संसद के मानसून सत्र के बीच NCP (SP) की नेता सुप्रिया सुले सोमवार को महाराष्ट्र से जुड़े अहम मुद्दों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगी। इस दौरान सुप्रिया सुले के साथ उनकी पार्टी के सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद रहेगा।
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के अंतिम दिनों में फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) संशोधन विधेयक और प्रस्तावित परिसीमन से जुड़े संवैधानिक बदलावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त होना है। ऐसे में सरकार और विपक्ष दोनों लंबित विधेयकों को लेकर अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
इसी राजनीतिक माहौल के बीच NCP (SP) नेता सुप्रिया सुले सोमवार को महाराष्ट्र से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने वाली हैं। उनके साथ पार्टी सांसदों का प्रतिनिधिमंडल भी रहेगा। बैठक ऐसे समय हो रही है जब FCRA संशोधन विधेयक को लेकर विपक्षी दलों की आपत्तियां और संभावित परिसीमन प्रक्रिया पर राजनीतिक चर्चा दोनों तेज हैं।
FCRA Bill के मौजूदा स्वरूप का विरोध कर रही NCP (SP)
सुप्रिया सुले ने प्रस्तावित FCRA संशोधन विधेयक को लेकर अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट किया है। उनके मुताबिक NCP (SP) मौजूदा स्वरूप में विधेयक का समर्थन नहीं करती। पार्टी की मांग है कि सरकार या तो बिल वापस ले या इसे विस्तृत जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजे। विपक्ष का तर्क है कि विदेशी अंशदान से जुड़े नियमों में प्रस्तावित बदलाव गैर-सरकारी संगठनों और अन्य संस्थाओं के कामकाज पर अतिरिक्त प्रभाव डाल सकते हैं। यही वजह है कि बिल को लेकर संसद के भीतर राजनीतिक मतभेद बने हुए हैं।
परिसीमन बिल पर सुले ने रखा सावधानी भरा रुख
महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संभावित संविधान संशोधन विधेयक को लेकर सुप्रिया सुले ने फिलहाल कोई अंतिम प्रतिबद्धता नहीं जताई है। उन्होंने संकेत दिया कि जब तक प्रस्तावित बिल संसद के सामने नहीं आता, तब तक पार्टी का अंतिम रुख तय करना जल्दबाजी होगी। उनका कहना है कि किसी भी महत्वपूर्ण संवैधानिक बदलाव पर फैसला लेने से पहले INDIA गठबंधन के सहयोगियों के साथ चर्चा की जाएगी।
परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्तावों के लिए संसद में विशेष बहुमत की आवश्यकता हो सकती है, इसलिए सरकार के लिए व्यापक राजनीतिक समर्थन हासिल करना महत्वपूर्ण होगा।
सरकार के लिए DMK और NCP (SP) का समर्थन अहम

मानसून सत्र के अंतिम सप्ताह में सरकार के सामने FCRA संशोधन विधेयक को लेकर चुनौती बनी हुई है। उपलब्ध एजेंडे के अनुसार सोमवार को लोकसभा की कार्यसूची में इस विधेयक को पारित कराने का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। राजनीतिक विश्लेषण के लिहाज से इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि सरकार सत्र समाप्त होने से पहले FCRA बिल को आगे बढ़ाना चाहती है, तो उसके लिए लोकसभा के बचे हुए दिनों में चर्चा और मतदान के लिए समय तय करना होगा।
DMK और NCP (SP) जैसी पार्टियों का रुख इसलिए भी अहम है क्योंकि सरकार कई संवेदनशील विधायी और संवैधानिक मुद्दों पर व्यापक समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है।
बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक पर नजर
सोमवार को लोकसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक प्रस्तावित एजेंडे को लेकर महत्वपूर्ण हो सकती है। समिति संसद में अलग-अलग विधेयकों पर चर्चा के लिए समय तय करने और सदन की कार्यवाही का कार्यक्रम निर्धारित करने में भूमिका निभाती है। यदि FCRA संशोधन विधेयक को मौजूदा मानसून सत्र में आगे बढ़ाया जाना है, तो उसके लिए चर्चा का समय एजेंडे में शामिल करना जरूरी होगा। इसलिए BAC की बैठक के बाद विधेयक की स्थिति को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
क्या है FCRA और क्यों हो रहा विवाद?
Foreign Contribution Regulation Act (FCRA) भारत में विदेशी स्रोतों से मिलने वाले धन और अंशदान को नियंत्रित करने वाला प्रमुख कानून है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशों से प्राप्त धन का इस्तेमाल निर्धारित नियमों के तहत हो और इसका दुरुपयोग देश के सार्वजनिक या राजनीतिक हितों के खिलाफ न किया जाए। प्रस्तावित संशोधनों को लेकर विपक्षी दलों और कुछ संगठनों ने चिंता जताई है।
रिपोर्टों के अनुसार, नए प्रावधानों में ऐसी व्यवस्था का प्रस्ताव है जिसके तहत किसी संस्था का FCRA पंजीकरण समाप्त होने या संस्था द्वारा पंजीकरण छोड़ने की स्थिति में विदेशी अंशदान से संबंधित धन और उसके प्रबंधन पर नियामक नियंत्रण बढ़ सकता है। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल समेत विपक्ष के कुछ नेताओं ने आशंका जताई है कि प्रस्तावित बदलावों से NGOs और सामुदायिक संगठनों के कामकाज पर असर पड़ सकता है। विपक्ष का आरोप है कि नए प्रावधानों से सरकार को गैर-सरकारी संगठनों पर अधिक नियंत्रण मिल सकता है।











