एमपी के सवा करोड़ किसानों को एग्रीस्टेक पोर्टल पर रजिस्टर्ड किया गया है। किसान अब मोबाइल से अपनी फसल और खेत के हिसाब से खाद बुक कर सकते हैं। सहकारी समिति या प्राइवेट रिटेलर से खाद घर तक भी मिल सकेगी।
Madhya Pradesh: कृषि विभाग ने किसानों की सुविधा के लिए एग्रीस्टेक पोर्टल तैयार किया है। पोर्टल में आधार नंबर के जरिए किसान का खेत का रकबा मोबाइल पर दिखाई देगा। किसान अपने खेत के रकबे के हिसाब से फसल चुनेंगे और आईसीएआर की गाइडलाइन के मुताबिक जरूरी खाद की मात्रा तय करेंगे।
इसके बाद किसान तय कर सकते हैं कि खाद उन्हें सरकारी रिटेलर (सहकारी समिति) से चाहिए या प्राइवेट रिटेलर से। पोर्टल पर दोनों विकल्प उपलब्ध होंगे। बुकिंग पूरी होने पर किसान को क्यूआर कोड की तरह ई-टोकन मिलेगा, जिसे लेकर वे चयनित रिटेलर से खाद प्राप्त कर सकते हैं।
प्राइवेट रिटेलर विकल्प
कुलदीप सिंह ने बताया कि सहकारी समितियों के सदस्य किसान अपनी समिति से खाद ले सकते हैं। जो सदस्य नहीं हैं, वे प्राइवेट रिटेलर चुनकर वहां से खाद उठा सकते हैं। पोर्टल और ऐप दोनों में फर्टिलाइजर के तय रेट दिखाई देंगे, ताकि रिटेलर अधिक पैसे न ले सके।

यदि किसान को पोर्टल पर कम बोरियों का सुझाव दिखता है, लेकिन उन्हें ज्यादा चाहिए, तो वे अतिरिक्त खाद के लिए दूसरी बार आवेदन कर सकते हैं।
होम डिलीवरी की सुविधा पर काम
कुलदीप सिंह ने बताया कि किसान अब दो विकल्पों में से अपनी पसंद से खाद ले सकते हैं। यदि किसान सहकारी समिति का सदस्य है, तो वह अपनी समिति से खाद ले सकता है। सदस्य नहीं होने पर किसान प्राइवेट रिटेलर चुनकर वहां से खाद उठा सकता है। पोर्टल और मोबाइल ऐप दोनों में फर्टिलाइजर के तय रेट दिखाई देंगे, ताकि रिटेलर कोई अतिरिक्त पैसा न ले सके।
यदि किसान को पोर्टल पर कम बोरियों का सुझाव दिख रहा है, लेकिन उसे अधिक बोरियों की जरूरत है, तो वह दूसरी बार अतिरिक्त खाद के लिए आवेदन कर सकता है। इस व्यवस्था से किसानों को पूरी पारदर्शिता और सुविधा मिलेगी।
सवा करोड़ किसानों का डेटा पोर्टल से जुड़ा
कुलदीप सिंह ने बताया कि अब तक लगभग सवा करोड़ किसानों का डेटा एग्रीस्टेक पोर्टल पर दर्ज किया गया है। इसमें खेत का रकबा, बोई जाने वाली फसल और अनुमानित खाद खपत शामिल है। इससे प्रदेश भर के किसान अब मोबाइल से ही खाद बुक कर सकते हैं और समय पर अपनी जरूरत के अनुसार खाद प्राप्त कर पाएंगे। इस ऑनलाइन सुविधा से न सिर्फ कतारों की परेशानी कम होगी, बल्कि सही समय पर खाद मिलने से फसलों की पैदावार भी बेहतर होगी।











