दुर्गापुर में TMC कार्यालय में तोड़फोड़ का आरोप, BJP पर निशाना; विधायक ने किया इनकार

दुर्गापुर के नयापल्ली में TMC कार्यालय में तोड़फोड़ का आरोप लगा है। TMC ने BJP पर निशाना साधा, जबकि BJP विधायक लक्ष्मण चंद्र घड़ुई ने आरोपों से इनकार किया।

दुर्गापुर के नयापल्ली में TMC कार्यालय में कथित तोड़फोड़ को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। TMC ने BJP पर आरोप लगाया, जबकि BJP विधायक लक्ष्मण चंद्र घड़ुई ने इसे खारिज किया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

दुर्गापुर: पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पार्टी कार्यालय में कथित तोड़फोड़ को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। दुर्गापुर के 14 नंबर वार्ड के नयापल्ली इलाके में स्थित TMC कार्यालय में सामान क्षतिग्रस्त किए जाने और कुछ वस्तुओं को पास के नाले में फेंके जाने का आरोप लगाया गया है। TMC ने इस घटना के लिए स्थानीय भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, BJP विधायक लक्ष्मण चंद्र घड़ुई ने इन आरोपों से इनकार किया है।

घटना के बाद दोनों राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया है। स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कार्यालय में तोड़फोड़ के पीछे कौन लोग थे और घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या था।

नयापल्ली के TMC कार्यालय में क्या हुआ?

दुर्गापुर के नयापल्ली इलाके में पार्टी कार्यालय में कथित तोड़फोड़ की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं। TMC की ओर से आरोप लगाया गया कि कुछ लोग कार्यालय का ताला तोड़कर अंदर दाखिल हुए और वहां रखे सामान को नुकसान पहुंचाया।

पार्टी के अनुसार, कार्यालय में रखे कई सामानों के साथ तोड़फोड़ की गई। TMC ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद कार्यालय पर नया ताला लगा दिया गया। पार्टी की ओर से कार्यालय में लगे CCTV कैमरों को नुकसान पहुंचाने और कुछ सामानों को पास के नाले में फेंकने का भी दावा किया गया है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और जांच पूरी होने के बाद ही घटना में शामिल लोगों तथा नुकसान की वास्तविक स्थिति के बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आ सकती है।

TMC ने BJP पर लगाया आरोप

तृणमूल कांग्रेस ने स्थानीय BJP नेतृत्व पर पार्टी कार्यालय में तोड़फोड़ कराने का आरोप लगाया है। पार्टी के पूर्व युवा अध्यक्ष राजू सिंह ने घटना को लेकर पुलिस प्रशासन से शिकायत किए जाने की बात कही है।

उनके अनुसार, पार्टी कार्यालय को वापस दिलाने के लिए प्रशासन से संपर्क किया गया है। उन्होंने स्थानीय BJP विधायक से भी शिकायत किए जाने का दावा किया।

TMC का कहना है कि पार्टी कार्यालय में रखे सामान को नुकसान पहुंचाने और CCTV कैमरों को तोड़ने की घटना को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। पार्टी की ओर से पूरे मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

हालांकि, TMC द्वारा लगाए गए आरोपों को अभी जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता। पुलिस की जांच के बाद ही यह निर्धारित हो सकेगा कि तोड़फोड़ में कौन लोग शामिल थे।

BJP विधायक लक्ष्मण चंद्र घड़ुई ने आरोपों को नकारा

BJP विधायक लक्ष्मण चंद्र घड़ुई ने TMC की ओर से लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि घटना को BJP से जोड़ना सही नहीं है।

घड़ुई के अनुसार, राजू सिंह के नेतृत्व में स्थानीय BJP कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर धमकी दी गई थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि BJP कार्यकर्ताओं से TMC कार्यालय की सफाई करवाने की कोशिश की गई थी।

BJP विधायक के मुताबिक, इसी घटनाक्रम को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी पैदा हुई। हालांकि, उनके द्वारा लगाए गए आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

इस तरह दुर्गापुर की घटना में फिलहाल दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं। पुलिस जांच के बाद ही इन दावों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।

पुलिस ने शुरू की मामले की जांच

घटना की सूचना मिलने के बाद दुर्गापुर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लिया और मामले से संबंधित जानकारी जुटानी शुरू की।

