फ्लाईदुबई के को-पायलट हमाम अल-हमामी पर विमान को नुकसान पहुंचाने और कैप्टन पर हमला करने के आरोपों की जांच जारी है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने उसकी पृष्ठभूमि पर सवाल उठाए, जबकि ओमान ने कहा कि उससे जानकारी नहीं मांगी गई थी।
वॉशिंगटन: फ्लाईदुबई की एक यात्री उड़ान में 30 सितंबर को हुई गंभीर घटना के बाद विमान सुरक्षा, पायलटों की पृष्ठभूमि जांच और अंतरराष्ट्रीय खुफिया जानकारी साझा करने को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि फ्लाईदुबई के को-पायलट हमाम अल-हमामी के अतीत को लेकर पहले से चिंताएं मौजूद थीं। ऐसे में यह जांच का विषय है कि इसके बावजूद उसे यात्री विमान उड़ाने की जिम्मेदारी कैसे मिली।
हमामी पर आरोप है कि उसने दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान के कॉकपिट में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर पर हमला किया और विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश की। घटना की जांच कई देशों की एजेंसियां कर रही हैं।
हालांकि, हमामी की मंशा, उसके संभावित संपर्क और घटना के पीछे किसी संगठन या देश की भूमिका को लेकर अभी जांच जारी है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी सरकार या संगठन को इस घटना से सीधे जोड़ना जल्दबाजी होगी।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने उठाया बड़ा सवाल
जेडी वेंस ने सोमवार को हमामी की पृष्ठभूमि को लेकर सवाल उठाया। उनका कहना था कि यह केवल अमेरिकी खुफिया जानकारी का मामला नहीं है, बल्कि हमामी के पिछले रिकॉर्ड और उसके व्यवहार से जुड़े घटनाक्रम भी चिंता पैदा करते हैं।
वेंस ने मूल सवाल यह उठाया कि यदि किसी व्यक्ति के बारे में पहले से सुरक्षा संबंधी चिंताएं थीं, तो उसे बाद में यात्री विमान के कॉकपिट तक पहुंचने की अनुमति कैसे मिली।
यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एयरलाइन पायलटों के लिए सुरक्षा जांच केवल तकनीकी दक्षता तक सीमित नहीं होती। उनकी पिछली नौकरी, प्रशिक्षण रिकॉर्ड और अन्य प्रासंगिक पृष्ठभूमि की जानकारी भी विमानन सुरक्षा के लिए अहम हो सकती है।
ओमान ने पहले हमामी के व्यवहार की जांच की थी
रिपोर्टों के मुताबिक, हमामी पहले ओमान में पायलट प्रशिक्षण से जुड़ा था। वहां अधिकारियों ने कथित तौर पर उसकी ऑनलाइन गतिविधियों और कट्टरपंथी विचारधारा में रुचि को लेकर चिंता जताई थी।
बताया गया है कि 2024 में उसे ओमान की सरकारी एयरलाइन की पायलट ट्रेनिंग से हटा दिया गया था। इसके बाद उसे दूसरी जिम्मेदारी दी गई। बाद में वह फ्लाईदुबई से जुड़ा और यात्री उड़ानों के संचालन में शामिल हुआ।
इस घटनाक्रम ने जांचकर्ताओं के सामने यह सवाल रखा है कि ओमान में सामने आई चिंताओं की जानकारी बाद में उसके नए नियोक्ता या संबंधित सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंची थी या नहीं।
ओमान का दावा- किसी देश ने जानकारी नहीं मांगी
ओमान ने कहा है कि किसी दूसरे देश ने हमामी की पृष्ठभूमि को लेकर उससे औपचारिक जानकारी नहीं मांगी थी।
ओमानी अधिकारियों के अनुसार, यदि किसी देश या संबंधित संस्था ने हमामी के बारे में जानकारी मांगी होती, तो उपलब्ध सुरक्षा संबंधी सूचनाएं साझा की जातीं।
इस बयान से जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू सामने आता है। सवाल यह है कि अंतरराष्ट्रीय विमानन क्षेत्र में पायलटों की पृष्ठभूमि संबंधी सूचनाएं किस तरह साझा की जाती हैं और अलग-अलग देशों की एजेंसियों के बीच सुरक्षा सूचनाओं के आदान-प्रदान की जिम्मेदारी किसकी होती है।
फ्लाईदुबई ने पिछला रिकॉर्ड क्यों नहीं मांगा?
