राजस्थान के CM भजनलाल शर्मा ने जयपुर में कहा कि ढाई साल पहले उनकी सरकार को “खंडहर” जैसी स्थिति वाला राजस्थान मिला था। उन्होंने पानी, बिजली और रोजगार को प्राथमिकता बताते हुए 2027 तक सभी किसानों को दिन में बिजली देने का लक्ष्य दोहराया।
जयपुर: राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपनी सरकार के कार्यकाल को लेकर पूर्ववर्ती व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि करीब ढाई साल पहले जब उनकी सरकार सत्ता में आई, तब राज्य की स्थिति उन्हें एक “खंडहर” जैसी मिली थी। जयपुर में पंचायती राज के जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने प्राथमिकता के आधार पर पानी और बिजली जैसे क्षेत्रों में काम शुरू किया। उन्होंने कहा कि राज्य में उस समय भ्रष्टाचार की स्थिति थी, युवा परेशान थे और किसानों की स्थिति भी अच्छी नहीं थी। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि सरकार ने विभिन्न वर्गों के लोगों से चर्चा के बाद विकास की प्राथमिकताएं तय कीं और सबसे पहले पेयजल, सिंचाई तथा बिजली से जुड़े मुद्दों पर काम किया।
यह बयान ऐसे समय आया है जब राजस्थान सरकार ग्रामीण विकास, जल परियोजनाओं, किसानों को दिन के समय बिजली उपलब्ध कराने और सरकारी भर्तियों को लेकर अपने कार्यों को प्रमुखता से पेश कर रही है।
जयपुर में पंचायती राज प्रतिनिधियों से संवाद
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार को जयपुर के जवाहर नगर स्थित माहेश्वरी पब्लिक स्कूल में पंचायती राज जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद किया। कार्यक्रम में उन्होंने ग्रामीण प्रशासन और विकास में सरपंचों तथा पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गांव में सरपंच आम लोगों के लिए उम्मीद का पहला केंद्र होता है। ग्रामीण अपनी छोटी-बड़ी समस्याएं लेकर सबसे पहले सरपंच के पास पहुंचते हैं। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से अपील की कि किसी समस्या को केवल इसलिए नजरअंदाज न करें कि वह छोटी दिखाई देती है।
शर्मा ने कहा कि गांव के स्तर पर लोगों की समस्याओं को समझने के लिए उनके बीच बैठना जरूरी है। उन्होंने पंचायती राज प्रतिनिधियों से गांवों में अधिक समय देने और केंद्र तथा राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने को कहा।
‘खंडहर राजस्थान’ वाले बयान में क्या कहा?
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में राजस्थान की पिछली स्थिति की तुलना पुराने खंडहर मकान से की। उन्होंने कहा कि जब किसी पुराने मकान को संभालने की जिम्मेदारी मिलती है तो पहले यह देखना पड़ता है कि मरम्मत की शुरुआत कहां से की जाए, क्योंकि कहीं हिस्सा टूटा होता है और कहीं कुछ और खराब।
इसी उदाहरण के जरिए उन्होंने कहा कि करीब ढाई साल पहले उनकी सरकार के सामने भी ऐसी ही स्थिति थी। उनके अनुसार, राज्य में भ्रष्टाचार, युवाओं की परेशानियों और किसानों की समस्याओं समेत कई मोर्चों पर काम करने की जरूरत थी।
यह मुख्यमंत्री का राजनीतिक और प्रशासनिक आकलन है। पिछली सरकार के प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस और BJP के बीच अलग-अलग राजनीतिक दावे रहे हैं, इसलिए इसे स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के बजाय मुख्यमंत्री के बयान के रूप में देखा जाना चाहिए।
पानी और बिजली को सरकार की प्राथमिकता बताया
भजनलाल शर्मा ने कहा कि सरकार ने सत्ता में आने के बाद पानी और बिजली को प्राथमिकता दी। उन्होंने बताया कि राजस्थान की जल जरूरतों को पूरा करने के लिए कई अंतरराज्यीय परियोजनाओं और समझौतों को आगे बढ़ाया गया है।
राज्य सरकार के अनुसार, रामजल सेतु परियोजना, यमुना जल समझौता, नर्मदा समझौता और किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना जैसे प्रमुख जल संबंधी प्रयासों को आगे बढ़ाया गया है। मुख्यमंत्री पहले भी कह चुके हैं कि इन परियोजनाओं से राजस्थान की दीर्घकालिक जल जरूरतों को पूरा करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
जून 2026 में राजस्थान और हरियाणा के बीच यमुना जल परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर समझौता भी हुआ था। केंद्र सरकार के अनुसार, इस समझौते का उद्देश्य दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे जल संबंधी मुद्दे के समाधान की दिशा में आगे बढ़ना था।
2027 तक सभी किसानों को दिन में बिजली देने का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में राजस्थान के 26 जिलों में किसानों को दिन के समय बिजली उपलब्ध कराई जा रही है और वर्ष 2027 से प्रदेश के सभी किसानों को दिन में बिजली देने का लक्ष्य रखा गया है।
हालिया सरकारी जानकारी और मुख्यमंत्री के पूर्व बयानों में भी 26 जिलों में किसानों को दिन के समय बिजली मिलने तथा 2027 तक इसे सभी जिलों तक विस्तार देने की बात कही गई है।
