राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुजरात समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक 2026 को औपचारिक मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही गुजरात में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी हो गई है।
नई दिल्ली: गुजरात में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) यानी UCC लागू करने की दिशा में एक अहम कानूनी कदम पूरा हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुजरात समान नागरिक संहिता विधेयक, 2026 को 17 सितंबर को मंजूरी दे दी थी। इसके साथ ही राज्य के लिए इस कानून को लागू करने का रास्ता साफ हुआ है।
हालांकि, विधेयक के अनुसार कानून लागू होने की तारीख राज्य सरकार की अधिसूचना से तय होगी। इसलिए राष्ट्रपति की मंजूरी और कानून के प्रभावी होने की तारीख को अलग-अलग समझना जरूरी है।
क्या है गुजरात का समान नागरिक संहिता कानून?
समान नागरिक संहिता का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों जैसे निजी नागरिक मामलों के लिए एक साझा कानूनी ढांचा तैयार करना है। गुजरात का कानून इन विषयों को लेकर अलग-अलग समुदायों पर लागू होने वाले कुछ व्यक्तिगत नियमों के स्थान पर समान प्रावधान प्रस्तुत करता है।विधेयक में अनुसूचित जनजातियों और कुछ ऐसे समुदायों को छूट दी गई है, जिनके प्रथागत अधिकारों को कानून में सुरक्षित रखा गया है। इस तरह कानून का दायरा तय करते समय कुछ पारंपरिक व्यवस्थाओं को भी ध्यान में रखा गया है।
विवाह और तलाक का पंजीकरण होगा अनिवार्य
गुजरात UCC के तहत कानून लागू होने के बाद होने वाले विवाहों का पंजीकरण अनिवार्य होगा। पहले से हुए विवाहों के पंजीकरण के लिए भी प्रावधान रखे गए हैं। हालांकि, केवल पंजीकरण नहीं कराने से विवाह अपने आप अमान्य नहीं होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति पर जुर्माना लगाया जा सकता है।
तलाक से जुड़े मामलों में भी कानूनी प्रक्रिया और पंजीकरण की व्यवस्था की गई है। विधेयक के अनुसार, विवाह संबंध समाप्त करने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। जबरदस्ती या धोखाधड़ी के जरिए विवाह के लिए सहमति लेने पर सात साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
बहुविवाह पर रोक और दोबारा शादी के नियम

विधेयक में एक से अधिक विवाह पर प्रतिबंध का प्रावधान किया गया है। विवाह के लिए निर्धारित शर्तों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इसके साथ ही तलाक या विवाह निरस्त होने के बाद दोबारा शादी करने के अधिकार और उससे जुड़ी प्रक्रिया को भी स्पष्ट किया गया है। कानून में तलाक के बाद पुनर्विवाह के लिए किसी अनुचित या अनिवार्य अतिरिक्त शर्त को लागू करने की व्यवस्था नहीं रखी गई है। इससे संबंधित प्रावधानों का उद्देश्य विवाह और तलाक की प्रक्रिया को एक समान कानूनी ढांचे में लाना है।
लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन जरूरी
गुजरात UCC का एक प्रमुख प्रावधान लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण है। कानून के मुताबिक, साथ रहने वाले या ऐसा संबंध शुरू करने की योजना बना रहे पात्र जोड़ों को संबंधित रजिस्ट्रार के पास विवरण जमा करना होगा। रजिस्ट्रार आवश्यक जांच के बाद पंजीकरण पर फैसला करेगा। संबंध समाप्त होने पर इसकी सूचना देने की प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है।
एक महीने से अधिक समय तक संबंध में रहने के बावजूद पंजीकरण के लिए विवरण जमा नहीं करने पर तीन महीने तक की जेल, 10,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजाएं हो सकती हैं। कानून में कुछ अन्य उल्लंघनों के लिए अलग-अलग दंड भी तय किए गए हैं।
लिव-इन संबंध से जन्मे बच्चों और महिलाओं के अधिकार
विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप से जन्मे बच्चों को वैध संतान का दर्जा दिया गया है। इसके अलावा, यदि किसी महिला को उसका लिव-इन पार्टनर छोड़ देता है, तो वह सक्षम अदालत में गुजारा भत्ता मांग सकती है। इन प्रावधानों के जरिए कानून ने संबंधों से जुड़े कुछ अधिकारों और जिम्मेदारियों को औपचारिक कानूनी ढांचे में शामिल किया है।










