गंगा एक्सप्रेस-वे पर शुरू हुआ टोल टैक्स, जानिए किस वाहन पर कितना लगेगा शुल्क

गंगा एक्सप्रेस-वे पर 15 दिन की फ्री यात्रा खत्म हो गई है। अब क्लोज्ड टोल सिस्टम लागू होने के बाद वाहनों से दूरी के हिसाब से टोल वसूला जाएगा।

मेरठ से प्रयागराज तक बने गंगा एक्सप्रेस-वे पर 15 दिन की फ्री यात्रा सुविधा खत्म हो गई है। अब सभी वाहनों से तय दूरी के हिसाब से नए क्लोज्ड टोल सिस्टम के तहत शुल्क वसूला जाएगा।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सबसे लंबे गंगा एक्सप्रेस-वे पर अब टोल टैक्स वसूली शुरू हो गई है। 29 अप्रैल को उद्घाटन के बाद 15 दिनों तक लोगों को मुफ्त यात्रा की सुविधा दी गई थी। अब क्लोज्ड टोल सिस्टम लागू होने के बाद वाहन चालकों को तय दूरी के अनुसार शुल्क देना होगा।

15 दिन बाद खत्म हुई फ्री यात्रा सुविधा

गंगा एक्सप्रेस-वे पर बिना टोल यात्रा की सुविधा अब समाप्त हो चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 अप्रैल को इस एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन किया था। इसके बाद राज्य सरकार ने लोगों को 15 दिनों तक मुफ्त यात्रा की सुविधा दी थी।

अब अदाणी इन्फ्रास्ट्रक्चर और आईआरबी इन्फ्रास्ट्रक्चर की ओर से अलग-अलग हिस्सों में टोल वसूली शुरू कर दी गई है। गुरुवार रात 12 बजे से टोल संग्रह शुरू हुआ।

क्लोज्ड टोल सिस्टम से होगी वसूली

उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) के मुताबिक, गंगा एक्सप्रेस-वे पर क्लोज्ड टोल सिस्टम लागू किया गया है। इसका मतलब है कि वाहन जितनी दूरी तय करेगा, उसे उसी हिसाब से टोल देना होगा।

कार, जीप और वैन जैसे हल्के वाहनों के लिए टोल दर 2.55 रुपये प्रति किलोमीटर तय की गई है। मेरठ से प्रयागराज तक करीब 594 किलोमीटर की पूरी यात्रा करने पर लगभग 1800 रुपये तक टोल देना पड़ सकता है।

अलग-अलग वाहनों के लिए तय हुई टोल दरें

गंगा एक्सप्रेस-वे पर विभिन्न श्रेणी के वाहनों के लिए अलग-अलग टोल निर्धारित किया गया है:

  • दोपहिया, तीनपहिया और ट्रैक्टर: 905 रुपये
  • कार, जीप और वैन: 1800 रुपये
  • हल्के कॉमर्शियल वाहन: 2840 रुपये
  • बस और ट्रक: 5720 रुपये
  • मल्टी एक्सल और भारी मशीन वाहन: 8760 रुपये
  • ओवरसाइज वाहन: 11265 रुपये

इसके अलावा कुछ पुलों और विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए अतिरिक्त शुल्क भी लिया जा सकता है।

मेरठ से प्रयागराज तक फैला है एक्सप्रेस-वे

गंगा एक्सप्रेस-वे कुल 594 किलोमीटर लंबा है और यह मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज से होकर गुजरता है।

इस परियोजना का निर्माण पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत किया गया है। एक्सप्रेस-वे के अलग-अलग हिस्सों का निर्माण Adani Infrastructure और IRB Infrastructure ने किया है।

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