इथियोपिया और इरिट्रिया ने तोड़े राजनयिक संबंध, तिग्रे संघर्ष से बढ़ा क्षेत्रीय संकट

इथियोपिया ने इरिट्रिया का दूतावास बंद कर 10 राजनयिकों को निष्कासित किया। जवाब में इरिट्रिया ने सभी राजनयिक संबंध तोड़ दिए। तिग्रे संघर्ष से क्षेत्रीय तनाव बढ़ा।

इथियोपिया और इरिट्रिया ने राजनयिक संबंध तोड़ दिए हैं। यह कदम उत्तरी इथियोपिया में तिग्रे क्षेत्र के आसपास बढ़ती लड़ाई के बीच उठाया गया। इथियोपिया ने 10 इरिट्रिया राजनयिकों को निष्कासित किया, जबकि अस्मारा ने जवाबी कार्रवाई करते हुए संबंध समाप्त कर दिए।

अदीस अबाबा: इथियोपिया और इरिट्रिया के बीच राजनयिक संबंध पूरी तरह टूट गए हैं। उत्तरी इथियोपिया में तिग्रे क्षेत्र के आसपास फिर तेज हुई लड़ाई के बीच इथियोपिया ने इरिट्रिया में अपना दूतावास बंद करने और 10 इरिट्रिया के राजनयिकों को देश छोड़ने का आदेश दिया। इसके जवाब में इरिट्रिया ने भी इथियोपिया के साथ सभी राजनयिक संबंध समाप्त करने की घोषणा कर दी। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब इथियोपिया की संघीय सेना और तिग्रे पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट (TPLF) के नेतृत्व वाले सशस्त्र गठबंधन के बीच उत्तरी क्षेत्रों में संघर्ष तेज हो गया है। इस घटनाक्रम ने 2020-2022 के विनाशकारी तिग्रे युद्ध की यादें फिर ताजा कर दी हैं और हॉर्न ऑफ अफ्रीका में व्यापक क्षेत्रीय अस्थिरता की आशंका बढ़ा दी है।

इथियोपिया ने बंद किया अस्मारा स्थित दूतावास

इथियोपिया के विदेश मंत्रालय ने 1 अक्टूबर को घोषणा की कि वह इरिट्रिया की राजधानी अस्मारा स्थित अपना दूतावास बंद कर रहा है। अदीस अबाबा ने इस कदम के लिए इरिट्रिया के कथित “प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष शत्रुतापूर्ण” कदमों को जिम्मेदार बताया।

इथियोपिया ने 10 इरिट्रिया के राजनयिकों को persona non grata घोषित किया और उन्हें 48 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया। इनमें अस्मारा के प्रभारी राजनयिक और अफ्रीकी संघ के लिए मान्यता प्राप्त कुछ अधिकारी भी शामिल थे। इथियोपिया ने आरोप लगाया कि इन राजनयिकों की गतिविधियां राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा थीं।

इरिट्रिया ने जवाब में सभी संबंध तोड़े

इथियोपिया की कार्रवाई के कुछ ही समय बाद इरिट्रिया के विदेश मंत्रालय ने सभी राजनयिक संबंध समाप्त करने की घोषणा की। मंत्रालय ने कहा कि इथियोपिया के कदम के बाद उसके पास “जवाबी कार्रवाई” के अलावा कोई विकल्प नहीं था।

इरिट्रिया ने इथियोपिया के आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें हैरान करने वाला बताया। अस्मारा का कहना है कि वास्तविकता इसके विपरीत है और इथियोपिया लंबे समय से उसके खिलाफ शत्रुतापूर्ण एजेंडा चला रहा है।

इरिट्रिया ने यह भी आरोप लगाया है कि इथियोपिया उसके विरोधी समूहों को समर्थन दे रहा है। हालांकि, दोनों देशों के आरोपों और प्रत्यारोपों के बीच स्वतंत्र रूप से सभी दावों की पुष्टि नहीं हुई है।

अदीस अबाबा में धमाकों के बाद बढ़ी चिंता

राजनयिक संकट उस समय और गहरा गया जब इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा में रात के दौरान कई जोरदार धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। कुछ धमाकों की जानकारी सैन्य मुख्यालय के आसपास के इलाकों से भी सामने आई।

Reuters के अनुसार, एक विपक्षी गठबंधन से जुड़े एक स्रोत ने दावा किया कि अदीस अबाबा में ड्रोन हमलों के पीछे उसका हाथ था और कुछ हमलों को सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया गया था। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

राजधानी में हुए इन धमाकों ने आशंका बढ़ाई है कि उत्तरी इथियोपिया का संघर्ष अब देश के दूसरे हिस्सों तक फैल सकता है।

तिग्रे में फिर क्यों भड़की लड़ाई?

