air refuelling की सुविधा देगा।

ब्रिटिश सरकार के अनुसार, यह सहायता सऊदी विमानों के रक्षात्मक अभियानों के लिए होगी। इसका उद्देश्य सऊदी अरब को यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से होने वाले ड्रोन और मिसाइल हमलों से बचाव में मदद करना है। यह व्यवस्था सीमित अवधि के लिए है और इसकी समीक्षा जारी रहेगी।

ब्रिटेन ने स्पष्ट किया है कि RAF की भूमिका सऊदी विमानों को ईंधन उपलब्ध कराने तक सीमित रहेगी, न कि हूती ठिकानों पर हमले करने के लिए सीधे सैन्य अभियान में शामिल होने तक। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यह समर्थन आने वाले दिनों में शुरू हो सकता है।

हूती हमलों से बढ़ा क्षेत्रीय तनाव

सऊदी अरब और यमन के हूती बलों के बीच संघर्ष के दोबारा तेज होने से मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ा है। हूतियों ने सऊदी अरब की ओर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। हालिया हमलों में रियाद को निशाना बनाने वाला एक हमला भी शामिल था, जिसे रोक दिया गया।

हूती बलों की गतिविधियों का असर लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से जुड़े समुद्री यातायात पर भी पड़ रहा है। यह मार्ग वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है और इसकी सुरक्षा ऊर्जा तथा अन्य वस्तुओं की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति से जुड़ी हुई है।

बर्नहम का कहना है कि क्षेत्र में स्थिरता और महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों को खुला रखना ब्रिटेन तथा व्यापक क्षेत्र के हित में है। मध्य-पूर्व संघर्ष से ऊर्जा कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर के कारण यह मुद्दा ब्रिटेन के लिए घरेलू आर्थिक नीति से भी जुड़ गया है।

ट्रंप के साथ पहली आमने-सामने मुलाकात

बर्नहम और ट्रंप की यह पहली आमने-सामने बैठक होगी। दोनों नेताओं के बीच पद संभालने के बाद फोन पर बातचीत हो चुकी है। बर्नहम ने कहा है कि वह ट्रंप के साथ “common ground” तलाशने की कोशिश करेंगे।

हालांकि, दोनों नेताओं के बीच कुछ अंतर भी मौजूद हैं। यूक्रेन, मध्य-पूर्व, ऊर्जा नीति, इजरायली बस्तियों से संबंधित ब्रिटिश प्रतिबंधों और AI नियमन जैसे मुद्दों पर दोनों देशों की नीतियों में अंतर है।

बर्नहम ने अतीत में ट्रंप की आलोचना की थी। 2017 में ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर रहते हुए उन्होंने कहा था कि ट्रंप का शहर में स्वागत नहीं होगा। 2019 में उन्होंने कहा था कि यदि ट्रंप ब्रिटेन आए तो वह उनसे मिलने से इनकार करेंगे। अब प्रधानमंत्री बनने के बाद बर्नहम का रुख व्यावहारिक कूटनीतिक संपर्क की ओर दिखाई दे रहा है।

यूक्रेन भी बातचीत के केंद्र में रहेगा

बर्नहम की विदेश नीति में यूक्रेन एक प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री की पद संभालने के बाद दूसरी विदेश यात्रा कीव की रही है और वह अमेरिका से यूक्रेन की वायु रक्षा को मजबूत करने में मदद की अपील करने की तैयारी में हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, बर्नहम ट्रंप से यूक्रेन के लिए इंटरसेप्टर मिसाइलों की उपलब्धता और उसकी वायु रक्षा क्षमता को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा कर सकते हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच आने वाली सर्दियों को लेकर यूक्रेन की वायु सुरक्षा विशेष चिंता का विषय बनी हुई है।

यह मुद्दा ब्रिटेन और अमेरिका के बीच सुरक्षा सहयोग के व्यापक ढांचे से भी जुड़ा है। बर्नहम के लिए चुनौती यह होगी कि वह अमेरिका के साथ सहयोग बनाए रखते हुए यूरोपीय सुरक्षा में ब्रिटेन की भूमिका को भी मजबूत करें।

AI को वैश्विक एजेंडे पर लाने की तैयारी

बर्नहम के न्यूयॉर्क दौरे का एक अन्य प्रमुख मुद्दा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का वैश्विक शासन और नियमन है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री संयुक्त राष्ट्र महासभा में AI के जोखिमों और संभावनाओं पर अपनी दृष्टि रखेंगे।

