कर्नाटक में Form 7 को लेकर कांग्रेस और BJP आमने-सामने हैं। BJP अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से BJP पर लगाए मतदाता हटाने के आरोप साबित करने को कहा और असफल रहने पर इस्तीफे की मांग की है।
बेंगलुरु: कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच विवाद और तेज हो गया है। BJP की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के उन आरोपों को साबित करने की चुनौती दी है, जिनमें BJP पर Form 7 आवेदनों के कथित दुरुपयोग के जरिए पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया है।
विजयेंद्र ने 2 अक्टूबर को कहा कि यदि मुख्यमंत्री अपने आरोपों को साबित नहीं कर पाते हैं तो उन्हें पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि BJP कार्यकर्ता किसी भी तरह के मुकदमों या FIR से डरने वाले नहीं हैं और जरूरत पड़ने पर अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
Form 7 को लेकर आमने-सामने कांग्रेस और BJP
यह विवाद कर्नाटक में चल रहे SIR के दौरान मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को लेकर सामने आया है। Form 7 का इस्तेमाल मौजूदा मतदाता सूची में किसी नाम को हटाने के संबंध में आपत्ति या आवेदन दर्ज कराने के लिए किया जाता है। चुनावी प्रक्रिया में इस फॉर्म का उपयोग मृत मतदाता, डुप्लीकेट प्रविष्टि या अन्य कथित अपात्र प्रविष्टियों को हटाने के अनुरोध के लिए किया जा सकता है।
BJP प्रदेश अध्यक्ष विजयेंद्र का कहना है कि Form 7 चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे दाखिल करना अपने आप में अवैध नहीं है। उनके अनुसार, विभिन्न राजनीतिक दलों, बूथ स्तर के एजेंटों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से ऐसे आवेदन दिए गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी राजनीतिक दल को अपने स्तर पर मतदाता का नाम हटाने की शक्ति नहीं होती, क्योंकि अंतिम प्रक्रिया चुनाव अधिकारियों के माध्यम से होती है।
शिवकुमार ने BJP पर लगाए गंभीर आरोप
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 1 अक्टूबर को कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय के बाहर धरना दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि Form 7 का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर पात्र मतदाताओं के नाम हटाने के लिए किया जा रहा है।
शिवकुमार ने BJP और जनता दल (सेक्युलर) यानी JD(S) से जुड़े लोगों पर कथित साजिश का आरोप लगाते हुए कहा था कि बड़ी संख्या में मतदाताओं को सूची से हटाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से अल्पसंख्यक, दलित और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं ने चुनाव अधिकारियों से कथित फर्जी और सामूहिक Form 7 आवेदन दाखिल किए जाने की जांच तथा संबंधित लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की।
विजयेंद्र ने मांगे आरोपों के सबूत
BJP नेता बी.वाई. विजयेंद्र ने शिवकुमार से पूछा कि यदि पार्टी ने वास्तव में पात्र मतदाताओं के नाम हटाने के लिए Form 7 का दुरुपयोग किया है तो उसके प्रमाण सार्वजनिक किए जाएं।
रिपोर्टों के अनुसार, शिवकुमार ने बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने की संभावित साजिश का आरोप लगाया है। इसके जवाब में विजयेंद्र ने कहा कि मुख्यमंत्री को अपने आरोपों को तथ्य और दस्तावेजों के आधार पर साबित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि आरोप साबित नहीं होते हैं तो मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना चाहिए।
विजयेंद्र ने यह भी कहा कि BJP FIR या कानूनी कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगी। उनके शब्दों में, पार्टी के खिलाफ कितनी भी FIR दर्ज की जाएं, वह अदालत में उनका सामना करेगी।
'FIR State' बनाने का आरोप
BJP प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री शिवकुमार पर राज्य में राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ FIR के इस्तेमाल का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि BJP कार्यकर्ताओं को कानूनी कार्रवाई के नाम पर डराया नहीं जा सकता।
विजयेंद्र ने कर्नाटक को कथित तौर पर 'FIR State' में बदलने की कोशिश का आरोप लगाया। यह टिप्पणी BJP के उस राजनीतिक रुख का हिस्सा है, जिसमें पार्टी ने Form 7 विवाद को लेकर कांग्रेस सरकार पर दबाव बढ़ाया है। इस आरोप को BJP का राजनीतिक दावा माना जाना चाहिए; इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