रिपोर्टों के अनुसार, हमामी फ्लाईदुबई से घटना से कुछ महीने पहले जुड़ा था। इसी दौरान उसकी पिछली नौकरी और रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
बताया गया है कि फरवरी में फ्लाईदुबई से जुड़ने के समय ओमान से उसके पिछले रिकॉर्ड की पुष्टि के लिए संपर्क नहीं किया गया था। यदि यह जानकारी जांच में सही साबित होती है, तो विमानन सुरक्षा प्रक्रियाओं और भर्ती के दौरान किए जाने वाले बैकग्राउंड चेक पर गंभीर सवाल उठ सकते हैं।
हालांकि, इन दावों की पूरी तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। किसी व्यक्ति के पुराने प्रशिक्षण रिकॉर्ड में उठी चिंता अपने आप में यह साबित नहीं करती कि उसने बाद में कोई अपराध किया या किसी आतंकी संगठन के लिए काम किया।
ईरान कनेक्शन पर अभी कोई पुख्ता सबूत नहीं
फ्लाईदुबई घटना के बाद संभावित अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन को लेकर भी सवाल उठाए गए। खास तौर पर ईरान की भूमिका को लेकर चर्चा हुई।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि अभी तक उन्हें ऐसा कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला है, जिससे ईरान को घटना से जोड़ा जा सके। उन्होंने कहा कि इस पहलू की जांच जारी है और किसी आधिकारिक निष्कर्ष से पहले इस बारे में निश्चित टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
यह रुख महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी विमान पर कथित आतंकी हमले के पीछे किसी देश की भूमिका का आरोप लगाने के लिए ठोस खुफिया और जांच संबंधी प्रमाण आवश्यक होते हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में ऐसा कोई पुष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है।
तेल अवीव जाने वाली फ्लाइट में हमामी की तैनाती पर जांच
ओमान और इजराइल के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। ऐसे में हमामी को तेल अवीव जाने वाली फ्लाईदुबई फ्लाइट के क्रू में शामिल किए जाने की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में है।
रिपोर्टों के मुताबिक, इजराइल की शिन बेट, मोसाद, सेना और परिवहन मंत्रालय से जुड़ी एजेंसियां इस पहलू की जांच कर रही हैं। जांचकर्ताओं का मुख्य सवाल यह है कि यदि हमामी के बारे में पहले सुरक्षा संबंधी चिंताएं थीं, तो वे संबंधित विमानन या सुरक्षा संस्थानों तक क्यों नहीं पहुंचीं।
यह जांच केवल इस एक उड़ान की सुरक्षा तक सीमित नहीं रह सकती। इसके परिणाम अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों में पायलट भर्ती और सुरक्षा जांच की प्रक्रियाओं पर भी प्रभाव डाल सकते हैं।
हमामी पर आतंकवाद से जुड़े आरोप
घटना के बाद हमामी को सऊदी अरब से संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। UAE में उसके खिलाफ आतंकवाद से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है।
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि जांच एजेंसियों को उसके पास कथित तौर पर चरमपंथी सामग्री और सोशल मीडिया गतिविधियों से जुड़े संकेत मिले हैं। एक वरिष्ठ अमीराती अधिकारी के हवाले से यह भी कहा गया कि हमामी को कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित प्रशिक्षण मिला था।
यदि UAE की जांच में उस पर आतंकवाद से जुड़े गंभीर आरोप साबित होते हैं, तो उसे वहां कड़े कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, अंतिम सजा या आरोपों पर निष्कर्ष अदालत और आधिकारिक जांच के बाद ही तय होंगे।
क्या हमामी ने अकेले विमान गिराने की कोशिश की?
जांच से जुड़े प्रारंभिक दावों के अनुसार, अभी तक हमामी के किसी आतंकी संगठन या सरकार के साथ सीधे संबंध का प्रमाण सामने नहीं आया है। जांचकर्ताओं को आशंका है कि उसने कथित योजना अकेले बनाई हो सकती है।
इतालवी मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि हमामी ने कॉकपिट में धार्मिक गतिविधि का बहाना बनाकर कैप्टन के पास पहुंचने और उस पर हमला करने की कोशिश की। रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि उसने कथित तौर पर विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश की।
आरोपों के अनुसार, स्थिति बिगड़ने के बाद विमान को नीचे ले जाने की कोशिश की गई और ऑटोपायलट से जुड़ी प्रणालियों में भी हस्तक्षेप किया गया। जांचकर्ता इस बात की भी पड़ताल कर रहे हैं कि क्या दोनों इंजनों को बंद करने की कोशिश की गई थी।
इन घटनाक्रमों की तकनीकी और आपराधिक जांच अभी जारी है, इसलिए विमान के भीतर वास्तव में क्या हुआ, इसका अंतिम विवरण आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
विमानन सुरक्षा के लिए क्यों अहम है यह मामला?
फ्लाईदुबई घटना ने अंतरराष्ट्रीय विमानन उद्योग के सामने एक बड़ा सवाल रखा है—यदि किसी पायलट या को-पायलट के अतीत में सुरक्षा संबंधी चिंताएं दर्ज हों, तो अलग-अलग देशों और एयरलाइनों के बीच यह जानकारी किस तरह साझा की जानी चाहिए।
विमानन सुरक्षा में पायलटों की तकनीकी क्षमता के साथ उनकी पेशेवर और सुरक्षा पृष्ठभूमि भी महत्वपूर्ण होती है। अलग-अलग देशों की नियामक व्यवस्थाओं के बीच सूचना साझा करने में कोई कमी संभावित जोखिम पैदा कर सकती है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जांच एजेंसियां घटना के मकसद, हमामी की पृष्ठभूमि, भर्ती प्रक्रिया और संभावित अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की जांच कर रही हैं। जब तक आधिकारिक जांच पूरी नहीं होती, तब तक किसी व्यक्ति या देश की भूमिका को अंतिम रूप से तय करना उचित नहीं होगा।











