Strait of Hormuz: होर्मुज से LNG सप्लाई में आया बड़ा उछाल, सितंबर में युद्ध के बाद सबसे ज्यादा कार्गो निकले

Strait of Hormuz से सितंबर में 19 LNG कार्गो निकले, जो युद्ध शुरू होने के बाद किसी एक महीने का सबसे बड़ा आंकड़ा है। Kpler के अनुसार यह संख्या 21 रही।

फरवरी से ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई थी। हालांकि अब हालात में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

बिजनेस न्यूज़: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष के कारण पिछले कई महीनों से वैश्विक ऊर्जा बाजार में गैस और तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बनी हुई है। खास तौर पर Strait of Hormuz यानी होर्मुज जलडमरूमध्य से LNG की आवाजाही पर इसका बड़ा असर पड़ा था। हालांकि, सितंबर 2026 के आंकड़े अब कुछ राहत का संकेत दे रहे हैं। इस महीने होर्मुज से LNG ले जाने वाले जहाजों की आवाजाही युद्ध शुरू होने के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई।

विश्लेषकों के मुताबिक, अगर सितंबर में शुरू हुई यह गतिविधि अक्टूबर में भी जारी रहती है तो वैश्विक LNG बाजार पर सप्लाई का दबाव कुछ कम हो सकता है। हालांकि, इसे पूरी तरह सामान्य स्थिति की वापसी नहीं माना जा रहा है, क्योंकि होर्मुज में सुरक्षा जोखिम और क्षेत्रीय तनाव अभी भी मौजूद हैं।

सितंबर में 19 LNG कार्गो की आवाजाही

S&P Global Energy के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में कुल 19 LNG कार्गो होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरे। इनमें 13 कार्गो कतर और 6 संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से जुड़े थे। यह संख्या फरवरी में संघर्ष शुरू होने के बाद किसी एक महीने में सबसे अधिक बताई गई है। आंकड़ों से यह भी संकेत मिलता है कि सितंबर के आखिरी हिस्से में जहाजों की आवाजाही में खास तेजी आई। यदि अक्टूबर में भी यही रफ्तार बनी रहती है तो LNG कारोबार में और सुधार देखने को मिल सकता है।

होर्मुज वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के समुद्री तेल और LNG प्रवाह का करीब 20 प्रतिशत इस जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। संघर्ष के बाद यहां जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट आई थी।

Kpler के आंकड़ों में भी बढ़ी आवाजाही

शिपिंग डेटा कंपनी Kpler के आंकड़े भी LNG ट्रैफिक में सुधार की ओर इशारा करते हैं। सितंबर में Kpler ने होर्मुज से 21 LNG कार्गो के गुजरने का अनुमान लगाया, जबकि जून में यह संख्या 15 थी। कई QatarEnergy से जुड़े जहाज भी इस दौरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरते देखे गए। इनमें कुछ जहाज LNG से लदे हुए थे, जबकि कुछ खाली यानी बैलास्ट स्थिति में थे। यह अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि खाली जहाजों की आवाजाही भविष्य में नए कार्गो लोड करने और निर्यात गतिविधि बढ़ने की संभावनाओं का संकेत दे सकती है।

भारत के लिए क्यों अहम है होर्मुज से LNG सप्लाई?

होर्मुज से LNG की बढ़ती आवाजाही भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है। भारत एशिया के प्रमुख LNG आयातकों में शामिल है और घरेलू मांग को पूरा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से गैस खरीदता है। S&P Global के अनुसार भारत 2025 में 25 मिलियन टन से अधिक LNG आयात कर चुका था। सितंबर में होर्मुज से निकलने वाले कुछ LNG जहाज भारत के पश्चिमी तट की दिशा में भी आगे बढ़े। 

इनमें कतर से जुड़े जहाज शामिल थे। रिपोर्ट के अनुसार कुछ जहाज भारत के पश्चिमी तट के पास दिखाई दिए और एक LNG कार्गो ने गुजरात के हजीरा बंदरगाह पर डिलीवरी भी की। भारत के लिए यह घटनाक्रम इसलिए अहम है क्योंकि आने वाले महीनों में ऊर्जा की मांग बढ़ सकती है। अगर LNG कार्गो की नियमित आवाजाही बनी रहती है तो आयातकों को वैकल्पिक और महंगे स्रोतों पर निर्भरता कुछ कम करने में मदद मिल सकती है।

अक्टूबर में क्या हो सकता है?

सितंबर के आंकड़ों से LNG बाजार को थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन इसे संकट का अंत नहीं माना जा सकता। इससे पहले अगस्त में होर्मुज से LNG कैरियर की आवाजाही बेहद सीमित रही थी। S&P Global के अनुसार अगस्त में केवल तीन LNG कैरियर के ट्रांजिट दर्ज हुए थे, जबकि जुलाई में यह संख्या 18 थी।

इसके अलावा कतर की LNG सप्लाई पर संघर्ष का असर अभी भी बना हुआ है। QatarEnergy ने कुछ ग्राहकों को LNG डिलीवरी रोकने के लिए फोर्स मेज्योर नोटिस भी बढ़ाया था। ऐसे में अक्टूबर में जहाजों की आवाजाही बढ़ती है तो यह वैश्विक गैस बाजार के लिए सकारात्मक संकेत होगा। लेकिन सप्लाई की स्थिरता इस बात पर निर्भर करेगी कि होर्मुज में सुरक्षा स्थिति और क्षेत्रीय संघर्ष किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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