FBI रिपोर्ट में गैंगस्टरों का बड़ा खुलासा, सोशल मीडिया से भर्ती कर युवाओं को अपराध में झोंक रहे गिरोह

FBI रिपोर्ट में दावा किया गया कि गैंगस्टर सोशल मीडिया के जरिए युवाओं की भर्ती कर हत्या, उगाही और ड्रग तस्करी जैसे अपराधों में शामिल कर रहे हैं।

अमेरिकी जांच एजेंसी FBI और अमेरिकी न्याय विभाग की रिपोर्ट में लॉरेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया गिरोह के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार सोशल मीडिया के जरिए युवाओं की भर्ती कर उन्हें हत्या, उगाही और ड्रग तस्करी जैसे अपराधों में शामिल किया जाता था।

चंडीगढ़: अमेरिकी जांच एजेंसी FBI और अमेरिकी न्याय विभाग से जुड़े दस्तावेजों में लॉरेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया गिरोह के संगठित अपराध नेटवर्क को लेकर कई गंभीर खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं, नाबालिगों और महिलाओं को सोशल मीडिया के माध्यम से अपने नेटवर्क में शामिल कर हत्या, उगाही और अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी जैसी गतिविधियों में इस्तेमाल करता था।

सोशल मीडिया बना गैंग की भर्ती का सबसे बड़ा माध्यम

अमेरिकी न्याय विभाग और संघीय जांच एजेंसी FBI की जांच से जुड़े दस्तावेजों में दावा किया गया है कि लॉरेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया के अपराध नेटवर्क ने युवाओं की भर्ती के लिए सोशल मीडिया का व्यापक इस्तेमाल किया। रिपोर्ट के अनुसार इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं, नाबालिगों और महिलाओं से संपर्क किया जाता था। उन्हें पैसों, सुरक्षा, पहचान और विदेश भेजने जैसे लालच देकर गैंग का हिस्सा बनाया जाता था। इसके बाद इन युवाओं का इस्तेमाल हत्या, रंगदारी, हथियारों की सप्लाई और अन्य आपराधिक गतिविधियों में किया जाता था।

अमेरिका में चलाए गए ऑपरेशन हार्ड बॉल के तहत लॉस एंजिलिस की संघीय अदालत में दाखिल अभियोग पत्र में यह भी दावा किया गया है कि भगवानपुरिया गिरोह भारत में हत्या जैसी वारदातों को अंजाम देने के लिए कुछ मामलों में केवल 20 हजार रुपये तक की रकम देकर अपराध करवाता था।

विदेश तक फैला नेटवर्क, वीजा का दिया जाता था लालच

जांच दस्तावेजों के अनुसार लॉरेंस बिश्नोई का नेटवर्क भारत तक सीमित नहीं था। रिपोर्ट में कहा गया है कि उसके सहयोगियों ने अमेरिका, कनाडा और यूरोप में भी आपराधिक गतिविधियों का नेटवर्क खड़ा कर रखा था। दावा किया गया है कि वफादार सदस्यों को कथित तौर पर फर्जी छात्र या वर्क वीजा दिलाकर विदेश भेजा जाता था, जहां उन्हें गिरोह की गतिविधियों में लगाया जाता था।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि गोल्डी बराड़ उत्तरी अमेरिका में नेटवर्क संभालता था, जबकि रोहित गोदारा यूरोप में सक्रिय बताया गया है। अभियोग पत्र में आरोप लगाया गया है कि गिरोह अमेरिका में कोकीन, मेथामफेटामाइन और हेरोइन की तस्करी, प्रतिद्वंद्वी गिरोहों से ड्रग्स की खेप लूटने और उससे होने वाली कमाई भारत भेजने जैसे मामलों में भी शामिल रहा।

जेल से संचालन और युवाओं को लेकर एजेंसियों की चिंता

दस्तावेजों में जग्गू भगवानपुरिया के नेटवर्क से जुड़े कई दावे भी किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार उसकी सहयोगी मंदीप कौर उर्फ चीमा का इस्तेमाल अमेरिका में मादक पदार्थों की तस्करी के लिए किया गया। वहीं एक पूर्व पुलिस अधिकारी पर भी गैंगस्टरों के साथ मिलकर विदेश में रहने वाले एक परिवार से कथित रंगदारी मांगने की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में संबंधित अधिकारी का पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।

उधर, कनाडा की वित्तीय खुफिया एजेंसी फिनट्रैक ने भी पहले चेतावनी जारी कर कहा था कि आर्थिक रूप से कमजोर भारतीय छात्रों को धमकाकर और लालच देकर हिंसक अपराधों में शामिल किया जा रहा है। पंजाब के पुलिस महानिदेशक गौरव यादव ने भी कहा कि विदेश में बैठे गैंगस्टर सोशल मीडिया के जरिए 18 से 30 वर्ष के युवाओं को निशाना बना रहे हैं। उनके अनुसार कम पढ़े-लिखे, बेरोजगार और नशे की चपेट में आए युवा आसानी से ऐसे गिरोहों के जाल में फंस जाते हैं। इसी कारण पुलिस युवाओं को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चला रही है, ताकि वे अपराधी नेटवर्क के झांसे में आने से बच सकें।

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