FCRA बिल पर विपक्ष के रवैये से नाराज मायावती, बोलीं- ‘Gen Z वोट के आगे दूसरे मुद्दे नहीं दिख रहे’

FCRA Bill को लेकर विपक्ष के रवैये पर बसपा प्रमुख मायावती ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को Gen Z वोट के आगे दूसरे अहम मुद्दे नजर नहीं आ रहे। जानें

एफसीआरए संशोधन बिल को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी तनातनी के बीच इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेज दिया गया है। इस मुद्दे पर बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष Mayawati मायावती ने प्रतिक्रिया देते हुए विपक्षी दलों पर राजनीति करने का आरोप लगाया।

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष Mayawati ने संसद में FCRA संशोधन विधेयक को लेकर हुए राजनीतिक टकराव पर विपक्ष के रवैये की कड़ी आलोचना की है। मायावती ने कहा कि विपक्ष को संसद की कार्यवाही चलने देनी चाहिए थी, ताकि प्रस्तावित कानून पर विस्तार से चर्चा होती और उसकी संभावित कमियों को देश के सामने रखा जा सकता था।

FCRA संशोधन विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी तनातनी के बाद इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेज दिया गया है। इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए मायावती ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ने इस महत्वपूर्ण विधेयक का जरूरत से ज्यादा राजनीतिकरण किया है।

बसपा प्रमुख ने सोशल मीडिया मंच X पर एक विस्तृत पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सरकार इस विधेयक को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए अन्य विधेयकों की तरह जल्द पारित कराना चाहती थी, लेकिन विपक्ष के जोरदार विरोध के बीच इसे शुरुआती चर्चा के बिना ही जल्दबाजी में संयुक्त संसदीय समिति को भेजना पड़ा।

FCRA संशोधन बिल पर मायावती ने उठाए सवाल

मायावती के अनुसार, कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इस विधेयक को सीधे तौर पर अल्पसंख्यक विरोधी बताते हुए इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर सरकार का पक्ष है कि प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य विदेशी फंडिंग के इस्तेमाल से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और अन्य अनियमितताओं पर कड़े प्रावधान लागू करना है।

बसपा प्रमुख ने कहा कि इस मुद्दे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय संसद में गंभीर और विस्तृत बहस होनी चाहिए थी। उनके मुताबिक, यदि विपक्ष विधेयक पेश किए जाने के दौरान सदन की कार्यवाही चलने देता और चर्चा में शामिल होकर इसकी कमियों तथा संभावित प्रभावों को सामने रखता, तो देश को विभिन्न राजनीतिक पक्षों के तर्क समझने का अवसर मिलता।

उन्होंने कहा कि संसदीय बहस लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है और किसी कानून के प्रभावों पर चर्चा से जनता को यह जानने में मदद मिलती है कि प्रस्तावित बदलावों का अलग-अलग वर्गों और संस्थाओं पर क्या असर पड़ सकता है।

‘विपक्ष ने सरकार को दिया फायदा’

मायावती ने विपक्ष की संसदीय रणनीति पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि सदन में बार-बार व्यवधान के कारण कई अन्य विधेयकों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो सकी और कुछ प्रस्ताव बहुत कम समय में पारित हो गए। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे कई विधेयक थे, जिन पर विपक्ष को प्रभावी ढंग से सवाल उठाने और चर्चा की मांग करने की जरूरत थी। लेकिन सदन की कार्यवाही बाधित होने से सरकार को अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने का अवसर मिल गया।

मायावती ने विपक्ष से यह भी सवाल किया कि महत्वपूर्ण विधेयकों पर विस्तृत चर्चा की रणनीति अपनाने के बजाय सदन की कार्यवाही बाधित करने का तरीका कितना प्रभावी है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की भूमिका केवल विरोध तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसे कानूनों और नीतियों की कमियों को संसदीय मंच पर ठोस तर्कों के साथ सामने रखना चाहिए।

Gen Z वोट पर मायावती की तीखी टिप्पणी

बसपा सुप्रीमो ने विपक्ष पर युवाओं, खासकर Gen Z मतदाताओं को लेकर अत्यधिक राजनीतिक फोकस करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि विपक्ष की प्राथमिकता में Gen Z से जुड़े मुद्दे इतने प्रमुख हो गए हैं कि देश के अन्य महत्वपूर्ण विषयों को पर्याप्त महत्व नहीं मिल रहा। मायावती ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में युवाओं की समस्याओं पर ध्यान देना जरूरी है, लेकिन जनहित से जुड़े दूसरे मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। 

उनके अनुसार, विपक्ष को युवा मतदाताओं से संबंधित विषयों के साथ-साथ अर्थव्यवस्था, सामाजिक मुद्दों और सार्वजनिक संस्थानों से जुड़े मामलों पर भी संसद में प्रभावी ढंग से आवाज उठानी चाहिए।

अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे का मुद्दा उठाने की मांग

मायावती ने अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के आरोपों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि इस विषय पर संसद में चर्चा होनी चाहिए थी और विपक्ष को इसे प्राथमिकता से उठाना चाहिए था। हालांकि, ऐसे आरोपों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि तथा संबंधित जांच की स्थिति महत्वपूर्ण है। मायावती ने अपने बयान में इस मुद्दे पर संसदीय बहस की आवश्यकता जताते हुए कहा कि विपक्ष ने राजनीतिक प्राथमिकताओं के कारण इसे पीछे छोड़ दिया।

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