BJP का दावा- करीब 25 हजार Form 7 आवेदन
विजयेंद्र ने यह भी दावा किया कि राज्य में विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों से करीब 24,000 से 25,000 Form 7 आवेदन दाखिल किए गए हैं। उनका कहना है कि ये आवेदन केवल BJP कार्यकर्ताओं ने नहीं दिए हैं, बल्कि विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से भी आवेदन किए गए हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि Form 7 के जरिए नाम हटाने की प्रक्रिया चुनाव अधिकारियों के नियंत्रण में है, तो केवल किसी राजनीतिक दल को इसका जिम्मेदार कैसे ठहराया जा सकता है।
वहीं, शिवकुमार ने इस आंकड़े को भी विवाद का हिस्सा बनाया। उन्होंने कहा कि यदि करीब 24,000 Form 7 आवेदन तीन राजनीतिक दलों की ओर से दाखिल किए गए हैं, तो इस पर जांच की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि आवेदन किस उद्देश्य से और किन मतदाताओं के खिलाफ दाखिल किए गए।
चुनाव अधिकारी ने दिए कार्रवाई के निर्देश
विवाद के बीच कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अनबुकुमार ने राज्य के जिला निर्वाचन अधिकारियों और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों को Form 7 से संबंधित शिकायतों की जांच के निर्देश दिए हैं।
CEO कार्यालय की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति Form 7 सहित चुनावी फॉर्म में जानबूझकर गलत बयान या घोषणा करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। निर्देश राज्य की सभी 224 विधानसभा सीटों के निर्वाचन अधिकारियों तक भेजे गए हैं।
इस घटनाक्रम को विवाद में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह स्पष्ट होता है कि सामूहिक Form 7 आवेदन और उनकी प्रामाणिकता से जुड़ी शिकायतों की जांच चुनाव अधिकारियों के स्तर पर की जाएगी।
कुछ मामलों में FIR भी दर्ज
मतदाता सूची से नाम हटाने के कथित प्रयासों को लेकर राज्य के कुछ हिस्सों में पुलिस मामले भी दर्ज हुए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, बेलगावी में BJP पदाधिकारी डॉ. रवि पाटिल और अन्य लोगों के खिलाफ 198 मतदाताओं के नाम हटाने के कथित प्रयास के संबंध में FIR दर्ज की गई। आरोपों में Form 7 के साथ कथित तौर पर गलत जानकारी और दस्तावेजों के इस्तेमाल का उल्लेख है। मामले की जांच जारी है।
इसके अलावा मैसूर, बीदर और अन्य क्षेत्रों में भी Form 7 के कथित दुरुपयोग को लेकर शिकायतों और मामलों की चर्चा सामने आई है। हालांकि, किसी FIR का दर्ज होना आरोपों के सिद्ध होने के बराबर नहीं है। अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।
BJP ने पुलिस आयुक्त कार्यालय के बाहर भी किया प्रदर्शन
Form 7 विवाद के बीच कर्नाटक BJP ने 2 अक्टूबर को बेंगलुरु पुलिस आयुक्त कार्यालय के बाहर धरना भी दिया। पार्टी ने मुख्यमंत्री शिवकुमार और उनके कैबिनेट सहयोगियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की।
BJP ने आरोप लगाया कि 1 अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के बाहर मुख्यमंत्री और मंत्रियों का प्रदर्शन कर्नाटक हाई कोर्ट के एक आदेश का उल्लंघन था। पार्टी ने पुलिस को ज्ञापन सौंपकर FIR, कार्रवाई से संबंधित दस्तावेज और प्रदर्शन की CCTV फुटेज उपलब्ध कराने की मांग की।
शिवकुमार ने चुनौती स्वीकार की
BJP की ओर से इस्तीफे की मांग पर शिवकुमार ने चुनौती स्वीकार करने की बात कही। उन्होंने कहा कि मामले को उसके तार्किक निष्कर्ष तक ले जाना चाहिए।
दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप ऐसे समय बढ़े हैं, जब कर्नाटक में SIR के तहत मतदाता सूची की समीक्षा चल रही है। विवाद का केंद्र यह सवाल है कि Form 7 आवेदन किन लोगों ने दाखिल किए, उनमें दी गई जानकारी कितनी सही थी और क्या किसी पात्र मतदाता को हटाने का जानबूझकर प्रयास किया गया।
फिलहाल चुनाव अधिकारियों की जांच, पुलिस की कार्रवाई और उपलब्ध दस्तावेज इस विवाद के तथ्यात्मक पहलुओं को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण होंगे। राजनीतिक दलों के आरोपों और जवाबी आरोपों के बीच अंतिम स्थिति जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं के परिणाम से स्पष्ट होगी।












