केंद्र सरकार के प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन बिल 2026 को लेकर देश में सियासत गरमा गई है। केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने ईसाई समुदाय को भरोसा दिलाया है कि उन्हें किसी तरह का नुकसान नहीं होगा। वहीं, विपक्षी दलों ने इसे अल्पसंख्यकों, खासकर ईसाई समुदाय को निशाना बनाने वाला कदम बताया है। इस मुद्दे ने चुनावी माहौल में नई बहस को जन्म दे दिया है।
नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित FCRA (विदेशी अंशदान विनियमन) संशोधन बिल 2026 ने देश में सियासी बहस को तेज कर दिया है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने केरल में चर्च और सामाजिक संस्थाओं के नेताओं से मुलाकात के दौरान स्पष्ट किया कि बिल केवल उन संगठनों पर लागू होगा जो अवैध तरीके से विदेशी फंड का उपयोग करते हैं। उन्होंने कहा कि अच्छे और ईमानदार एनजीओ, मिशनरी संस्थान, स्कूल और अस्पताल किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करेंगे।
रिजिजू ने बताया कि फिलहाल बिल को संसद में रोक दिया गया है और चुनाव के बाद इसे लेकर और चर्चा की जाएगी। उनका कहना है कि यह कानून केवल पारदर्शिता बढ़ाने और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है।
विपक्ष का आरोप: अल्पसंख्यकों पर हमला
विपक्ष ने बिल के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। डीएमके सांसद पी विल्सन ने आरोप लगाया कि यह कानून खासकर ईसाई समुदाय को निशाना बनाने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि ईस्टर जैसे अवसरों पर बिल पेश करना समुदाय में डर फैलाने की कोशिश है। उनके मुताबिक, बिल के लागू होने से चर्च, मिशनरी स्कूल और अस्पताल जैसी संस्थाओं की संपत्ति और संचालन प्रभावित हो सकता है।
विल्सन ने इसे “ड्राकोनियन कानून” बताते हुए कहा कि यह ऐसे है जैसे किसी के घर में घुसकर संपत्ति छीन ली जाए। उन्होंने यह भी कहा कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने इस मुद्दे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने उठाया है।

FCRA संशोधन बिल 2026: क्या है नया प्रावधान?
FCRA बिल का उद्देश्य विदेशी अंशदान के उपयोग पर कड़ी निगरानी रखना है। सरकार का कहना है कि यह संशोधन पारदर्शिता बढ़ाएगा और देश के खिलाफ विदेशी धन के गलत उपयोग को रोकेगा। बिल में शामिल कुछ प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं:
- संदिग्ध संगठनों की जांच को सरल बनाना।
- राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ काम करने वाले संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई।
- विदेशी फंडिंग की पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
- ईमानदार एनजीओ और मिशनरी संस्थाओं को कोई नुकसान नहीं।
सरकार का तर्क है कि यह संशोधन किसी खास समुदाय या धार्मिक संस्थान को लक्षित नहीं करता, बल्कि केवल अवैध गतिविधियों और गलत वित्तीय लेन-देन को रोकने के लिए है। FCRA बिल 2026 के मुद्दे ने चुनावी राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। विपक्ष इस बिल को अल्पसंख्यक विरोधी बताते हुए लगातार हमलावर है। वहीं, सरकार इसे राष्ट्रीय हित और पारदर्शिता बढ़ाने वाला कदम बता रही है।