ऐसे मामलों में पुलिस आम तौर पर CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और क्षतिग्रस्त संपत्ति की स्थिति की जांच करती है। नयापल्ली की घटना में भी जांच के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कार्यालय में कौन दाखिल हुआ था और नुकसान किस तरह हुआ।

फिलहाल पुलिस की ओर से किसी आरोपी की गिरफ्तारी या घटना के लिए किसी राजनीतिक दल को जिम्मेदार ठहराए जाने की पुष्टि सामने नहीं आई है।

सिउड़ी में भी TMC कार्यालय में हुई थी तोड़फोड़

दुर्गापुर की घटना से कुछ दिन पहले पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के सिउड़ी में भी TMC कार्यालय में तोड़फोड़ की घटना सामने आई थी। यह घटना 30 सितंबर 2026 को हुई थी और उस समय पार्टी के नेता अनुब्रत मंडल कार्यालय के अंदर मौजूद थे।

पुलिस और समाचार एजेंसी PTI से प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, कुछ युवक सिउड़ी के पुराने बस स्टैंड के पास स्थित TMC कार्यालय में पहुंचे और वहां तोड़फोड़ की। कार्यालय में कुर्सियों, टेबल, कांच के पैनल और अन्य सामान को नुकसान पहुंचाए जाने की जानकारी सामने आई।

रिपोर्टों के अनुसार, युवकों ने अनुब्रत मंडल को भी घेरा और उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया। घटना के दौरान मंडल कार्यालय में मौजूद थे। पुलिस ने बाद में तीन युवकों को गिरफ्तार किया।

सिउड़ी की घटना में हमलावरों की राजनीतिक पहचान स्पष्ट नहीं

सिउड़ी की घटना को लेकर एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि पुलिस और उपलब्ध रिपोर्टों में युवकों की किसी राजनीतिक संगठन से संबद्धता तत्काल स्पष्ट नहीं हुई थी। PTI की रिपोर्ट के अनुसार, युवकों ने खुद को किसी राजनीतिक दल से जुड़ा होने से इनकार किया था। उन्होंने अपने कृत्य को स्थानीय स्तर पर लंबे समय से कथित उत्पीड़न के खिलाफ गुस्से की अभिव्यक्ति बताया था।

घटना के बाद दोनों TMC गुटों की ओर से इसकी निंदा की गई और पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।

यह तथ्य दुर्गापुर की घटना से अलग है। इसलिए सिउड़ी में हुई तोड़फोड़ को दुर्गापुर मामले में शामिल पक्षों या आरोपों की पुष्टि के रूप में नहीं देखा जा सकता।

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक कार्यालयों को लेकर बढ़े विवाद

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक दलों के कार्यालयों को लेकर तोड़फोड़ और कब्जे के आरोप समय-समय पर सामने आते रहे हैं। सितंबर 2026 में दक्षिण कोलकाता के जादवपुर में भी TMC कार्यालय, कुछ नेताओं के घरों और एक CPI(M) स्मारक में तोड़फोड़ के आरोप लगे थे। TMC और वाम दलों ने BJP कार्यकर्ताओं पर आरोप लगाया था, जबकि BJP ने अपनी भूमिका से इनकार करते हुए इसे TMC का अंदरूनी विवाद बताया था।

इन घटनाओं में आरोप और प्रत्यारोप अलग-अलग राजनीतिक पक्षों से सामने आते हैं। ऐसे मामलों में किसी पार्टी या व्यक्ति की जिम्मेदारी तय करने के लिए पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों का महत्व बढ़ जाता है।

दुर्गापुर में आगे की जांच पर नजर

नयापल्ली के TMC कार्यालय में कथित तोड़फोड़ को लेकर फिलहाल TMC और BJP की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं। TMC ने BJP पर आरोप लगाया है, जबकि BJP विधायक लक्ष्मण चंद्र घड़ुई ने इसे खारिज किया है और अलग घटनाक्रम का हवाला दिया है।

पुलिस जांच के दौरान CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच से घटना की परिस्थितियां स्पष्ट होने की उम्मीद है। जब तक जांच पूरी नहीं होती, किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा।

दुर्गापुर की घटना ने एक बार फिर स्थानीय राजनीतिक तनाव और पार्टी कार्यालयों की सुरक्षा से जुड़े सवालों को सामने ला दिया है। आने वाले दिनों में पुलिस जांच और दोनों दलों की आगे की प्रतिक्रिया से मामले की दिशा अधिक स्पष्ट हो सकती है।

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