भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए शुरू की गई एफसीएनआर (बी) योजना के सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं। एसबीआई रिसर्च की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना के जरिए भारत में कुल 80 से 85 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा आने का अनुमान है।
बिजनेस न्यूज़: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की विदेशी मुद्रा जुटाने वाली एफसीएनआर (बी) योजना को उम्मीद से बेहतर प्रतिक्रिया मिल रही है। एसबीआई रिसर्च की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना के जरिए भारत में कुल 80 से 85 अरब डॉलर तक की विदेशी मुद्रा आने का अनुमान है। भारतीय मुद्रा में यह राशि लगभग ₹7.1 लाख करोड़ के बराबर हो सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकों ने योजना शुरू होने के केवल 45 दिनों के भीतर इतना फंड जुटा लिया है, जो वर्ष 2013 में इसी तरह की व्यवस्था के तहत लगभग तीन महीने में जुटाई गई राशि के रिकॉर्ड से अधिक है। यह तेजी भारत की बैंकिंग प्रणाली में विदेशी मुद्रा प्रवाह को मजबूत करने के साथ-साथ देश के बाहरी वित्तीय क्षेत्र को भी सहारा दे सकती है।
एफसीएनआर (बी), यानी फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट बैंक डिपॉजिट, एक ऐसी जमा योजना है जिसके तहत अनिवासी भारतीय (NRI) विदेशी मुद्रा में भारतीय बैंकों के पास जमा कर सकते हैं। इस योजना का उद्देश्य विदेशी मुद्रा संसाधनों को बढ़ाना और बैंकिंग प्रणाली को अतिरिक्त विदेशी फंड उपलब्ध कराना है।
45 दिनों में कैसे टूटा 2013 का रिकॉर्ड?
एसबीआई रिसर्च के अनुसार, मौजूदा एफसीएनआर (बी) योजना को निवेशकों और अनिवासी भारतीयों से मजबूत प्रतिक्रिया मिली है। योजना के तहत बैंकों ने केवल 45 दिनों में इतनी विदेशी मुद्रा जुटा ली है, जिसने 2013 में करीब तीन महीने के दौरान जुटाई गई कुल राशि के स्तर को पीछे छोड़ दिया। वर्ष 2013 में भारत ने रुपये पर दबाव और बाहरी वित्तीय चुनौतियों के बीच विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए विशेष उपाय किए थे। उस समय एफसीएनआर जमा योजना ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
मौजूदा योजना की तेज रफ्तार यह संकेत देती है कि वैश्विक भारतीय समुदाय भारतीय बैंकिंग प्रणाली में निवेश के अवसरों को सकारात्मक रूप से देख रहा है। ऊंची ब्याज दरों और आकर्षक जमा शर्तों को भी निवेशकों की बढ़ती भागीदारी का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
एसबीआई रिसर्च ने बढ़ाया अनुमान

एफसीएनआर (बी) योजना की शुरुआती सफलता को देखते हुए एसबीआई रिसर्च ने अपने पूर्व अनुमान में बड़ा संशोधन किया है। पहले अनुमान लगाया गया था कि इस योजना के माध्यम से लगभग 40 से 45 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा भारत आ सकती है। अब इस अनुमान को बढ़ाकर 80 से 85 अरब डॉलर कर दिया गया है। यानी नया अनुमान पहले के अनुमान से लगभग दोगुना है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि केवल एफसीएनआर जमा के जरिए योजना की अवधि समाप्त होने तक 65 से 70 अरब डॉलर तक का निवेश आ सकता है। इसके अलावा, अगस्त और सितंबर 2026 में परिपक्व होने वाली पुरानी विदेशी मुद्रा जमाओं का एक बड़ा हिस्सा भी दोबारा निवेश किए जाने की संभावना है। ऊंची ब्याज दरों के कारण कई निवेशक अपनी परिपक्व जमा राशि को नई योजना में फिर से लगाने का विकल्प चुन सकते हैं। इससे योजना के तहत कुल विदेशी मुद्रा प्रवाह और बढ़ सकता है।
योजना 30 सितंबर तक रहेगी खुली
आरबीआई की यह विशेष योजना 30 सितंबर 2026 तक खुली रहने की जानकारी है। इसके कारण आने वाले हफ्तों में विदेशी मुद्रा जमा में और वृद्धि की संभावना बनी हुई है। यदि एसबीआई रिसर्च का अनुमान सही साबित होता है, तो यह योजना भारत के विदेशी मुद्रा संसाधनों को मजबूत करने वाली प्रमुख पहलों में शामिल हो सकती है। विदेशी मुद्रा का बड़ा प्रवाह बैंकिंग क्षेत्र की डॉलर और अन्य विदेशी मुद्राओं की जरूरतों को पूरा करने में भी मदद कर सकता है।
हालांकि, अंतिम निवेश राशि वैश्विक ब्याज दरों, विदेशी मुद्रा बाजार की स्थिति, निवेशकों की भागीदारी और योजना की शेष अवधि के दौरान मिलने वाली नई जमाओं पर निर्भर करेगी।
अब तक किस माध्यम से कितना फंड आया?
17 जुलाई तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत जुटाई गई राशि में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक आए फंड में बाहरी वाणिज्यिक उधार (ECB) के माध्यम से करीब 1.34 अरब डॉलर शामिल हैं। इसके अलावा, विदेशी मुद्रा में लिए गए कर्ज के जरिए लगभग 1.97 अरब डॉलर की राशि जुटाई गई है।
बैंकों की सक्रिय भागीदारी और एफसीएनआर जमा में बढ़ती रुचि से कुल विदेशी मुद्रा प्रवाह में तेजी देखने को मिल रही है। आने वाले महीनों में यह प्रवाह भारत की वित्तीय स्थिति और बैंकिंग क्षेत्र की विदेशी मुद्रा उपलब्धता को मजबूत कर सकता है।