ब्रिटेन 2027 में G20 की अध्यक्षता करने वाला है और बर्नहम AI को उस अवधि के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्दों में शामिल करना चाहते हैं। उनका कहना है कि अमेरिका, यूरोप और चीन के साथ ब्रिटेन के संबंध उसे AI पर अंतरराष्ट्रीय संवाद में भूमिका निभाने का अवसर देते हैं।

बर्नहम ने ब्रिटेन को AI के क्षेत्र में एक ऐसे पक्ष के रूप में पेश करने की बात कही है जो तकनीक से मिलने वाले अवसरों और उससे जुड़े जोखिमों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करे।

UN में दो-राज्य समाधान पर बैठक

संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान बर्नहम इजरायल और फिलिस्तीन के बीच दो-राज्य समाधान की संभावनाओं पर एक उच्चस्तरीय बैठक की मेजबानी भी करेंगे।

इस बैठक में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के शामिल होने की योजना है।

यह पहल मध्य-पूर्व संकट के व्यापक कूटनीतिक समाधान पर ब्रिटेन की भूमिका को सामने रखने का अवसर भी होगी।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी चर्चा

बर्नहम की यात्रा में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से समुद्री यातायात बहाल करने के उपाय भी महत्वपूर्ण विषय हो सकते हैं। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के कारण समुद्री यातायात में बाधा और ऊर्जा कीमतों में वृद्धि ने ब्रिटेन सहित कई अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ाया है। ब्रिटिश सरकार के लिए ऊर्जा कीमतों का मुद्दा महंगाई और जीवन-यापन की लागत से भी सीधे जुड़ा हुआ है।

अमेरिका-ब्रिटेन संबंधों में नए संतुलन की कोशिश

ब्रिटेन और अमेरिका के बीच लंबे समय से रक्षा, व्यापार और सुरक्षा सहयोग के मजबूत संबंध हैं। लेकिन ट्रंप प्रशासन की कुछ नीतियों पर लंदन की स्थिति अलग रही है।

बर्नहम की सरकार इजरायली कब्जे वाले वेस्ट बैंक की बस्तियों के साथ व्यापार पर ब्रिटिश प्रतिबंध और बड़ी अमेरिकी टेक कंपनियों के नियमन जैसे मुद्दों पर भी अमेरिकी दबाव का सामना कर सकती है। ऊर्जा नीति भी संभावित चर्चा का विषय है।

वहीं, ब्रिटेन अमेरिका के साथ सुरक्षा सहयोग को बनाए रखना चाहता है। बर्नहम की यात्रा इसलिए केवल व्यक्तिगत मुलाकात नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच बदलते राजनीतिक और रणनीतिक समीकरणों को परखने का अवसर भी है।

यूरोप के साथ रिश्ते भी एजेंडे में

ब्रेक्सिट के बाद ब्रिटेन यूरोपीय देशों के साथ अपने संबंधों को नए आधार पर मजबूत करने की कोशिश करता रहा है। बर्नहम सरकार भी यूरोप के साथ सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रही है।

न्यूयॉर्क दौरे के दौरान ब्रिटेन के लिए अमेरिका के साथ संबंधों और यूरोपीय साझेदारों के साथ सहयोग के बीच संतुलन महत्वपूर्ण रहेगा। बर्नहम ने संकेत दिया है कि ब्रिटेन अमेरिका, यूरोप और चीन के साथ अलग-अलग स्तर पर संवाद बनाए रखते हुए अंतरराष्ट्रीय मामलों में अपनी भूमिका बढ़ाना चाहता है।

बर्नहम के लिए विदेश नीति की पहली बड़ी परीक्षा

जुलाई 2026 में प्रधानमंत्री बनने के बाद बर्नहम का यह अंतरराष्ट्रीय मंच पर अब तक का सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक दौरा है। एक ओर उन्हें ट्रंप के साथ संबंधों का नया आधार तैयार करना है, वहीं दूसरी ओर यूक्रेन, मध्य-पूर्व और AI जैसे मुद्दों पर ब्रिटेन की नीति को वैश्विक मंच पर रखना है।

सऊदी अरब को सीमित सैन्य सहायता देने का फैसला उनके नेतृत्व में लिया गया पहला प्रमुख सैन्य निर्णय भी है। यह कदम ऐसे समय आया है जब मध्य-पूर्व में संघर्ष और ऊर्जा मार्गों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय राजनीति तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था दोनों को प्रभावित कर रही है।

अब संयुक्त राष्ट्र महासभा और ट्रंप के साथ पहली आमने-सामने बैठक यह तय करने में महत्वपूर्ण होगी कि बर्नहम सरकार आने वाले समय में अमेरिका, यूरोप और अन्य वैश्विक शक्तियों के बीच ब्रिटेन की भूमिका को किस तरह परिभाषित करती है।

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