इथियोपिया में मौजूदा संघर्ष TPLF और संघीय सरकार के बीच बढ़ते तनाव से जुड़ा है। हालिया लड़ाई में TPLF ने कई सशस्त्र समूहों के साथ गठबंधन किया है। इस गठबंधन में अमहारा क्षेत्र से जुड़ा फानो मिलिशिया भी शामिल है।

इथियोपिया की सरकार ने आरोप लगाया है कि इरिट्रिया, सूडान और मिस्र इस विपक्षी गठबंधन को समर्थन दे रहे हैं। तीनों देशों ने इन आरोपों को खारिज किया है।

दूसरी ओर, इरिट्रिया ने तिग्रे में अपने सैनिकों की मौजूदगी से इनकार किया है। क्षेत्र में संचार बाधित होने और पत्रकारों की सीमित पहुंच के कारण जमीनी घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि मुश्किल बनी हुई है।

2020-2022 के युद्ध के बाद फिर बढ़ा तनाव

वर्तमान घटनाक्रम को समझने के लिए 2020-2022 का तिग्रे युद्ध महत्वपूर्ण है। उस समय इरिट्रिया की सेना ने इथियोपिया की संघीय सरकार के साथ मिलकर TPLF के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी।

नवंबर 2022 में शांति समझौते के बाद बड़े पैमाने पर युद्ध समाप्त हुआ, लेकिन इथियोपिया और इरिट्रिया के संबंध दोबारा सामान्य नहीं हो सके। इरिट्रिया उस शांति समझौते का औपचारिक पक्ष नहीं था और इसके बाद दोनों देशों के बीच अविश्वास बढ़ता गया।

2020-2022 के संघर्ष में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी। अफ्रीकी संघ के एक पूर्व अनुमान में मृतकों की संख्या करीब 6 लाख तक बताई गई थी, हालांकि विभिन्न आकलनों में संख्या अलग-अलग रही है।

2018 में खुले थे दोनों देशों के रिश्ते

इथियोपिया और इरिट्रिया के बीच संबंधों में 2018 में ऐतिहासिक सुधार आया था। प्रधानमंत्री अबिय अहमद के सत्ता में आने के बाद दोनों देशों ने लगभग दो दशक की दुश्मनी के बाद राजनयिक संबंध बहाल किए थे।

सीमा खोले जाने के बाद लंबे समय से अलग रह रहे परिवारों के फिर मिलने के दृश्य सामने आए थे। इथियोपिया और इरिट्रिया के बीच शांति प्रक्रिया में भूमिका के लिए अबिय अहमद को 2019 में नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था। लेकिन तिग्रे युद्ध के बाद दोनों देशों के रिश्ते फिर तेजी से खराब हुए।

रेड सी तक पहुंच भी बड़ा विवाद

इथियोपिया और इरिट्रिया के बीच तनाव का एक महत्वपूर्ण कारण रेड सी तक इथियोपिया की पहुंच का मुद्दा भी है।

इथियोपिया 1993 में इरिट्रिया के स्वतंत्र देश बनने के बाद समुद्री तट से वंचित हो गया था। प्रधानमंत्री अबिय अहमद कई बार कह चुके हैं कि समुद्र तक पहुंच देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

इरिट्रिया को आशंका है कि इथियोपिया उसके बंदरगाहों पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश कर सकता है। अस्मारा ने अदीस अबाबा की समुद्री पहुंच से जुड़ी मांगों को लेकर लगातार चिंता जताई है।

मिस्र के साथ भी राजनयिक तनाव

इथियोपिया ने 1 अक्टूबर को एक मिस्र के राजनयिक को भी persona non grata घोषित कर 48 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया। मिस्र ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इथियोपिया के दूतावास के एक अधिकारी को देश छोड़ने का आदेश दिया।

दोनों देशों के बीच पहले से ही तनाव है, जिसका एक प्रमुख कारण ग्रैंड इथियोपियन रेनैसांस डैम (GERD) है। नील नदी पर बने इस विशाल जलविद्युत बांध को लेकर मिस्र लंबे समय से अपनी जल सुरक्षा और नदी के पानी में हिस्सेदारी को लेकर चिंता जताता रहा है।

अफ्रीकी संघ ने संयम बरतने की अपील की

तेजी से बिगड़ते हालात पर अफ्रीकी संघ ने इथियोपिया, इरिट्रिया और मिस्र से अधिकतम संयम बरतने की अपील की है। संगठन ने कहा कि तीनों देशों को ऐसे कदमों और बयानों से बचना चाहिए जो क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को और प्रभावित कर सकते हैं।

अफ्रीकी संघ ने मतभेदों को स्थापित राजनयिक माध्यमों और शांतिपूर्ण संवाद के जरिए सुलझाने पर जोर दिया है।

मानवीय संकट की भी बढ़ी आशंका

उत्तरी इथियोपिया में जारी संघर्ष का असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। तिग्रे और पड़ोसी अफार क्षेत्र में लड़ाई के कारण बड़ी संख्या में लोगों के विस्थापित होने की खबरें हैं।

संयुक्त राष्ट्र ने भी बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंता जताई है। ड्रोन गतिविधियों और हवाई हमलों से नागरिकों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और राहत अभियानों को खतरा बढ़ने की बात कही गई है। सड़कें बंद होने और असुरक्षा के कारण मानवीय सहायता पहुंचाना भी मुश्किल हो रहा है।

मौजूदा स्थिति में इथियोपिया और इरिट्रिया के बीच राजनयिक संबंधों का टूटना केवल द्विपक्षीय विवाद नहीं रह गया है। तिग्रे संघर्ष, रेड सी तक पहुंच, मिस्र के साथ बांध विवाद और हॉर्न ऑफ अफ्रीका में पहले से मौजूद क्षेत्रीय तनाव आपस में जुड़े हुए हैं। इसलिए आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि संघर्षरत पक्ष और पड़ोसी देश तनाव कम करने के लिए किस स्तर पर राजनयिक संवाद कायम कर पाते हैं।

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