राज्य सरकार का कहना है कि दिन के समय कृषि बिजली मिलने से किसानों को सिंचाई के लिए रात में बिजली पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। हालांकि, पूरे राज्य में लक्ष्य हासिल करने के लिए बिजली वितरण और कृषि फीडर से जुड़ा बुनियादी ढांचा तैयार करना भी महत्वपूर्ण होगा।
चार लाख सरकारी नौकरियों के लक्ष्य पर कांग्रेस को जवाब
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में सरकारी नौकरियों के मुद्दे पर कांग्रेस नेताओं पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सरकार ने चार लाख सरकारी नौकरियां देने की बात कही थी, जिस पर कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया था कि इतनी नियुक्तियां संभव नहीं हैं।
शर्मा ने कहा कि सरकार अब तक 1.94 लाख लोगों को नियुक्तियां दे चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि 1.22 लाख पदों के लिए परीक्षाएं हो चुकी हैं और 1.25 लाख नौकरियां प्रक्रिया में हैं।
हालिया रिपोर्टों में मुख्यमंत्री की ओर से लगभग 1.90 लाख नियुक्तियां पूरी होने, 1.22 लाख पदों पर भर्ती प्रक्रिया चलने और 1.25 लाख पदों के लिए भर्ती कैलेंडर जारी होने का उल्लेख किया गया है। इसलिए कार्यक्रम में बताए गए 1.94 लाख के आंकड़े को मुख्यमंत्री के ताजा दावे के रूप में प्रस्तुत किया जाना उचित है।

‘मैथ का ट्यूशन’ वाली टिप्पणी
सरकारी नौकरियों के आंकड़ों को लेकर मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेताओं पर तंज भी कसा। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं को अपने पास डायरी और पेन रखना चाहिए और सरकार की ओर से की जा रही नियुक्तियों का हिसाब जोड़ना चाहिए।
उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि यदि कांग्रेस नेताओं की “मैथेमेटिक्स” कमजोर है तो वह उनके लिए गणित का ट्यूशन भी लगवा देंगे, ताकि वे रोज गुणा-भाग करके यह बता सकें कि कितनी नियुक्तियां हो चुकी हैं।
यह टिप्पणी मुख्यमंत्री के राजनीतिक भाषण का हिस्सा थी और सरकारी भर्ती के आंकड़ों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच चल रही राजनीतिक बहस को दर्शाती है।
‘गांव में आज भी पहले सरपंच कहते हैं’
पंचायती राज व्यवस्था के महत्व पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने अपने व्यक्तिगत अनुभव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गांव में आज भी लोग उन्हें मुख्यमंत्री से पहले “सरपंच भजनलाल” के नाम से संबोधित करते हैं।
शर्मा ने बताया कि एक बार जब वह एक मंदिर गए थे, तो वहां कुछ लोग “मुख्यमंत्री भजनलाल जिंदाबाद” के नारे लगा रहे थे, जबकि गांव के लोगों की ओर से “सरपंच भजनलाल जिंदाबाद” के नारे लगाए गए।
मुख्यमंत्री का यह संदर्भ उनके राजनीतिक जीवन की उस पृष्ठभूमि से जुड़ा है जिसमें उन्होंने स्थानीय स्तर से राजनीति शुरू की और सरपंच के रूप में भी काम किया है।
सरपंचों को बताया ग्रामीण विकास की धुरी
भजनलाल शर्मा ने कहा कि पंचायती राज संस्थाएं और सरपंच ग्रामीण विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। उनके अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका अहम है।
उन्होंने जनप्रतिनिधियों से कहा कि वे केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के बारे में ग्रामीणों को जानकारी दें तथा पात्र लोगों को उनका लाभ दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि गांव की वास्तविक जरूरतों को समझने के लिए जनप्रतिनिधियों को लोगों के बीच रहना चाहिए। उनके मुताबिक, ग्रामीणों की छोटी समस्याएं समय पर हल होने से बड़ी परेशानियों को बनने से रोका जा सकता है।
ग्रामीण विकास पर सरकार का रोडमैप
राजस्थान सरकार ने हाल के महीनों में ग्रामीण विकास के लिए पानी, बिजली, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्यों को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। मुख्यमंत्री ने इससे पहले भी हर गांव के नियोजित विकास के लिए रोडमैप तैयार करने और ग्रामीण क्षेत्रों में खेल मैदान तथा अटल ज्ञान केंद्र जैसी सुविधाओं को बढ़ाने की बात कही है।
सितंबर में उदयपुर संभाग के सात जिलों में ₹924 करोड़ से अधिक के 1,452 विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया गया था। इनमें सड़क, बिजली, पेयजल, सिंचाई, स्वास्थ्य, स्कूल और ग्रामीण विकास से जुड़े कार्य शामिल थे।
आगे ग्रामीण योजनाओं के क्रियान्वयन पर नजर
जयपुर में पंचायती राज प्रतिनिधियों के साथ मुख्यमंत्री का संवाद ऐसे समय हुआ है जब राजस्थान में ग्रामीण विकास और स्थानीय निकायों की भूमिका को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी बढ़ रही हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने 2026 के पंचायती राज चुनावों से संबंधित कुछ नियमों और प्रक्रियाओं को लेकर भी निर्देश जारी किए हैं।
मुख्यमंत्री के संबोधन का मुख्य फोकस गांवों में सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, किसानों के लिए दिन के समय बिजली, जल परियोजनाओं और रोजगार पर रहा। अब इन घोषणाओं और लक्ष्यों की वास्तविक प्रगति को आने वाले समय में परियोजना-वार और जिला-वार आंकड़ों के आधार पर देखा जाएगा।












